आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

February 11, 2023 0

‘लड़पोछन’ शब्द की सार्थकता? ‘लड़पोछन’ न तो कोई सार्थक शब्द है और न ही ‘अश्लीलता’ का बोध करानेवाला किसी भी प्रकार का शब्द है। ‘लड़पोछन’ मे दो शब्द दिख रहे हैं :― (१) लड़ (२) […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

June 13, 2022 0

★ ‘कामायनी’ की काव्य-कमनीयता वस्तुत: आज न तो ‘कामायनी’-सदृश कृती कृतिकार हैं और न ही अनुभव करनेवाले पाठक-वर्ग; क्योंकि कविता के नाम पर ‘हृदयजीविता’ के स्थान पर ‘विचारजीविता’ पाली जा रही है। कविता का उद्गम […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

May 3, 2022 0

एक आभासी मित्र के लेखन पर मैने एक टिप्पणी की थी :—“ध्यातव्य– व्यक्ति का निर्माण कोई नहीं कर सकता; निर्माण केवल ‘कृत्रिम वस्तु’ का होता है। आप कर सकते हैं– व्यक्तित्व का विकास/संवर्द्धन।”इस पर उनकी […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला ◆ ‘अल्ला-अल्लाह’ को समझें :–

October 19, 2018 0

‘शब्द’ आप्त (प्रामाणिक, निष्णात)मनुष्य-द्वारा व्यक्त ज्ञान है। विज्ञ और पाठक-वर्ग को किसी भी ‘गर्हित मानव-कृत धर्म’ से स्वयं को पृथक् कर, ‘शब्द-संस्कार’ संवर्धन करने की सामर्थ्य अर्जित करनी चाहिए और अपने लोक में शब्द-संधान करना […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : शब्द-अर्थ-प्रयोग और पुनरुक्ति-दोष

December 26, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- १- अपना स्वार्थ : स्व+अर्थ = स्वार्थ। ‘स्व’ का अर्थ है, ‘अपना’ और ‘स्व’ से पहले ‘अपना’ का प्रयोग हुआ है। ऐसे में, ‘अपना’ शब्द का दो बार प्रयोग ‘पुनरुक्ति-दोष’ के अन्तर्गत […]