पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

May 12, 2020 0

प्रश्न एक- महाभारत में कुल कितने श्लोक हैं?(क) ८८ हज़ार (ख) १ लाख (ग) १ लाख १० हज़ार (घ) इनमें से कोई नहीं। प्रश्न दो- महाभारत को किसने लिखा था?(क) ब्रह्मा ने (ख) विष्णु ने […]

नेता जी मुरदाबाद!

May 9, 2020 0

— पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–नेता जी के बग़ल में, सुघर सलोनी सोय।पुण्य कमाते हर घड़ी, पाप कहाँ से होय।।दो–‘नेता’ धाकड़ शब्द है, जपो-जपो हर रोज़।पाप करो हर दिन सदा, करो अनोखा खोज।।तीन–है रूप-रुपया-रुतबा, नेता की पहचान।आग […]

‘सर्जनपीठ’ का ऑन-लाइन सारस्वत समारोह सम्पन्न

May 9, 2020 0

● आचार्य जी के कथनों-विचारों के पीछे ‘व्यक्तित्व’ की गरिमा थी। प्राचीनता की उपेक्षा न करते हुए भी नवीनता को समादृत करने में सिद्धहस्त आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने हिन्दीपद्य और गद्य की भाषा […]

‘पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक भाषिक पाठशाला’

March 22, 2020 0

यह ‘समय’ (छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश) के समाचार-चैनल का चित्र है। इस चैनल के चित्र को ध्यानपूर्वक देखें। सबसे नीचे के समाचार-शीर्षक को पढ़ें :— ० सभी मृतक लकड़ी से लदे ट्रैक्टर में सवार थे। इस सामाचारिक वाक्य […]

भारत में ‘लोकतन्त्र’ के लिए वातावरण नहीं

March 19, 2020 0

*मुक्त मीडिया का ‘आज’ का सम्पादकीय* पृथ्वीनाथ पाण्डेय- वर्तमान केन्द्र-सरकार का संचालन करनेवाले देश की जनता के सामने छ: वर्षों के भीतर जितने भी प्रकार के कार्य करने के लिए वचनबद्ध हुए थे, उनमें से […]

शोधकर्म की गुणवत्ता पर लगता ग्रहण

March 17, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- खेद है, शोध कर रहे और करा रहे ‘शोध’ की अर्थ-अवधारणा से परिचित ही नहीं हैं। चार-छ: पृष्ठों में शोधपत्र का लेखन कर लिया जाता है और दस सन्दर्भ सामग्री के नाम […]

शेष-अवशेष

March 13, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : मैंने सूरज का जवाल१ भी देखा है, तूने कर लिया ख़ुद के साये पे भरोसा? दो : मेरे लाख कहने पे भी नहीं मानते हैं लोग, यों खुलकर मत मिलो बुरा […]

आवर्त्तन और दरार

March 13, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : जब भी चाहा, उठाकर फेंक दिया, दोस्ती का नाम देते शर्म आयी नहीं। दो : तुम भी आ जाओ, मेरे साये में, दीवार होने की सज़ा मालूम है। तीन : बहके-बहके […]

एक अभिव्यक्ति

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बेशक, चाहो पर बताओ नहीं, बेशक, पाओ पर सताओ नहीं। मुद्दत बाद ज़िन्दगी सयानी हुई, उसे सब्ज़बाग़ दिखाओ नहीं। मस्त-मौला है और फक्कड़ भी, भूले-बिसरे भी आज़्माओ नहीं। हक़ीक़त की ज़मीं ही बेहतर […]

अभिव्यक्ति के दंश

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : ऐ हुस्न की मलिक:! आँखें यों मला न करो, वही तस्वीर है, जो छोड़कर तुम आयी थी। दो : अब लौटकर न आयेंगी फिर से बहारें, मेरे आँसू में अब डूबते […]

चन्द अश्आर

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : बेतरतीब बनती जा रहीं रिश्ते की ज़ंजीरें, किसी बच्चे की चाहत-मानिन्द उलझी हुईं। दो : आँखों ने आँखों से गुफ़्तुगू क्या कर ली महफ़िल में, फ़क़त बात इतनी थी मगर अफ़साना […]

‘यश बैंक’ की बेईमान व्यवस्था से त्रस्त जनता

March 12, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय ‘यश बैंक’ की असलीयत जानें और विषय-केन्द्रित ही प्रतिक्रिया करें। इन सभी समूह और इनके अतिरिक्त जो नाम यहाँ दिख नहीं रहे हैं, उनके विरुद्ध भी कठोर दण्डात्मक काररवाई […]

पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कुछ शे’र

March 11, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : जब भी चाहा, उठाकर फेंक दिया, ऐसी दोस्ती से तेरी दुश्मनी ही भली। दो : तुम भी आ जाओ, मेरे साये में, मुझे दीवार होने की सज़ा मालूम है। तीन : […]

एक अभिव्यक्ति

March 11, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक– तिल का ताड़ दिखने लगे हक़ीक़त में, सोचना, दिमाग़ का ज़ंग अभी बाक़ी है। दो– कुछ अलग हटकर सोचा करो साहिब! यहाँ जितने हैं ‘रेडीमाल’ बेचा करते हैं। तीन– तिनके-तिनके जोड़कर आशियाँ […]

वर्तमान सरकार का राष्ट्रघाती चेहरा!

