आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के नाछपल भोजपुरी उपनियास से इ लीहल गइल बा; सुनीँ सभे–
“भले एक खाँची होखिहेँ स, बाकिर ठेकल एकहू ना होखी।”“तू त हुचहुचवा क बच्चा हऊ। तहरा क का बुझाई। रेसमिया, अजदिया, रमपतिया, फूलगेनिया, बुधनी, रमवतिया, कुसुमिया, चनदरवतिया आ अउरू ढेर गोड़ी बाड़िन स।”“हूँह! ढेर गोड़ी […]