विचारणीय विषय : छन्द-विधान पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है

October 8, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘छन्द-विधान’ पर अब नये सिरे से विचार करने की आवश्यकता है; क्योंकि कवि-कवयित्रियाँ ‘वर्तनी-अशुद्धि’ को प्रश्रय देते हुए, स्वेच्छाचारिता का परिचय देती आ रही हैं। अधिकतर सर्जक अपनी सुविधानुसार ‘लघु’ और ‘दीर्घ’ […]