सर्जक का मन-मस्तिष्क नितान्त सुकोमल होता है

April 13, 2023 0

सर्जक का मन-मस्तिष्क नितान्त सुकोमल होता है, यदि वह सर्जक है तो; क्योंकि उसकी दृष्टि ‘समय-सत्य’ होती है। वह देश (स्थान), काल तथा पात्र की रचना करता है, जिसमे उसकी भावना, संवेदना, कल्पना तथा विचारशीलता […]