बाल-दिवस के अवसर पर बालसाहित्य-विशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का एकल व्याख्यान

"कभी इलाहाबाद की बालसाहित्य और बालपत्रकारिता शिखर पर थीं --- डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

“बाल्यकाल मानव-जीवन की आरम्भिक अवस्था है, जिसमें मनुष्य की समस्त शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का आविर्भाव , प्रस्फुटन तथा विकास निहित है। यह एक विधायन विज्ञान भी है। इस दृष्टि से बालसाहित्य का प्रासंगिक और मनोवैज्ञानिक लेखन अपरिहार्य हो जाता है; चाहे वह पत्र-पत्रिकाओं के रूप में हो अथवा पुस्तकों के रूप में; किन्तु हमें दोनों की भूमिका पर दृष्टिपात करना होगा। ऐसा इसलिए कि दोनों में ही बालसाहित्यकार का विशिष्ट योगदान रहता है। हम जब बाल-पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करते हैं तब ज्ञात होता है कि देश की प्रथम बालपत्रिका होने का श्रेय ‘बाल-दर्पण’ को जाता है; दूसरे स्थान पर ‘बालहितकारक’ तथा तीसरे स्थान पर इलाहाबाद से १९०३ ई० में प्रकाशित ‘आर्य बालहितैषी’ था। हमें नहीं भूलना चाहिए कि सम्पूर्ण विश्व में सबसे बड़ी संख्या में बालसमाचारपत्र-पत्रिकाएँ इलाहाबाद से ही प्रकाशित हुई हैं।”

उपर्युक्त उद्गार डी०के०पब्लिक स्कूल ऐण्ड कॉलेज, मुट्ठीगंज की ओर से विद्यालय-सभागार में आयोजित बालदिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बालसाहित्य-विशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने अपने एकल व्याख्यान में व्यक्त किये थे। उससे पूर्व डॉ० पाण्डेय ने कटे फीते को जोड़ते और दीपप्रज्वलन करते हुए समारोह का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर विद्यालय की प्रबन्धक-प्राचार्य डॉ० रजनी गुप्ता ने मुख्य अतिथि डॉ० पाण्डेय का सारस्वत सम्मान किया था। विद्यालय की छात्राएँ– गरिमा, श्वेता, रेखा ने स्वागतगीत प्रस्तुत किया था।

मुख्य अतिथि डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने इलाहाबाद की गौरवमयी बालसाहित्य और बाल-पत्रकारिता की महत्ता को निरूपित करते हुए बताया, “एक समय था, जब कभी इलाहाबाद की बालसाहित्य और बालपत्रकारिता शिखर पर थीं। १९१४ ई० में रामजी लाल के सम्पादन में बालशिक्षा से सम्बन्धित ‘विद्यार्थी’ नामक पत्रिका का प्रकाशन हुआ था। १९१५ ई० में श्रीमती गोपाल देवी ने ‘शिशु’ नामक पत्रिका आरम्भ की थी। इंडियन प्रेस से बद्रीनाथ भट्ट के सम्पादन में ‘बालसखा’ की शुरुआत की गयी थी। आगे चलकर, बाल-पत्रिकाओं का अम्बार लग गया था :— खिलौना, अक्षय भैया, वानर, तितली, बालबोध, शेर बच्चा, लल्ला, मनमोहन, विज्ञान जगत्, जंगल, नन्हे-मुन्नों का अख़बार, बाल नगर, अच्छे भैया, बालमित्र, शम्पा आदि के रूप में।” 

उसके बाद डॉ० पाण्डेय ने इलाहाबाद के बालसाहित्यकारों की दृष्टि और सृष्टि पर प्रकाश डालते हुए बताया, “बालमनोविज्ञान के पारखी रचनाधर्मियों की एक दीर्घ परम्परा में पं० सोहनलाल द्विवेदी, ठाकुर श्रीनाथ सिंह, देवेन्द्रदत्त तिवारी, अंजनी कुमार ‘दृगेश’, उमाकान्त मालवीय, उदयनारायण सिंह, प्रेमनारायण गौड़, शकुन्तला सिरोठिया, शुकदेव प्रसाद, यश मालवीय, विनय कुमार मालवीय, डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आदि की बालसाहित्य-संवर्द्धन में महती भूमिका रही है।” मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० पाण्डेय ने विद्यार्थियों, अध्यापकों तथा अभिभावकों के मध्य इलाहाबाद की बालसाहित्य और बालपत्रकारिता पर बृहद् विवेचन और विश्लेषण करते हुए यह चिन्ता व्यक्त की– वही इलाहाबाद अब बालसाहित्य और बालपत्रकारिता के क्षेत्रों में पूरी तरह से ढलान पर आ चुका है, जिसे सँभालने की आवश्यकता है। विद्यालय की अध्यापक सुषमा शुक्ल ने समारोह का संचालन और विद्यालय के साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रभारी रामानुज पटेल ने आभार-ज्ञापन किया था। इस अवसर पर रम्या गोस्वामी, रंजना चक्रवर्ती, सुभदा दास, गोपाल गुप्ता, नीहारिका शर्मा, ऋद्धि यादव, शान्तनु खरे, डॉ० शोभा जायसवाल आदि उपस्थित थीं।

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