अथश्री रगड़ू-झगड़ू-संवाद शुरू― एक

February 19, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रगड़ू― चाचा!झगड़ू― हाँ भतीजे रगड़ू।रगड़ू― चाचा! नौकरी तो मिलौ नाय। जब नौकरी नै मिलौ तव छोकरी कैसौ मिलौ।झगड़ू― एमा तोर मतलब का आय?रगड़ू― चाचा! अबै हम छत्तीस के होये जाय […]

व्यंग्यात्मक ग़ज़ल :- पति की अभिलाषा

September 8, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’  सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें । सोच रखा है छुट्टी का दिन […]

आज की टिप्पणी:- वाह रे, टुकड़ख़ोर बुद्धिजीवी-वर्ग!

December 29, 2017 0

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा है, जो ‘अवसरवादी’ चरित्र जी रहा है। उसकी ओर समय-समय पर टुकड़े फेंक कर, व्यवस्था-तन्त्र उसे अपने पक्ष में ‘भौं-भौं’ करने के लिए मीडिया के माध्यम से […]

वर्णभेद

November 6, 2017 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद वर्ण भेद का रोना रोने वालों, नित निज दृग नीर दिखने वालों। भूल गए उन पिछले दिन को, निज सम का हक़ खाने वालों । माना कुछ दिन थे दुर्दिन के, क्या […]