पथिक

April 8, 2022 0

पथिक हो?फिर विराम क्यों ?चलना तेरा काम हैफिर आराम क्यों? पथिक हो?फिर पथ पर पड़ेकंकरओं सेतुमको भय क्यों? पथिक हो?फिर पथ परचलने से तुम कोथकावट क्यों? पथिक हो?फिर हार जाने केडर से तुम कोघबराहट क्यों? […]

मैं प्रेम पथिक आवारा भँवरा, काँटों से भी प्यार करूँ

July 5, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (इलाहाबाद) मैं प्रेम पथिक आवारा भँवरा, काँटों से भी प्यार करूँ, अधर लिखें चुम्बन की पाती, नयनों  से संवाद करूँ। ऋतु वसंत की मादकता हो, या पावस के भारी दिन, उर में बजती  नित […]