March 6, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय पृथ्वीनाथ पाण्डेय- वर्तमान सरकार पूरी तरह से ‘राष्ट्रविरोधी’ है; क्योंकि उसने यह अधिकार अपने हाथों में ले लिया है– हम तय करेंगे, कौन राष्ट्रभक्त है और कौन राष्ट्रद्रोही। यह […]

भारत राष्ट्र को बाँटो मत, हमें एकजुट रहने दो!

March 5, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय —पृथ्वीनाथ पाण्डेय– देश के समस्त राजनीतिक दलों के आकाओ! प्रधान नेताओ, चौकीदारो, सांसदो, विधायको, छुटभय्यो, रंगदारो तथा अन्ध समर्थको! देश को धर्मान्ध मत बनाओ; देश को जाति, क्षेत्र, वर्गादिक […]

“डंके की चोट पर” सार्वजनिक घोषणा

March 4, 2020 0

मैं अपने मूल नाम पृथ्वीनाथ पाण्डेय से पूर्व लगे ‘डॉ०’ शब्द का प्रयोग नहीं करने की घोषणा करता हूँ; क्योंकि जिस तरह से ‘नेता’ शब्द जाहिलों के साथ जुड़ता आ रहा है वैसे ही ‘डॉ०’ […]

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की एक और नौटंकी शुरू

March 3, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– नरेन्द्र मोदी ने कल (२ मार्च) रात्रि में ट्वीट किया था– मैं ‘सोसल मीडिया’ प्लेटफॉर्म छोड़ रहा हूँ, फिर आज दोपहर में लगभग १६ घण्टे-बाद ट्वीट किया है– एक दिन के लिए ‘सोसल […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक पाठशाला

February 25, 2020 0

यह है, ‘न्यूज़ 24’ समाचार-चैनल। नीचे ‘न्यूज़ 24’ समाचार-चैनल-द्वारा २४ फ़रवरी, २०२० ई० को प्रसारित किये गये दो समाचार दिखाये गये हैं। आप अब नीचे प्रदर्शित किये गये दोनों चित्रों के भाषिक सत्य को समझें […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हिमाचलप्रदेश के राष्ट्रीय अधिवेशन में निमन्त्रित

February 23, 2020 0

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की ओर से आयोजित सोलन, हिमाचलप्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में विशिष्ट वक्ता के रूप में निमन्त्रित किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि सम्मेलन का यह त्रिदिवसीय […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए ‘आरम्भ-प्रारम्भ-समारम्भ-परिरम्भ’

February 23, 2020 0

● शब्द-परिशीलन किसी भी कार्य की प्रथम अवस्था का अनुष्ठान अथवा सम्पादन ‘आरम्भ’ है। दूसरे शब्दों में— कोई भी कार्य जब पहली बार किया जाता है तब उसे ‘आरम्भ’ कहा जाता है। अब ‘आरम्भ’ शब्द-संरचना […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

February 21, 2020 0

भाषा व्यक्तित्व को निखारती है और उसमें एक सुखद आकर्षण भी उत्पन्न करती है। आइए! अपने व्यक्तित्व को सँवारें। सौन्दर्य और सौन्दर्य-बोध की अवधारणा :— कोई भी कविता ‘सुन्दर’ अथवा ‘nice’, ‘beautiful’, ‘great’ नहीं होती […]

एक भोजपुरी शोक-गीत

February 19, 2020 0

—– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इसके पहले कि आप इस शोक-प्रधान भोजपुरी गीत को पढ़ें , समझें तथा अनुभव करें, आपकी सुविधा के लिए इसकी पृष्ठभूमि का एक शब्द-चित्र प्रस्तुत है :——– तहरा जिनिगिया के भोर […]

मुट्ठीभर आकाश

February 19, 2020 0

— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक– मुखड़ा मौलिक दिख रहा, दिखता करुणा-रूप। शोकाकुल परिवेश है, बनती मृत्यु अनूप।। दो– मौन निमन्त्रण मौन है, सूनी माँग न देख। सधवा विधवा बन गयी, कैसा विधि का लेख।। तीन […]

जामिया मिल्लिया के ‘वीडियो’ का सच

February 18, 2020 0

— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जामिया मिल्लिया में गत माह घटी घटना के ऐसे कई वीडियो सार्वजनिक हो रहे हैं, जिनमें चेहरा ढक कर दिल्ली-पुलिसकर्मियों-द्वारा की जा रही अतिवादिता और निर्दयता सुस्पष्ट दिख रही हैं। पहले […]

खुदा मुझे इलाहाबादी खुराफ़ातियों से बचाये : मिर्ज़ा ग़ालिब (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ● आज (१५ फ़रवरी) मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि है । जाने क्यों, असद उल्लाह बेग़ ख़ाँ ‘मिर्ज़ा ‘ग़ालिब’ जैसे ज़हीनी अदीब और बेमिसाल शाइर के साथ ऐेसा कौन-सा वाक़िआ हुआ कि […]

देश के राजनेतागण! धर्म की ‘अफ़ीम’ मत बाँटिए।

February 14, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– देश की जनता को ‘हिन्दू-हिन्दुत्व’ और ‘मुसलमान-मुसलमानत्व’ का खेल मत दिखाइए; पहले स्वयं एक ‘मनुष्य’ बनिए, फिर अपने-अपने तरीक़े से भारत राष्ट्र को सुधारने का दावा कीजिए। यदि राष्ट्रहित में कुछ करने […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला ◆ विषय : वर्णमाला

