आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के नाछपल भोजपुरी उपनियास से इ लीहल गइल बा; सुनीँ सभे–

May 1, 2025 0

“भले एक खाँची होखिहेँ स, बाकिर ठेकल एकहू ना होखी।”“तू त हुचहुचवा क बच्चा हऊ। तहरा क का बुझाई। रेसमिया, अजदिया, रमपतिया, फूलगेनिया, बुधनी, रमवतिया, कुसुमिया, चनदरवतिया आ अउरू ढेर गोड़ी बाड़िन स।”“हूँह! ढेर गोड़ी […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के नाछपल भोजपूरी उपनियास से इ लीहल गइल बा; सुनीँ सभे–

May 1, 2024 0

“ई हमरा से का पूछ तार; तहरा एतनो बुद्धी नइखे?”“ते हमरा से काहें खिसिमाइल रह ले?”“आ भे, तू त हमरा के बेकार कइ देह ल।”“हम तोरा के बेकार कइ दिहनी? उ कइसे रे।”“आ कि जबे […]

सहकल-बहकल-दहकल बबुनी

January 23, 2024 0

बाबू! इहे ह असलिका भोजपुरी– भोजपुरी-विशेषण आ क्रिया के बिस्तार से समझे के बा। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

झोंकरावन चाची के नावे तहार भतीजवा जरावन पाँड़े क एगो चीठी

October 27, 2023 0

भोजपुरिया लिक्खाड़ लोगवा! एही क कहल जाला भोजपुरी ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ए चचिया! तोरा क उठि-बइठि आ सूति-जागि के उठक-बइठक करत परनाम करत बानी। आछा त, तू खाँड़ी-चूकी ना हउ, सोगहगवे बाड़ू। आपना […]

भोजपुरी भाषा को संवैधानिक दर्जा हासिल करना है – कुमार अजय सिंह

July 9, 2021 0

राजेश पुरोहित डिब्रूगढ़ (असम):- हिंददेश परिवार संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने के लिए दृढसंकल्पित है। साहित्यि के माध्यम से इस पवित्र कार्य को किया जा रहा है। संसार के कई देशों में इसकी इकाइयों […]

अब रऊआँ सभे सुनीं; नीमन लागी नू, तबे रँऊवा सभे थपरी बजाइब

November 7, 2020 0

एगो भोजपुरी ह ० आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जे-जे रहे दोस्त, सभ दुसमन होइ गइले,हमारा रहतिया में, सभ काँटा बोइ गइले।खूबे हँसी आवेला, ‘बाबू’ के चल्हकिया पर;जे सुरुज के गोलवा, चनरमा समुझि गइले।डूबत खूब देख […]

जीय भोजपुरी-जीय आ फटहन के सीय!

October 21, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीमन भा बाउरखइका के गोड़़ लाग।बिजुरी के ठेकान ना;पानी के मारामारी।हगे के मैदान ना।सरकार अपना बंसरी में फँसइले बियासोचालय (शौचालय) के चारा देके गरई मछरिया।आ लड़पोछना के पतोहियाबँसवारी में जाइ […]

इहे ह भोजपुरी बाबू!

October 21, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ई मोछियामुड़ाइ लेहल!केकरा कहला पर?नीमन गँहकी बाड़।तनी कनखियाई के देखल सीखना तएक दिनमुड़ाइ जइब तुहूँ। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ अक्तूबर, २०२० ईसवी)

सपरी त देखब, ना त राम-राम

October 21, 2020 0

इहे काहाला असलिका भोजपुरी — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ओइजा से केइजा?हेइजा कि होइजा?जगहि-जगहि के फरकअघाइ गइल जिनिगियादऊरत, भागत, हाँफत, खेदात।ना मनल–एगो टिटिम्हाओढ़ लेहल;सपरी त देखबना त राम-राम। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; […]

भोजपूरी के पोंछिटा मत खींच…S..S..S

August 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भोजपूरी के हड़ाह लिक्खाड़), परियागराज भोजपूरी ‘चिनियाबादाम’ न हवे ए बाबू कि अँगुठवा दबाई के फोरि देहला आ मुँहवाँ में ढुकाइ लेहल। जेकरा फराकी ठोकला के बदिया……धोवे के सहूर ना […]

एगो भोजपुरी गजल

May 24, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जे-जे रहे दोस्त सब दुसमन होइ गइले, हमारा रहतिया में काँटा बोई गइले! बड़ा हँसी आवेला ‘बाबू’ के चल्हकिया पर, जे सुरूज के गोला के चनरमा समुझि गइले! डूबत उ खूब देखइहें […]

कटहर छील तार का

April 30, 2018 0

का हो निहारन पँड़ित! कटहर छील तार का ? अँगरेजवा भरतीयन के अइसन ‘मनसहका’ बनइलन स कि जेकरा पोंछिटो खोंसे के लूर ना आवे, उहो अब गिटिर-पिटिर ठेल ता। आव ए बकोटन चाचा! हेइजा बईठि […]

एक भोजपुरी शोक-गीत

February 20, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इसके पहले कि आप इस शोक-प्रधान भोजपुरी गीत को पढ़ें , समझें तथा अनुभव करें, आपकी सुविधा के लिए इसकी पृष्ठभूमि का एक शब्द-चित्र प्रस्तुत है :——– एक पिता का शव धरती […]

गर्लफ्रेंडन में नथइले तहार बबुआ

February 16, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- रात-दिन उधियइले तहार बबुआ, करेजवा जरवइले तहार बबुआ। ना बुझाला सुझाला ऊ बौका के अब अन्दाजा गरई पकड़े तहार बबुआ। खेत-खरिहान बेचले जेवरवो के ऊ, धूरि आँखी में झोंकले तहार बबुआ। गाँव-नगरी […]

मन सहकल बनि गइली तहार बबुनी

February 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सब केहू से अझुरइली तहार बबुनी, घर-अँगना भहरइली तहार बबुनी। मांग पोछाते उ नवका संंघतिया धइली, मुँह करिखा लगइली तहार बबुनी। अइसन कइली पढ़इया सहरिया में ऊ, बावन भतरी कहइली तहार बबुनी। […]

अँखिया के कजरा हेराइ गइल सजनी

February 3, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अँखिया के कजरा हेराइ गइल सजनी, हथेलिया के मेहँदी रिसाइ गइल सजनी। बहरिया-बहरिया हर ओरिया उजार बा, घरवा के दियवा बुझाइ गइल सजनी। जोहत रहि गइनी अन्हेरिया में अंजोरिया, एही तरी अँखिया […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के प्रकाशनाधीन भोजपुरी उपन्यास ‘तिरछोल चाची’ का एक अंश

January 10, 2018 0

“का हो हमार चकचोन्हर चाची! काहाँ उधियाइल बाड़ू। अपना गरदनिया में भागवा गमछा लटकइले आ खइनी फटकत तूँ एतना सुनर-साघर लउकलू कि बुझाए लागेला कि तहरा के भगवान जी बाड़ा सरसन्त से ठोकि-ठाकि के ए […]