हजारों सालों से सांप इंसानी सभ्यता का हिस्सा रहे हैं — कभी यह खेतों की मेड़ों पर फुफकारते दिखे हैं तो कभी जंगलों और झाड़ियों में सरसराते नजर आए। पौराणिक कथाओं और लोककथाओं में पूजे जाते रहे तो आम जीवन में कई बार ‘देखते ही मारे’ भी जाते रहे।
बचपन में अजिया (दादी) से सुना था कि धरती शेषनाग के सिर पर टिकी है, जब वह फन हिलाता है तो भूकंप आता है। अम्मा ने बताया कि लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार हैं। प्राथमिक कक्षा की किताबों में पढ़ा कि समुद्र मंथन के लिए वासुकि नाग को रस्सी की तरह प्रयोग किया गया। उन्हें फिर भगवान शिव के गले मे लिपटे भी देखा।
थोड़ा बड़े हुए तो जाना कि फिल्मों में सपेरों के बीन की धुन पर नाचने वाला सांप दरअसल बहरा होता है। उसके कान ही नहीं होते हैं। वे केवल अपनी हड्डियों और जबड़े की हड्डी के माध्यम से कंपन महसूस कर सकते हैं। सांप सिर्फ बीन को हिलते-डुलते देखकर उसके अनुसार अपना सिर हिलाता रहता है और हमें भ्रम होता है कि वह बीन की धुन पर नाच रहा है। इसी तरह नाग या नागिन को मार देने पर , बचे हुए साथी द्वारा 12 साल बाद बदला लेने जैसी कहानियां भी कपोलकल्पित हैं। सांप की याददाश्त और बुद्धि इतनी तेज होती तो वह इस तरह बेचारा न होता, मारा-मारा न फिरता।
इसी तरह सांप को मारने वाले की फ़ोटो सांप के आंख में खिंच जाने की किवदंती भी शुद्घ गप्प है। उसकी आँखों में कैमरा या सीसीटीवी जैसा कोई भी उपकरण नहीं होता है। सर्पों में नागमणि होने की बात भी कोरी कल्पना ही है। उसके रूप बदलने, इच्छाधारी होने की बातें भी साफ हवा हवाई हैं। कुछ सांप जो पेड़ों पर रहते हैं, कुछ दूर उछलकर जा जरूर सकते हैं लेकिन उड़ नहीं सकते जैसा कि कई बार हमें बताया और दिखाया जाता है।
विद्यालय गए तो विज्ञान की किताबें में पढ़ा कि सांप प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह प्रकृति के संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। सांप चूहों और अन्य कीटों को खाकर फसलों की रक्षा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग सांप को खेतों का रक्षक मानते हैं और सांप को किसानों का मित्र। जीव विज्ञान में पढ़ा कि भारत में पाई जाने वाली सांपों की लगभग 300 प्रजातियों में से केवल कुछ ही ज़हरीली होती हैं — जैसे कोबरा, करैत, वाइपर। बाकी अधिकांश सांप इंसानों के लिए हानिकारक नहीं होते।अधिकतर लोगों में सांप को लेकर अनावश्यक भय होता है। सांप केवल तभी हमला करता है जब उसे खतरा महसूस होता है। काट भी ले तो सांप के विष से बना एंटीडोट उसके जहर का प्रभावी उपचार भी है।
इसलिए अगर कभी सांप काट ले, तो घबराएं नहीं। तुरंत अस्पताल जाना ही सर्वोत्तम उपाय है। झाड़-फूंक, घरेलू इलाज या चुंबन-चूसने जैसे फिल्मी नाटक करने से बचें। आजकल एंटी-वेनम ( विषरोधक दवा) आसानी से उपलब्ध है और समय पर इलाज मिलने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है।
भारतीय संस्कृति में सांप का विशेष स्थान है। नाग पंचमी पर नागों की पूजा की जाती है। भगवान शिव के गले में वासुकि नाग विराजमान रहते हैं। हमारे गांवों में पुराने पीपल या बिल्व वृक्ष के पास सांपों की मूर्तियां आज भी देखी जाती हैं। राजस्थान और मध्य भारत के कई राजपूत कुलों के ध्वज में नाग अंकित रहता है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। बैस राजपूतों के ध्वज में भी नाग देवता को स्थान दिया गया है।
सांप हमें कई बार डराते तो हैं लेकिन प्रकृति से सामंजस्य, सजगता और विनम्रता भी सिखाते हैं। हमें उनके प्रति किसी अंधविश्वास से प्रेरित होकर नहीं, बल्कि सम्मान और समझदारी से व्यवहार करना चाहिए। इस वर्ष के सांप दिवस का थीम – ” सम्मान करें, डरें नहीं: प्रकृति के मूक संरक्षकों की रक्षा करें ” – हम सभी का ध्येय होना चाहिए।
#विश्वसर्पदिवस
(विनय सिंह बैस)
जिनके कुल के ध्वज में नाग देवता विराजमान हैं