February 12, 2020 0

★ हिन्दी-वर्णमाला की कुल संख्या ★ वर्णमाला के अन्तर्गत वर्णों की कुल संख्या ‘हिन्दी-वर्णमाला’ में वर्णों की कुल कितनी संख्या है? इस प्रश्न का विस्तृत और विशद उत्तर लिखते हुए, विद्यार्थियों, यहाँ तक कि अधिकतर […]

विकास-योजनाएँ नहीं, ‘विनाश-योजनाएँ’ कहो।

February 9, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- केन्द्र और राज्य की सरकारों ने जो भी विकास-योजनाएँ बनायी हैं, उनमें निहित जातीयता, साम्प्रदायिकता, धर्मान्धता तथा भाग्यवादिता पर आधारित सामाजिक रूढ़ियों और परम्पराओं ने बाधा पहुँचायी है। प्रदत्त, अर्जित पद तथा […]

जागो! वरना यह सरकार भूखों मार डालेगी

January 14, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- आज सम्पूर्ण देश में ‘महँगाई’ बुरी तरह से अपने पैर फैला चुकी है; अफ़सोस! इस विषय पर देश की सरकार ‘दिव्यांग’ सिद्ध हो चुकी है। वह किंकर्त्तव्यविमूढ़ बन चुकी है, इसीलिए वह […]

देश की सरकार का ‘असली चेहरा’ पढ़िए!

January 14, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सम्मानित देशवासीगण! आज भारत राष्ट्र की अखण्डता, एकता तथा सम्प्रभुता संकट में है। अपने देश का लोकतन्त्रीय ढाँचा ध्वस्त होने की स्थिति में है। इसके लिए देश का सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष उत्तरदायी […]

अनन्यतम तीर्थराज प्रयाग की जय हो!

January 14, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘प्रयाग’ शब्द की निष्पत्ति ‘यज्’ धातु से होती है; ‘प्र’ उपसर्ग प्रकृष्ट, श्रेष्ठ, उत्कृष्ट का बोधक है, जबकि ‘याग’ शब्द ‘यज्ञवाची’ है। अनुपम तीर्थस्थान प्रयाग के पक्ष में हमारे सनातन पौराणिक ग्रन्थ […]

नूतन वर्ष के अवसर पर प्रकाशन-यात्रा का प्रारम्भ

January 12, 2020 0

अभिनव वर्ष (२०२०) के समारम्भ होते ही प्राथमिक शालाओं (यू०पी० बोर्ड और सी०बी०एस०ई०) में अध्ययन-अध्यापन करनेवाले कक्षा एक से पाँच तक के शिक्षार्थी-शिक्षकवृन्द के लिए ‘हिन्दी-व्याकरण और संरचना’ नामक कृति अब देश की शैक्षणिक संस्थाओं […]

सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश में आयोजित ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ की ‘हिन्दी-भाषा’ के प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में अशुद्धियाँ

January 12, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक)– ★ दोषियों को कठघरे में लाया जाये । ८ जनवरी, २०२० ई० को सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश में ‘परीक्षा नियामक प्राधिकारी’, प्रयागराज की ओर से प्राथमिक स्तर की जो ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ का […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

January 11, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे पास एक विद्यार्थी ने ऊपर अंकित प्रश्न भेजा है; क्योंकि वह प्रश्न के विकल्प को समझ नहीं पा रहा है। उसने यह नहीं बताया है कि उक्त प्रश्न किस परीक्षा के […]

आइए! आत्म-परीक्षण करें

December 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष का वर्तमान ‘अतीत’ होनेवाला है। सहजतापूर्वक समय-चक्र गतिमान है। हम सब का बहुत कुछ कभी न खुलनेवाली एक गठरी में बाँध कर रख दी गयी है, जिसे हम याद ही कर […]

अतीत-अतीत होते मेरे सहयात्री!

December 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों पर तीन सौ पैंसठ दिनों के भार पल-पल लाद कर मुखमण्डल पर निष्कामता का भाव लिये अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते अतीतोन्मुख हो रहे मेरे सहयात्री! तुम क्लान्त हो चुके हो; […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

December 14, 2019 0

यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक पाठशाला’

December 11, 2019 0

◆ नीचे दिये गये ‘चित्र’ को गम्भीरतापूर्वक देखें। ■ न हिन्दी और न ही अँगरेजी का बोध! ‘बस-विभाग’ की मूढ़ता अथवा ‘वाराणसी विकास प्राधिकरण’ का प्रमाद कहा जाये– न हिन्दी का संज्ञान और न ही […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : भाषा-संस्कार विकसित करें

December 8, 2019 0

प्रतिभाशाली विद्यार्थी वही होता है, जो शब्दानुशासन को सम्यक् रूपेण धारण करता हो। जिसके पास विद्या होती है, वही विद्यार्थी कहलाने का अधिकारी होता है; क्योंकि विद्यार्थी का मूल आभूषण ‘विनयशीलता’ है और विद्या ही […]

