मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

न जाने क्यों ये दुनिया मेरी आँखों से जलती है

June 15, 2022 0

बहे काव्य की गंगा धारा, राष्ट्र जागरण धर्म हमारा के ध्येय वाक्य का अनुसरण करते हुए कविता के माध्यम से राष्ट्र जागरण करने वाली देश में कवियों की सबसे बड़ी और अग्रणी संस्था राष्ट्रीय कवि […]

कविता : हृदय की वेदना

April 26, 2022 0

आदित्य त्रिपाठी, सहायक अध्यापक बे०शि०प०  भला कब कौन समझा है! भला कब कौन समझेगा! हृदय की वेदना तेरे सिवा अब कौन समझेगा? मैं तुझको आजमा लेता मगर क्या आजमाऊँगा, तुम्हारे प्यार से दीपित दिये दिल […]

ग़ज़ल– मोहब्बत में असर होता तो ये हालात न होते

April 26, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ)  सज़ाएं काट लूँगा मैं तुम्हारा नाम न लूँगा | कभी भी अब ज़माने में प्यार से काम न लूँगा || मुहब्बत में असर होता तो ये हालात न होते | […]

साहित्यकार, कवि डॉ. राजेश पुरोहित ने काव्यपाठ के जरिए दिया नशामुक्त समाज बनाने का संदेश

December 8, 2021 0

भवानीमंडी:- समाज मे बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने व नया हिंदुस्तान बनाने के लिए साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा अनूठी पहल की गई । संस्थान द्वारा नशा मुक्त समाज आंदोलन अभियान कौशल का […]

आवर्त्तन और दरार

October 18, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट में, तरह-तरह तस्वीर।राँझा बिकते हैं कहीं, कहीं बिक रहीं हीर।।दो–धर्म पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे में कैसे भला, सब तक पहुँचे प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर […]

जीवन क्या है ? एक बहती हुई नदी

August 26, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवन क्या है ?एक बहती हुई नदी है ।कंकरीले और पथरीले रास्तोंपर बहती हुई,सर्दी और गर्मी सहती हुई।जैसे नदी चलना नहीं छोड़ती है ऐसे ही ये जिन्दगी है ।अनेक रूकावटें और अनेक […]

बँटवारे का दंश!

July 29, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विश्वास की डोर थामेसरक रहा थालक्ष्य की ओर—तन-मन मेंआशंकाओं की झंझावात समेटेडोर की मध्य-बिन्दु के स्पर्श की अनुभूतिबाहर से भीतर तकसिहरन भरती जा रही थी।अचानक…. सहसा!विश्वास की कुटिल चालेंचलायमान हो उठीं।विस्फारित […]

चिथड़ा-चिथड़ा मन

July 23, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–माना तू सरकार है, सीमा अपनी जान।मत छेड़ तू हम सबको, खोयेगा तू मान।।दो–मन आन्दोलित है यहाँ, रोक सके तो रोक।ज्वाला से मत खेल तू! बोल रहा है लोक।।तीन–जन-जन जागो […]

विषय विसंगति से भरा, मन लेता है भेद

July 20, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मायावी संसार में, भाँति-भाँति के लोग।पाप-घड़ा है भर रहा, यहीं करोगे भोग।।दो–जीवन रस की गागरी, कर लो छककर पान।भाव-समादर है यहीं, मिलता भी अपमान।।तीन–यहाँ-वहाँ के भेद से, मन में होता […]

घायल होती मुसकान

July 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भूख से बिलबिलाती आँतेंचीथड़ों में लिपटी-चिपटी-सिमटीअपनी पथराई आँखें पालतीटुकुर-टुकुर ताकतीआँखों से झपटने की तैयारी करतीमेले-झमेले की गवाह बनती।आस-विश्वास की फटही झोली लियेतमन्नाओं-अर्मानों की लाश ढोतीफफोलों से सजी हथेलियों कीरेखागणित पढ़तेहोठों […]

कुचल डालो! इस सियासी चाल को अब

June 13, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आदमीयत का यह रोना हो गया है,देश का किरदार बौना हो गया है।हासिल क्या उन्हें हस्पताल-पार्क से,‘ब्यूटी पार्लर’ कोना-कोना हो गया है।शेर-मानिन्द देश जो गरजता था,अब वह जयचन्दों का छौना […]

कविता : जीवन में माधुर्य लुटाये वो कविता होती है

May 25, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी123rkpurohit@gmail.com शब्दों का मधुर गुंजन कविता होती है। भावना की अभिव्यक्ति कविता होती है।। छन्द मात्रा लय ताल सुर कविता होती है। जीवन मे माधुर्य लुटाये वो कविता होती है।। प्रकृति का […]

भाव, वर्ण के समन्वय से, मैं शब्द नए पिरोता हूँ

November 3, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद- वर्ण की अँधेरी खोह में , नित भाव प्रसून उगाता हूँ। भाव, वर्ण के समन्वय से, मैं शब्द नए पिरोता हूँ ।। शब्द जोड़ जोड़कर , कविता रसधार बहाता हूँ। हिन्दी माता […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी की असाधारण कविता :— ‘हमारी हिन्दी’

October 5, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हिन्दी के नाम पर, हिंगलिश की मंडी है | सिखाता शुद्ध हिन्दी, तो कहते घमंडी है | मगर मैं तो कहता, वे सारे पाखंडी हैं | पल में झुलसने वाली गोबर की […]

आवाज़ उठानी ही होगी सरताज बदलने ही होंगे

September 18, 2017 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ लखनऊ (युवा गीतकार) अल्फ़ाज़ बदलने चाहिए जज़्बात बदलने की ख़ातिर | हर सोच बदलनी चाहिए हालात बदलने की ख़ातिर || अग़लात कुचलने हों अगर अस्हाब बदलने ही होंगे | आदाब बदलने […]