संविधान है जेब मे, मनचाहा है खेल

January 26, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–‘तन्त्र’ बपौती बन गया, ‘गण’ घायल हर ओर।‘लोक’ इशारे नाचता, सेंध लगाते चोर।।दो–‘तन्त्र’ ग़ुलामी जी रहा, ‘गण’ फुटबॉल-समान।जाहिल अनपढ़ कर रहे, हम सबका अपमान।।तीन–लोक-लाज को त्याग कर, लोकरहित है ‘तन्त्र’।अन्धा-बहरा […]