हिन्दीभाषा का ‘स्वतन्त्र’ व्याकरणलेखन अपरिहार्य

November 27, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- हमारे हिन्दीशब्दकोशकारगण ने हिन्दीशब्दकोश के नाम पर ‘कबाड़ख़ाना’ बनाया है। इसका मुख्य कारण है कि उन्होंने उद्देश्यपरक कोश तैयार नहीं किये हैं। उद्देश्यपरक का प्रश्न इसलिए कि कौन-सा शब्द देशज/देसज है; तद्भव […]

जागरूकता अभियान ‘अपनी भाषा सुधारिए’ सफलता की ओर

November 6, 2019 0

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से प्रयागराज से ५ नवम्बर से आरम्भ अभिनव और अभूतपूर्व अभियान ‘अपनी भाषा सुधारिए’ दैनिक जागरण’ समाचारपत्र-कार्यालय से आरम्भ होकर दूरदर्शन-केन्द्र, प्रयागराज में विराम लिया है, जो कि […]

घोर ‘अतिवाद’ का परिचय देती भारत-सरकार!

October 29, 2019 0

◆ किसकी पहल पर जम्मू-कश्मीर में ‘विदेशी’ सांसद बुलाये गये? डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारत की सरकार इन दिनों जिस तरीक़े से अपने चरित्र-चाल-चेहरा को अन्तरराष्ट्रीय मंचों से ख़ूबसूरत दिखाने की कोशिश कर रही है, वे […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से ‘अपनी भाषा सुधारिए!’ अभियान नवम्बर-माह के प्रथम सप्ताह से होगा शुरू

October 24, 2019 0

● ‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से ‘अपनी भाषा सुधारिए!’ अभियान प्रयागराज में नवम्बर-माह के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ होगा। ★ अभियान का प्रथम चरण :– (समय : दस मिनट) हिन्दीभाषानुरागीजन प्रयागराज के […]

‘उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग’ की सामान्य हिन्दी की मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों में अशुद्धियाँ-ही-अशुद्धियाँ!..?

October 22, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक), प्रयागराज- 18 अक्तूबर को उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग की ओर से आयोजित सामान्य हिन्दी की मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘अधिकतम अंक’ दिया गया है, जबकि ‘पूर्णांक’ होना चाहिए, तभी ‘पूर्णांक-प्राप्तांक’ की […]

०समय-सापेक्ष चिन्तन० तब ‘रावण’ का भी ‘विकल्प’ पूछा जाता था

September 30, 2019 0

रावण का अर्थ है, ‘जो सम्पूर्ण लोक को रुला दे’, जो आज भी प्रासंगिक है। आज का रावण सम्पूर्ण भारतवासियों को रुला रहा है और हमारी आहें उसकी ‘अहम्मन्यता के घड़े’ में भरती जा रही […]

“हिन्दीभाषियों में निस्स्वार्थ सेवाभाव प्रबल हो” : डॉ० पृथ्वीनाथ

September 26, 2019 0

● जंघई, जौनपुर के ‘नागरिक पी० जी० कॉलेज’ में कर्मशाला सम्पन्न “हिन्दी की उन्नति के लिए यह आवश्यक है कि हिन्दीभाषियों, विशेषत: उन लोग में, जो दायित्वपूर्ण पदों पर प्रतिष्ठित हैं, निस्स्वार्थ सेवा का भाव […]

जयपुर में हिन्दीमय होता ‘एन०आइ०टी०, उत्तराखण्ड

September 18, 2019 0

अधिकतर लोग का मानना है कि चिकित्सा,अभियान्त्रिकी, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, रक्षा-प्रतिरक्षा-आरक्षा, कृषि, वानिकी आदिक विषयों के विद्यार्थी और अध्यापक ‘हिन्दी-भाषा’ को ग्रहण करने, सीखने, संशोधित-परिष्कार करने के प्रति सजग और जागरूक नहीं रहते। उन लोग की मान्यता […]

अतीत के झरोखे से : छायावाद के चतुर्थ स्तम्भ महादेवी जी के साथ पृथ्वीनाथ पाण्डेय-द्वारा की गयी एक भेंटवार्त्ता

September 11, 2019 0

● महीयसी महादेवी वर्मा की मृत्युतिथि (११ सितम्बर) पर विशेष मैंने महादेवी जी के साथ अस्सी के दशक में एक मुक्त भेंटवार्त्ता की थी; तब मैं विद्यार्थी और पत्रकार की भूमिका में भी होता था। […]

विचारणीय-शोचनीय : मोदी है तो मुमकिन है?..!

September 4, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– केन्द्र-राज्य की सरकारों ने देश की जनता की गाढ़ी कमाई को बेहयाई के बेसन में लपेटकर पकौड़ीनुमा निर्दय अर्थव्यवस्था की कूटनीतिभरी बर्बरता की दहकती कड़ाही में तलकर चट करने की नीतियाँ बनाती […]

हिन्दी हैं हम

September 2, 2019 0

भाषाकार फादर कामिल बुल्के की आज (1 सितम्बर) जन्मतिथि है। डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ‘कामिल’ का अर्थ है, एक प्रकार का पुष्प’। जायसी ने ‘पद्मावत’ में क्या ख़ूब कहा है, “फूल मरै पर न मरै […]

