नामचीन लोग की हक़ीक़त यहाँ है, पहचानिए!

August 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “नाम बड़े, पर दर्शन थोड़े” तब चरितार्थ होता है जब वस्तुस्थिति का प्रत्यक्षीकरण होता है। हम अपने ‘मुक्त मीडिया’ (सोसल/सोशल मीडिया) के माध्यम से उन लोग का भाषा, साहित्य, व्याकरण, […]

अज्ञेय के निबन्ध ‘संवत्सर’ पर दो टूक टिप्पणी

December 6, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीचे अज्ञेय के निबन्ध ‘संवत्सर’ का एक अंश दिया गया है, जिसमे वे ‘अतिरिक्त’ बुद्धिवाद बघारते हुए दिखते हैं। अज्ञेय अपने शब्दजाल मे पाठकवर्ग को ऐसे फँसाते हैं कि वह […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

April 13, 2022 0

आइए! सत्य-संधान करें। प्राय: सत्य स्वयं मे नितान्त कटु होता है। इसका आयाम बृहद् है— कहीं मृदु अनुभव होता है तो कहीं कठोर। यहीं पर सत्य की प्रियता-अप्रियता की यापित काल-खण्डों मे गहन अनुभूति होती […]

प्रख्यात भाषाविद् आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के ‘भाषाचिन्तन’ का एक व्यावहारिक आयाम

July 24, 2021 0

★ राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ (प्रधान सम्पादक अवध रहस्य राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र) : हमारे अध्यापकवृन्द, प्रतियोगी विद्यार्थियों, सामान्य विद्यार्थियों तथा हिन्दी सीखने के प्रति लालसा जीनेवाले हिन्दी-अनुरागिजन के लिए वर्षान्त तक २३-३६/८ के बड़े […]