एक प्रयोगधर्मी-दार्शनिक अभिव्यक्ति

November 19, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शरीर मुझसे दूर जा रहा है,वा शरीर से दूर जा रहा हूँ।अशरीरी रहकर जीवन की कल्पनासमृद्धि के अन्तिम छोर पर अडिग खड़ी है।चर्मचक्षु से परे अपरा-पराविद्याका स्मृति-वातायनमन-गाम्भीर्य का दोहन नहीं […]