अब तक के सबसे घातक-भीषण आर्थिक संकट और सन्त्रास के दौर से गुज़रता देश

August 29, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय – इस समय देश में शासन करनेवाले भले अपनी पीठ थपथपा लें फिर भी वर्तमान और भविष्य अतीव भयावह दिख रहा है। नोटबन्दी और जी०एस०टी० के दुष्प्रभाव का ही परिणाम है कि […]

डॉ॰ पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी की पाठशाला में जानिए कुछ ऐसे शुद्ध शब्द जिन्हें हम बहुधा अशुद्ध लिखते हैं

August 25, 2019 0

१. कार्यकर्त्री २. काबिलीयत ३. शख़्सीयत ४. आप्रवासी ५. दीप प्रज्वलित ६. एलान ७. रंग-विरंगे ८. नन्हे-मुन्ने ९. प्रविधान १०. आरोपित ११. जन्मतिथि १२. सौहार्द १३. मिष्टान्न भण्डार १४. एतिराज १५. बिलकुल १६. करगिल १७. […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रयागराज की महापौर अभिलाषा नन्दी की कार्यशैली पर प्रश्न उठाया

August 21, 2019 0

वरिष्ठ नागरिक भाषाविद् और समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रयागराज नगर की प्रथम नागरिक कहलानेवाली महापौर अभिलाषा नन्दी के कार्य करने और जन-समस्या सुनने के तौर-तरीक़े पर आपत्ति जतायी है। डॉ० पाण्डेय ने बताया कि […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

August 20, 2019 0

नीचे दी गयी संस्थान टीन-पट्टिका को ध्यानपूर्वक देखिए। वह संस्थान ‘भरद्वाज-आश्रम’, प्रयागराज के सामनेवाले मार्ग पर स्थित है। टीन की यह पट्टिका वर्षों से संस्थान के प्रवेशद्वार के ऊपर लगी हुई है। इस संस्थान में […]

प्रकाशन-जगत् का शुक्ल और कृष्णपक्ष

August 17, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– पुस्तकें जीवन-मरण का आख्यान करती हैं। पुस्तकें कृष्ण और शुक्ल-पक्षों का अनावरण करती हैं। पुस्तकें मर्मान्तक पीड़ा देती हैं। पुस्तकें मन-प्राणों पर इन्द्रधनुषी रंगों का अनुलेपन करती हैं। पुस्तकें राग-अनुराग और द्वेष-विद्वेष […]

मेरी सरकार रहे, चली जाये, मगर अभद्रता की अनुमति नहीं ही दूँगा : अटलबिहारी वाजपेयी

August 16, 2019 0

● आज (१६ अगस्त) अटल जी की मृत्युतिथि है। ◆ “मेरी सरकार रहे, चाहे चली जाये, मगर अभद्रता की अनुमति नहीं ही दूँगा”— अटल (अटलबिहारी वाजपेयी के साथ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की मुक्त भेंटवार्त्ता)– पं० […]

आप ‘मार्गदर्शन’ को ग्रहण कर अपना भविष्य समुन्नत करें

August 12, 2019 0

प्रियवर विद्यार्थीवृन्द! ‘दैनिक जागरण’ में ‘नई राहें’ पृष्ठ पर सोमवार को मुद्रित पाक्षिक स्तम्भ ‘मार्गदर्शन’ के अन्तर्गत आपकी शैक्षिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक समस्याओं का निराकरण और शंकाओं का सहज व्यावहारिक समाधान प्रेरक शब्दों में किया […]

आप समस्त सुशिक्षित-प्रशिक्षित ‘अनियोजित’ (बेरोज़गार) विद्यार्थियों के लिए एक गुरु (डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय) का सन्देश’

July 29, 2019 0

सामूहिक आर्थिक साम्राज्य की स्थापना करें। आप अनियोजित (बेरोज़गार) विद्यार्थियों की संख्या लाखों में है और आप में अभियोग्यता की कोई कमी नहीं है। आप सभी मिलकर एक ‘प्रतियोगी प्रकाशन’ आरम्भ करके अरबों-खरबों रुपये सम्मान […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए वाक्य-विन्यास

July 16, 2019 0

आज ‘गुरु पूर्णिमा’ है। ★ आषाढ़-मास की ‘पूर्णिमा’ को ‘गुरु पूर्णिमा’ की संज्ञा दी गयी है। इस सारस्वत पर्व पर ‘गुरुस्मरण’ का विधान है। ● डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला हिन्दी-व्याकरण का नियम वाक्य-विन्यास :- […]

‘भाषा की पाठशाला’ के अन्तर्गत डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय से पूछें शब्दार्थ

June 18, 2019 0

‘दैनिक जागरण’ की ‘शनिवासरीय’ प्रस्तुति ‘भाषा की पाठशाला’ में हम ‘दो शब्दों’ पर सम्यक् रूपेण विचार करते हैं और अन्त में उन शब्दों के प्रति अपनी पाठक-पाठिकाओं को जागरूक करते हैं, जो अनभिज्ञता के कारण […]

शब्द-चिन्तन

June 4, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- शब्द परा है तो अपरा भी; शब्द ज्योति है तो तिमिर भी; शब्द स्थूल है तो सूक्ष्म भी; शब्द नूतन है तो पुरातन भी; शब्द रुदन है तो हास भी; शब्द सौम्य […]

