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‘मानवाधिकार’ का ‘पोषक’ : कितना ‘शोषक’?

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

मानवाधिकार’ की बात करनेवाला नरेन्द्र मोदी मानवता का कितना पोषक रहा है? गोधराकाण्ड भूल गया? उसने ‘नोटबन्दी’ और ‘कोरोना’ तथा ‘किसान-आन्दोलन’ में मारे गये मनुष्यों के प्रति आज तक ‘एक शब्द’ नहीं कहा। ख़ुद को चौकीदार बताकर ‘गधे’ से प्रेरणा लेनेवाला कथित मोदी भारतीयों को ‘सब्जबाग़’ दिखाता आ रहा है। आये-दिन जम्मू-कश्मीर में हमारे सुरक्षाकर्मी मारे जा रहे हैं; परन्तु ‘मानवाधिकार’ की बात करनेवाला नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी मौन बना रहा है।

जो लोग कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी का कोई ‘विकल्प’ नहीं है, वे पूर्णत: सही कहते हैं; क्योंकि वैसा ‘हृदयहीन’ व्यक्ति ढूँढे नहीं मिलेगा। लगभग सात वर्षों के अपने कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को जीभर कर छला है। वह तो ‘लोकतन्त्र की प्रयोगशाला’ में अपने हितों के अनुकूल ‘प्रयोग’ करते हुए, उसे ‘संयोग’ बनाता आ रहा है और देश की समस्त संवैधानिक संस्थाओं का यथाशक्य दोहन करता आ रहा है। वह देश की जनता के रुपयों का भरपूर दुरुपयोग करता आ रहा है। इस प्रकार उसकी संवेदनहीनता धरातल पर लक्षित हो रही है।

क्या नरेन्द्र मोदी को ज्ञात नहीं कि जिस दल का वह प्रमुख बना हुआ है; जिस केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल और मन्त्रिपरिषद् का वह शीर्ष नेता बना हुआ है, उसमें सर्वाधिक ‘अपराधी’ भरे हुए हैं; ज़मानत पर छोड़े गये ‘खुले साँड़’ हैं, जो कभी ‘दबंग’ की भूमिका में जनसामान्य को रौंदा करते थे। ‘तड़ीपार’ का अपराधी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विभाग पर कुण्डली मारे बैठा है।

महँगाई चरम पर है; किन्तु नरेन्द्र मोदी ने अपनी ज़बाँ पर ताला लगा रखा है। उसके दल के गुण्डे ‘तीन सौ दो’ के अपराधी हैं; किन्तु वह उनका ‘महिमामण्डन’ करता आ रहा है।

हमारा युवावर्ग ग़लत शिक्षा और परीक्षानीतियों और पद्धतियों के कारण ‘भ्रष्टाचार’ के शिकार हो रहे हैं। ‘नारिशक्ति’ और ‘मातृशक्ति’ की बात करनेवाला अपनी पत्नी के साथ न्याय कर पाया? आये-दिन देश में ‘शिशु से लेकर वृद्धा’ के साथ सामूहिक दुष्कर्म होता आ रहा है। ख़ुद को देश का मुखिया कहनेवाला ‘क्या’ कर पाया? क्या कर पा रहा है? देश में विदेश से ‘काला धन’ लाने और ‘आतंकवाद’ समाप्त करने के नाम पर देशवासियों को विश्वास में लाये बिना जिसने आधी रात से ‘नोटबन्दी’ लागू कर दिये जाने की घोषणा की थी, वह आज तक बता नहीं पाया है कि देश में कितना ‘काला धन’ आया है और वह कहाँ रखा गया है। हिन्दुत्व के ठीकेदार मोदी (‘ठेकेदार’ अशुद्ध है।) को नहीं मालूम, कश्मीर में हिन्दू-परिवारों के साथ जघन्य कृत्य किये जा रहे हैं, फिर मानवाधिकार ढिंढोरा पीटनेवाला चुप्पी क्यों साधे हुए है? अपने शासनकाल में उसने ‘हिन्दुओं’ के हित में कौन-सी योजना बनायी है? हाँ, उसने एक काम अवश्य किया है– हिन्दुओं को नाना ख़ानो में बाँटकर एक-दूसरे के प्रति वैमनस्य का बीज-वपन कर दिया है। अँगरेज़ों की नीति– “Divide And Rule” (बाँटो और राज करो) को लागू कर, पच्चास वर्षों तक शासन करने का ‘दिवास्वप्न’ देखनेवाला लोभी स्वयं को ‘लोकतन्त्रीय अधिनायक’ बना रखा है।

बेशक, नरेन्द्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है। दूसरी ओर, विकल्प की बात करनेवाले लोग ‘रतौंधी’ और ‘दिनौंधी’ से ग्रस्त हो चुके हैं; क्योंकि उन्होंने ‘भारत का राजनैतिक इतिहास’ पढ़ा नहीं है और यदि पढ़ा भी होगा तो ‘हनुमान् चालीसा’ की तरह से।

धिक्कार है!

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १२ अक्तूबर, २०२१ ईसवी।)