डॉ० निश्शंक/निशंक! हमारे शिक्षित बेरोज़गार विद्यार्थियों के घाव पर नमक न छिड़कें

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

मन्त्रि जी! बी०एड्० की अनिवार्यता ‘घास’ छीलने के लिए की गयी है? आप संवादहीनता की स्थिति क्यों उत्पन्न कर रहे हैं? ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ में जो ‘दलाल’ (कमीसनख़ोर) बैठे हुए हैं और देश की शिक्षा, परीक्षा तथा सेवापद्धति जिस प्रकार की विकृति की ओर बढ़ रही है, उन्हें हटाने और रोकने की दिशा में चिन्तन-अनुचिन्तन करें और हमारे विद्यार्थियों के हित में कर्म करें।

अब रहा बेरोज़गारों की फ़ौज खड़ी करने का विषय तो मन्त्रि महोदय! हमारे शिक्षित-अर्द्ध-शिक्षित बेरोज़गारों के लिए आपकी सरकार ने पाँच वर्ष और सौ दिनों में ऐसी कौन-सी रोज़गारपरक ठोस योजना-परियोजना ला सकी है, जिससे .०१ प्रतिशत भी बेरोज़गारी दूर हो सकी हो? जो स्वयं भिखारी हो, वह दूसरों का भला कैसे पेट भर सकता है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० सितम्बर, २०१९ ईसवी)

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