जो भी भाषा-शुचिता का पक्षधर नहीं, ‘अपना मार्ग’ अलग कर ले

May 27, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जो भी व्यक्ति इस विषय का पक्षधर है कि उसके लिए ‘भाषा-शुचिता’ से अधिक ‘मात्र सम्प्रेषणीयता’ का महत्त्व है, ऐसे लोग मेरी मैत्री-सूची से स्वयं को ‘सदैव’ के लिए पृथक् कर लें; […]

बुद्धिजीवीवर्ग-द्वारा श्रमजीवियों का आत्मिक सम्मान

January 2, 2019 0

कुलपति ने मज़दूरों को भोजन कराकर अपना जन्मतिथि-समारोह मनाया । भाषाविद् के कोश का लोकार्पण श्रमिकों की उपस्थिति में हुआ । नूतन वर्ष के अवसर पर मेलाक्षेत्र के समीप नवनिर्माणाधीन भवन में शिक्षा और साहित्यजगत् […]

शिवगंगा विद्यामन्दिर के वार्षिकोत्सव में डाॅ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास में घर की होती है विशेष भूमिका

December 31, 2018 0

गत दिवस (२९ दिसम्बर, २०१८ ई०) ‘शिवगंगा विद्यामन्दिर’, शान्तिपुरम्, इलाहाबाद का वार्षिकोत्सव सम्पन्न हुआ था, जिसमें ‘हरिश्चन्द्र अनुसंधान-संस्थान’ के उपनिदेशक प्रो० एस० डी० त्रिपाठी मुख्य अतिथि थे और भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विशिष्ट अतिथि। आरम्भ […]

‘पृथ्वीनाथ पाण्डेय’ किसी राजनीतिक दल अथवा व्यक्तिविशेष का ‘क्रीतदास’ नहीं, बल्कि एक उन्मुक्त वैचारिक ‘प्रभंजन’ है

December 22, 2018 0

मेरी यह टिप्पणी उन सभी के लिए है, जो मुझे किसी भी राजनीतिक दल के प्रवक्ता के रूप में अपने विकृति दृष्टिपथ पर लाकर वर्षों से देखते और प्रतिक्रिया करते आ रहे हैं :–मैं उन […]

‘उत्तरप्रदेश उच्चतर शिक्षा आयोग’, इलाहाबाद की अकर्मण्यता सामने आयी : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

December 20, 2018 0

‘असिस्टेण्ट प्रोफेसर-परीक्षा’ के लिए प्रश्नपत्र बनानेवाले ‘लिए’, ‘मस्तिष्क’, ‘प्रस्तुतीकरण’, ‘प्रवृत्ति’, ‘वैयक्तिक’ आदिक शब्द नहीं लिख सके?.. ! भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रश्नपत्र बनानेवालों की योग्यता पर प्रश्न उठाया है । डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

December 14, 2018 0

यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त […]

बाल-दिवस के अवसर पर बालसाहित्य-विशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का एकल व्याख्यान

November 15, 2018 0

“बाल्यकाल मानव-जीवन की आरम्भिक अवस्था है, जिसमें मनुष्य की समस्त शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का आविर्भाव , प्रस्फुटन तथा विकास निहित है। यह एक विधायन विज्ञान भी है। इस दृष्टि से बालसाहित्य का प्रासंगिक और […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में अभारतीय (विदेशज) समध्वनिमूलक शब्द

October 13, 2018 0

यहाँ उन शब्दों के शुद्ध वर्तनी और शब्दार्थ दिये गये हैं, जिनका हमारा प्रबुद्ध-वर्ग अपने वाचन और लेखन में प्रयोग करता है। ऐसे शब्दों को हिन्दी ने आत्मसात कर लिया है। आप उन शब्दों पर […]

“पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं”– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

October 12, 2018 0

“पर्यावरण के विषय में राष्ट्रीय सीमाएँ इतनी झीनी हो चुकी हैं कि स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के मध्य का अंतर अब समाप्त हो चुका है। पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं। आजकल विकास […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

October 11, 2018 0

★ निम्नांकित शब्दों में से कोई एक शब्द ही शुद्ध है। आप शब्दों को व्याकरण की कसौटी पर कसते हुए, शुद्ध शब्द बताइए :– १- (क) अन्तेवासी (ख) अन्तःवासी (ग) अन्तवासी (घ) अन्ते:वासी २- (क) […]

तथाकथित नारी-विमर्श का ‘सच’

June 12, 2018 0

नारी को जहाँ तक सम्भव है, सब तरह से बाँध कर रखना; पुरुष का एकान्त अनुगत कर देना, यह समाज-व्यवस्था के लिए कार्यकर होने पर भी समाज-जाति की प्रगति के लिए एक अन्तरार्थ है; क्योंकि […]

हिन्दी-पत्रकारिता का भविष्य समुज्ज्वल है : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

May 31, 2018 0

“मैं नहीं स्वीकार करता कि पत्रकारिता के क्षेत्र में विकार-ही-विकार है, वहाँ परिष्कार भी है। अब पत्रकारिता को नये रूप-रंग में ढालकर लोकोपयोगी बनाना होगा, ताकि जनगणमन अपने पूर्वग्रह से ऊपर उठकर पत्रकारिता की पहचान […]

