होती है तो निन्दा होने दे

October 31, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सूरज को शर्मिन्दा होने दे, चाहत को परिन्दा होने दे। हिम्मत को सजा ले होठों पे, ज़ालिम को दरिन्दा होने दे। ज़ुल्फ़ों को झटक दे चेहरे से, औ’ ख़ुद को […]