जंग ए आज़ादी की कहानी (संदर्भ:- स्वतंत्रता दिवस)

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
कवि, साहित्यकार

  ये आत्मा तो अजर अमर है ।

निसार तन-मन स्वदेश पर
है चीज़ क्या जेल, गन, मशीनें
क़ज़ा का भी हमको डर नहीं है।।

ये गीत उन अमर शहीदों ने गाये थे जिन्होंने हमारे हिंदुस्तान को आज़ाद कराने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। फाँसी के फंदे पर हँसते हुए झूल गए। जय हिन्द व वन्दे मातरम के नारों से जिन्होंने धरती अम्बर गुंजायमान कर दिया। भारत माता की जयकार से हिंदुस्तान को गुंजा दिया था। आज़ादी की जंग के दौरान जब ये गीत गाये तो ब्रिटिश हुकूमत ने इन गीतों को जब्त कर लिए। इन्हें लिखने वालों को अंग्रेज सरकार ने उत्पीड़ित किया। ये गीत आज़ादी की चिंगारी सुलगाने में मदद गार साबित हुए।लाखों दिलों में जिनके कॉटन आज़ादी की शमा जल गई थी।भारत लम्बे समय तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। भारतवासी उस समय संकल्प के साथ विश्वास के साथ आज़ादी की लड़ाई में उतरे। महिलाओ ने भी आज़ादी के संग्राम में भाग लिया। आज जो स्वतंत्रता सेनानी घर बैठे है उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए बहुत संघर्ष किया।

1857 की क्रांति ने ही भारत मे स्वतंत्रता की अलख जग दी थी। झांसी की रानी ने अंग्रेजों से युद्ध किया। तांत्या टोपे ने युद्ध किया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम खूब घमासान हुआ।

भारत की आज़ादी में हमारे सेनानियों के खून की एक एक बून्द शामिल है। सुभाष चन्द्र बोस ,खुदीराम,रामप्रसाद बिस्मिल, सरदार भगत सिंह,चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने प्राण देकर भारत को आज़ाद करा दिया।1947 का शुभ दिन इन्हीं क्रान्तिकारियो के कारण हमें देखने को मिला। हम मुक्त गगन में भारत माता की जय बोलने लगे। 15 अगस्त 1947 के दिन हमें पूर्ण आज़ादी मिल गई।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को बनाया गया। आज़ादी की लड़ाई का शंखनाद मंगल पांडेय की बगावत से हुआ मंगल पांडेय ब्रिटिश रेजिमेंट के सैनिक थे। यहाँ के कारतूस में गाय के मांस की चर्बी देखी तो इन्होंने इसका विरोध किया गाय को बचाने के लिए पांडेय ने बगावत की। इन्होंने बैरकपुर में रेजिमेंट के सबसे बड़े अधिकारी की हत्या कर दी। क्रान्ति की आग भड़क उठी। समस्त देश मे ये खबर फैल गई। अंग्रजो ने पांडेय को फाँसी दे दी। क्रान्ति विफल हो गई। भारत से अंग्रेजो को भगाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से फिर क्रांतियां हुई।देश के लोगो को राजनीतिक स्थितियों से अवगत कराया। इस हेतु कई संस्थाएं बनाई। अखबारों में कविता लेख छापे। दादाभाई नारोजी ने 1867 में ईस्ट इंडिया एसोसियेशन बनाया। 1876 में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने इंडियन नेशनल एसोसिएशन बनाया। इन संस्थाओं से देश मे एकता लाने का काम हुआ। 1885 में इंडियन नेशनल कॉंग्रेस की स्थापना की गई। जिसमें गांधी जी सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए।गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन चंपारण सत्याग्रह दांडी मार्च भारत छोड़ो आंदोलन किये जिससे अंग्रेजो की जड़ें हिल गई।

आज़ादी की लड़ाई को हर जाति हर धर्म के लोगो ने एकता में रहकर एक साथ लड़ा। तभी आज़ादी मिली। अंग्रेजों ने फुट डालो राज करो नीति से यहाँ खूब राज किया लेकिन जब देश मे एकता हुई तभी अंग्रेजों से देश आजाद हुआ। जिन जिम्मेदार लोगों ने इस देश को आज़ादी दिलाई उनमें गाँधीजी के साथ बाल गंगाधर तिलक विपिन चन्द्र पाल लाला लाजपतराय। जिन्हें लाल बाल पाल की जोड़ी कही जाती थी। गोपाल कृष्ण गोखले अरविन्दो घोष, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जिन्होंने नारा दिया था तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा। भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद। बटुकेश्वर दत्त
सुभाष चन्द्र बोस ने आज़ाद हिन्द फ़ौज बनाई थी। आज़ाद हिन्द फ़ौज ने बर्मा इंफाल कोहिमा में जापानी सेना के साथ युद्ध किया था।

महारानी लक्ष्मीबाई ने आज़ादी की अलख जगाई। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में आगे जाकर सरोजिनी नायडू सिस्टर निवेदिता एनिबिसेन्ट , मातङ्गिनी हाजरा प्रमुख नाम है।

आज़ादी की लड़ाई हेतु हिन्दू मुस्लिम एकता हेतु कई संतो समाज सुधारकों ने काम किया जिनमे राजाराम मोहन राय रामकृष्ण परमहंस,स्वामी विवेकानंद, जगदीश चन्द्र बोस रवींद्रनाथ टैगोर काजी नजरुल इस्लाम आदि नाम मुख्य थे।

हम आज़ादी का 73 वां साल मना रहे हैं। 200 साल तक भारत मे ब्रिटिश शासन में हम गुलाम रहे। 17 विन व 18 वी सदी में अंगेज यहाँ जमे रहे हमारी फुट के कारण। आज हमें ये सबक मिला है कि हम एकता में रहे चाहे कोई जाति या धर्म से हो। मानव धर्म एक है ऐसा मानकर चलें। देश की एकता अखंडता सलामत रखें। हम एक रहें नेक रहें। देश के विकास की सोचे चौबीस घण्टों में कुछ समय देश के लिए जरूर निकालें।

आज देश में जो विकास हुआ है सभी क्षेत्रों में ये काबिले तारीफ है।भारत डिजिटल इंडिया बन गया है। सारी दुनिया एक दूसरे से जुड़ गई है। विश्व ग्राम की कल्पना अब अच्छी लगती है। वसुधैव कुटुम्बकम की भावना रखें तो सब देश तरक्की करेंगे। भारत को महाशक्ति बनाने के लिए मिसाइल मेन कलाम जी ने विजन दिया है उसी पर चलें। ग्राम विकास करते करते आगे बढ़े। गाँधीजी व कलाम साहब का सपना साकार करें। भारत की विशेषता अनेकता में एकता बनी रही। विविधता में एकता बनी रहे।ऐसे काम करें।

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”, कवि , साहित्यकार
श्रीराम कॉलोनी, भवानीमंडी, जिला झालावाड
राजस्थान

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