एगो भोजपुरी गजल

May 24, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जे-जे रहे दोस्त सब दुसमन होइ गइले, हमारा रहतिया में काँटा बोई गइले! बड़ा हँसी आवेला ‘बाबू’ के चल्हकिया पर, जे सुरूज के गोला के चनरमा समुझि गइले! डूबत उ खूब देखइहें […]

एक अन्तर्द्वन्द्व ०—- ‘मन और काम’ की सत्ता और महत्ता 0

May 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मन चंचल है और चपल भी; बाँधने के लिए आगे बढ़ता हूँ तो अँगुलियाँ छिटक जाती हैं और मनभाव को एकाग्र करने की प्रक्रिया से सम्बद्ध होता हूँ तो उपालम्भ के स्वर […]

‘कर’ ‘नाटक’…….पर्दा उठा; नाटक शुरू

May 10, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘कर’ ‘नाटक’ अपने-अपने उस्ताद के साथ जम्हूरे पहुँच गये हैं; ,वहीं हमने भी अपने उस्ताद और जम्हूरे भेज दिये हैं। “तो बोल जमूरे!” “हाँ ओस्ताद!” “जमूरे! ‘कर’ ‘नाटक’ का चुनावी बुखार क्या […]

आरक्षण की अब ‘समीक्षा’ करनी होगी : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

April 3, 2018 0

२ अप्रैल, २०१८ ई० को इलाहाबाद-स्थित ‘चन्द्रशेखर आज़ाद प्रतिमा-स्थल’ से ‘आरक्षणसमीक्षा मोर्चा’ की ओर से आरक्षणसमीक्षा-अभियान का आरम्भ भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता में किया गया था, जिसका नेतृत्व मोर्चा के संयोजक वीरेन्द्र सिंह […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ से —-०समीक्ष्य विचार-बिन्दु०—- ‘आलोचना’ क्या है?

April 1, 2018 0

आज साहित्य में आलोचना के नाम पर जो कृत्य किये किये जा रहे हैं, वे नितान्त निन्दनीय हैं, कारण कि जो स्वयम्भू आलोचक हैं, वे तटस्थ लोचनधर्मी हैं ही नहीं। ऐसा इसलिए कि तथाकथित साहित्यकार, […]

लल्लन टाप कवि-सम्मेलन में कवियों का समागम

March 19, 2018 0

“दुनिया याद करे कल तुझको, कुछ तो ऐसा करता चल” रामलीला प्रांगण, तुलाराम बाग़, इलाहाबाद में डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता में नवसंवत्सर के अवसर पर १८ मार्च, २०१८ ई० को लल्लन टाप कवि-सम्मेलन का […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला – विचार, चिन्तन-अनुचिन्तन, ध्यान, ख़याल, भाव, मनन, स्मरण

March 17, 2018 0

विचार :– यह संस्कृत-भाषा का पुल्लिंग-शब्द है। शब्द-भेद की दृष्टि से यह संज्ञा-शब्द है। विचार में ‘वि’ उपसर्ग लगा हुआ है। वि का अर्थ ‘विशिष्ट’ है। यह ‘चर्’ धातु का शब्द है, जिसका अर्थ ‘चलना’ […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला — नारी, महिला, स्त्री, औरत, वामा

March 9, 2018 0

प्राय: हमारे विद्वज्जन नारी, महिला, स्त्री, औरत तथा वामा में अन्तर नहीं कर पाते और अपनी रचनाओं में स्वच्छन्द रूप में इनका प्रयोग करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रसिद्ध पुस्तकों, ग्रन्थादिक में भी […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला – गोष्ठी-संगोष्ठी, चर्चा-परिचर्चा, वार्त्ता, संवाद-परिसंवाद

March 7, 2018 0

‘गोष्ठी’ संस्कृत का स्त्रीलिंग संज्ञा-शब्द है। इस शब्द की रचना ‘गोष्ठ’ शब्द से हुई है। ‘गोष्ठ’ संस्कृत-भाषा का ‘पुल्लिंग’ (पुंलिंग) शब्द है। ‘गो’ शब्द में ‘स्था’ धातु है, जिसका अर्थ ‘ठहरना’ है। इस धातु के […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में निमन्त्रित

March 5, 2018 0

हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की ओर से आयोजित होनेवाले सत्तरवें अहिन्दीभाषा-भाषी वार्षिक अधिवेशन में भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को ‘विशिष्ट वक्ता’ के रूप में निमन्त्रित किया गया है। सम्मेलन के प्रधान मन्त्री विभूति मिश्र के […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का काव्यलोक

March 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  बेचारा है, दिल तोड़ नहीं पाता, बेचारा है, दिल छोड़ नहीं पाता। नफ़रत क़रीने से सजा के रखता है, बेचारा है, दिल जोड़ नहीं पाता। हर सम्त लोग मुखौटे लगाये हैं बैठे, […]

व्यक्त-अव्यक्त

March 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : जीव-जगत् है पाप में, स्वार्थ यत्र-तत्र-सर्वत्र। धरणीधर नेपथ्य में, कान्ता कन्त कलत्र।। दो : निशि-दिवा-सी घूम रही, घर-घर विपदा आज। सम्मान निरापद कहाँ, पूर्ण न होता काज।। तीन : कंकणी […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए आरोपी-आरोपित का सही प्रयोग

