नामचीन लोग की हक़ीक़त यहाँ है, पहचानिए!
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “नाम बड़े, पर दर्शन थोड़े” तब चरितार्थ होता है जब वस्तुस्थिति का प्रत्यक्षीकरण होता है। हम अपने ‘मुक्त मीडिया’ (सोसल/सोशल मीडिया) के माध्यम से उन लोग का भाषा, साहित्य, व्याकरण, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “नाम बड़े, पर दर्शन थोड़े” तब चरितार्थ होता है जब वस्तुस्थिति का प्रत्यक्षीकरण होता है। हम अपने ‘मुक्त मीडिया’ (सोसल/सोशल मीडिया) के माध्यम से उन लोग का भाषा, साहित्य, व्याकरण, […]
अमित शाह!‘राष्ट्रगीत’ की रचना बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने की थी। गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने ‘राष्ट्रगान’ की रचना की थी और वह भी केवल अपने देश के लिए, ‘दो देशों’ के लिए नहीं। उन्होंने बांगलाभाषा मे अपनी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीचे अज्ञेय के निबन्ध ‘संवत्सर’ का एक अंश दिया गया है, जिसमे वे ‘अतिरिक्त’ बुद्धिवाद बघारते हुए दिखते हैं। अज्ञेय अपने शब्दजाल मे पाठकवर्ग को ऐसे फँसाते हैं कि वह […]
‘शिक्षक-दिवस’ की पूर्व-सन्ध्या मे आयोजित ‘सर्जनपीठ’ की राष्ट्रीय परिसंवादमाला ‘सर्जनपीठ’ के तत्त्वावधान मे ‘शिक्षक-दिवस (तिथि)’ की पूर्व-सन्ध्या मे (‘सन्ध्या पर’ अशुद्ध है।) ‘शिखर से शून्य की ओर सारस्वत पथ’ परिसंवादमाला के अन्तर्गत ‘शिक्षा-प्रशिक्षा और परीक्षा […]
—-०दो टूक०—- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो भी व्यक्ति इस विषय का पक्षधर है कि उसके लिए ‘भाषा-शुचिता’ से अधिक ‘मात्र सम्प्रेषणीयता’ का महत्त्व है, वह मेरी मैत्री-सूची से स्वयं को ‘सदैव’ के लिए […]