सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

महाशिवरात्रि विशेष

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
– ऋग्वेद (7.59.12)

विभिन्न जगहों पर भिन्न – भिन्न रूपों में भोले नाथ जाने जाते हैं । जैसे —-

पशुपतिनाथ – पशु पक्षियों व आत्माओं का स्वामी
(सिंधु घाटी सभ्यता में इसी रूप की पूजा होती थी)
रुद्र – क्रोधी स्वभाव का मंगल व अमंगल करने वाला
(सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लेख, अंतरिक्ष का देवता)
अर्धनारीश्वर – शिव और शक्ति के मिलन का संयुक्त रूप
हर – पापनाशक
भैरव – डर का विनाशक
ओमकार – ‘ओम’ का रचयिता
नटराज – नृत्य का देवता
नीलकंठ – नीले कंठ वाला
(समुद्र मंथन से निकले विष ‘हलाहल’ को पीने के कारण)
कोचाडियान – जटाधारी

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगम्
निर्मलभासित शोभित लिंगम्।
जन्मज दुःख विनाशक लिंगम्
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥1॥

भावार्थः- जो ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवगणों के इष्टदेव हैं, जो परम पवित्र, निर्मल, तथा सभी जीवों की मनोकामना को पूर्ण करने वाले हैं और जो लिंग के रूप में चराचर जगत में स्थापित हुए हैं, जो संसार के संहारक है और जन्म और मृत्यु के दुखो का विनाश करते है ऐसे भगवान आशुतोष को नित्य निरंतर प्रणाम है।

ऐसे अवढरदानी महादेव को समर्पित महान पर्व पर http://www.indianvoice24.com परिवार आप सभी के सुख – शान्तिमय जीवन की प्रार्थना करता है ।