March 1, 2018 0

दीर्घ काल से ‘आरोपी’ शब्द-प्रयोग का प्रचलन है। यह प्रयोगधर्मिता अब एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है, जहाँ एक भेड़ के पीछे अरबों-खरबों की संख्या में भेड़ों का झुण्ड बिना जाने-समझे चला जा रहा है। […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला — तीन

February 25, 2018 0

रंग-विरंगा-रंग-बिरंगा/ रंगविरंगा-रंगबिरंगा यहाँ पर दो शब्द हैं, जो मिलकर ‘विशेषण’ नामक शब्दभेद का बोध कराते हैं। प्रायः प्रत्येक स्थान पर, प्रत्येक मनुष्य-द्वारा ‘रंग-बिरंगा’ शब्द का लेखन और उच्चारण किया जाता है और अधिकतर पुस्तकों में […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला – दो : आरम्भ-प्रारम्भ-समारम्भ

February 24, 2018 0

किसी भी कार्य की प्रथम अवस्था का अनुष्ठान अथवा सम्पादन ‘आरम्भ’ है। दूसरे शब्दों में— कोई भी कार्य जब पहली बार किया जाता है तब उसे ‘आरम्भ’ कहा जाता है। अब ‘आरम्भ’ शब्द-संरचना पर हम […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : एक

February 23, 2018 0

आरती :– यह स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ है, किसी मूर्ति के चारों ओर सामने से दीपक को घुमाना। आरती किसी व्यक्ति -विशेष की नहीं की जाती प्रत्युत देवि-देव-विशेष की जाती है | शुद्ध अर्थात् […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : सौन्दर्य और सौन्दर्य-बोध की अवधारणा

February 22, 2018 0

भाषा व्यक्तित्व को निखारती है और उसमें एक सुखद आकर्षण पैदा करती है। आइए, और अपने व्यक्तित्व को सँवारिए ! सौन्दर्य और सौन्दर्य-बोध की अवधारणा :— कोई भी कविता ‘सुन्दर’ अथवा ‘nice’, ‘beautiful’, ‘great’ नहीं […]

एक भोजपुरी शोक-गीत

February 20, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इसके पहले कि आप इस शोक-प्रधान भोजपुरी गीत को पढ़ें , समझें तथा अनुभव करें, आपकी सुविधा के लिए इसकी पृष्ठभूमि का एक शब्द-चित्र प्रस्तुत है :——– एक पिता का शव धरती […]

सर्वाधिक पुस्तक-लेखन के लिए डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सम्मानित

February 20, 2018 0

इलाहाबाद में आयोजित किये जा रहे ‘राष्ट्रीय पुस्तक मेला २०१८’ के बौद्धिक-सांस्कृतिक मंच पर १८ फ़रवरी, २०१८ ई० को ‘अभिरुचि प्रकाशन’ की ओर से ‘सारस्वत समारोह में भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का सम्मान किया गया। […]

जुग-जुग जीय बकलोल बबुआ आ कारिख पोतवाऊ मटिलगनी

January 23, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इहे त भोजपूरी ह; तनी कनखी मारि के आ छिंउकी काटि के एकरा के पढ़ीं सभे, ना त गतर-गतर गुजियाये लागी आ सगरो देहिया चुनचुनाये लागी:——- बे, हो मटिलगना के का कहीं […]

कहानियों में मनोरंजन है और मानसिक तृप्ति भी

January 19, 2018 0

आरती जायसवाल के कहानी-संग्रह के रूप में शीघ्र प्रकाश्य प्रथम पुस्तक की भूमिका डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) एक कुशल कहानीकार दो बातों का ही विशेषत: ध्यान करता है : प्रथम, उसे पात्रों के चरित्र और […]

मैं उस वतन का चराग़ हूँ, चलती जहाँ अब गोलियाँ

January 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैं उस वतन का चराग़ हूँ, जहाँ आँधियाँ-आँधियाँ। चीर-हरण होता हर प्रहर, चलती जहाँ अब गोलियाँ। विस्थापित शराफ़त हो रही, नंगों की दिखतीं टोलियाँ। कार्पोरेट का डंका बज रहा, फैली हैं सबकी […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कुछ शेर

January 14, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक : उसका दीवानापन, सितमकशीद१ लगता है, सितमगर सितमकशी२ का ऐसा इम्तिहान न ले। दो : मझधार में है सफ़ीना३, साहिल४ है दिखती दूर, किश्तीबान५ साहिबे! रुको नहीं, मंज़िल भले हो दूर। […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के प्रकाशनाधीन भोजपुरी उपन्यास ‘तिरछोल चाची’ का एक अंश

January 10, 2018 0

“का हो हमार चकचोन्हर चाची! काहाँ उधियाइल बाड़ू। अपना गरदनिया में भागवा गमछा लटकइले आ खइनी फटकत तूँ एतना सुनर-साघर लउकलू कि बुझाए लागेला कि तहरा के भगवान जी बाड़ा सरसन्त से ठोकि-ठाकि के ए […]

एक कवि का दृष्टिबोध

January 2, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- पसीने से हो तर-ब-तर, हवा चलती रही बेक़द्र। सूरज मद्धिम हो रहा, दीये-बाती-सा जलकर। गुस्ताख़ियाँ बूढ़ी हो रहीं, साल का ख़त्म एक सफ़र। आगाज़ अंजाम से यों बोला, ”तूने बरपाये बहुत क़ह्र। […]

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