डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला में जानिए वाक्य-विन्यास

July 16, 2019 0

आज ‘गुरु पूर्णिमा’ है। ★ आषाढ़-मास की ‘पूर्णिमा’ को ‘गुरु पूर्णिमा’ की संज्ञा दी गयी है। इस सारस्वत पर्व पर ‘गुरुस्मरण’ का विधान है। ● डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला हिन्दी-व्याकरण का नियम वाक्य-विन्यास :- […]

‘भाषा की पाठशाला’ के अन्तर्गत डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय से पूछें शब्दार्थ

June 18, 2019 0

‘दैनिक जागरण’ की ‘शनिवासरीय’ प्रस्तुति ‘भाषा की पाठशाला’ में हम ‘दो शब्दों’ पर सम्यक् रूपेण विचार करते हैं और अन्त में उन शब्दों के प्रति अपनी पाठक-पाठिकाओं को जागरूक करते हैं, जो अनभिज्ञता के कारण […]

शब्द-चिन्तन

June 4, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- शब्द परा है तो अपरा भी; शब्द ज्योति है तो तिमिर भी; शब्द स्थूल है तो सूक्ष्म भी; शब्द नूतन है तो पुरातन भी; शब्द रुदन है तो हास भी; शब्द सौम्य […]

जो भी भाषा-शुचिता का पक्षधर नहीं, ‘अपना मार्ग’ अलग कर ले

May 27, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जो भी व्यक्ति इस विषय का पक्षधर है कि उसके लिए ‘भाषा-शुचिता’ से अधिक ‘मात्र सम्प्रेषणीयता’ का महत्त्व है, ऐसे लोग मेरी मैत्री-सूची से स्वयं को ‘सदैव’ के लिए पृथक् कर लें; […]

बुद्धिजीवीवर्ग-द्वारा श्रमजीवियों का आत्मिक सम्मान

January 2, 2019 0

कुलपति ने मज़दूरों को भोजन कराकर अपना जन्मतिथि-समारोह मनाया । भाषाविद् के कोश का लोकार्पण श्रमिकों की उपस्थिति में हुआ । नूतन वर्ष के अवसर पर मेलाक्षेत्र के समीप नवनिर्माणाधीन भवन में शिक्षा और साहित्यजगत् […]

शिवगंगा विद्यामन्दिर के वार्षिकोत्सव में डाॅ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास में घर की होती है विशेष भूमिका

December 31, 2018 0

गत दिवस (२९ दिसम्बर, २०१८ ई०) ‘शिवगंगा विद्यामन्दिर’, शान्तिपुरम्, इलाहाबाद का वार्षिकोत्सव सम्पन्न हुआ था, जिसमें ‘हरिश्चन्द्र अनुसंधान-संस्थान’ के उपनिदेशक प्रो० एस० डी० त्रिपाठी मुख्य अतिथि थे और भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विशिष्ट अतिथि। आरम्भ […]

‘पृथ्वीनाथ पाण्डेय’ किसी राजनीतिक दल अथवा व्यक्तिविशेष का ‘क्रीतदास’ नहीं, बल्कि एक उन्मुक्त वैचारिक ‘प्रभंजन’ है

December 22, 2018 0

मेरी यह टिप्पणी उन सभी के लिए है, जो मुझे किसी भी राजनीतिक दल के प्रवक्ता के रूप में अपने विकृति दृष्टिपथ पर लाकर वर्षों से देखते और प्रतिक्रिया करते आ रहे हैं :–मैं उन […]

‘उत्तरप्रदेश उच्चतर शिक्षा आयोग’, इलाहाबाद की अकर्मण्यता सामने आयी : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

December 20, 2018 0

‘असिस्टेण्ट प्रोफेसर-परीक्षा’ के लिए प्रश्नपत्र बनानेवाले ‘लिए’, ‘मस्तिष्क’, ‘प्रस्तुतीकरण’, ‘प्रवृत्ति’, ‘वैयक्तिक’ आदिक शब्द नहीं लिख सके?.. ! भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने प्रश्नपत्र बनानेवालों की योग्यता पर प्रश्न उठाया है । डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

December 14, 2018 0

यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त […]

बाल-दिवस के अवसर पर बालसाहित्य-विशेषज्ञ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का एकल व्याख्यान

November 15, 2018 0

“बाल्यकाल मानव-जीवन की आरम्भिक अवस्था है, जिसमें मनुष्य की समस्त शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का आविर्भाव , प्रस्फुटन तथा विकास निहित है। यह एक विधायन विज्ञान भी है। इस दृष्टि से बालसाहित्य का प्रासंगिक और […]

‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ में अभारतीय (विदेशज) समध्वनिमूलक शब्द

October 13, 2018 0

यहाँ उन शब्दों के शुद्ध वर्तनी और शब्दार्थ दिये गये हैं, जिनका हमारा प्रबुद्ध-वर्ग अपने वाचन और लेखन में प्रयोग करता है। ऐसे शब्दों को हिन्दी ने आत्मसात कर लिया है। आप उन शब्दों पर […]

“पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं”– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

October 12, 2018 0

“पर्यावरण के विषय में राष्ट्रीय सीमाएँ इतनी झीनी हो चुकी हैं कि स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के मध्य का अंतर अब समाप्त हो चुका है। पर्यावरण-प्रणालियाँ राष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं। आजकल विकास […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

October 11, 2018 0

★ निम्नांकित शब्दों में से कोई एक शब्द ही शुद्ध है। आप शब्दों को व्याकरण की कसौटी पर कसते हुए, शुद्ध शब्द बताइए :– १- (क) अन्तेवासी (ख) अन्तःवासी (ग) अन्तवासी (घ) अन्ते:वासी २- (क) […]

तथाकथित नारी-विमर्श का ‘सच’

June 12, 2018 1

नारी को जहाँ तक सम्भव है, सब तरह से बाँध कर रखना; पुरुष का एकान्त अनुगत कर देना, यह समाज-व्यवस्था के लिए कार्यकर होने पर भी समाज-जाति की प्रगति के लिए एक अन्तरार्थ है; क्योंकि […]

हिन्दी-पत्रकारिता का भविष्य समुज्ज्वल है : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

May 31, 2018 1

“मैं नहीं स्वीकार करता कि पत्रकारिता के क्षेत्र में विकार-ही-विकार है, वहाँ परिष्कार भी है। अब पत्रकारिता को नये रूप-रंग में ढालकर लोकोपयोगी बनाना होगा, ताकि जनगणमन अपने पूर्वग्रह से ऊपर उठकर पत्रकारिता की पहचान […]

एगो भोजपुरी गजल

May 24, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जे-जे रहे दोस्त सब दुसमन होइ गइले, हमारा रहतिया में काँटा बोई गइले! बड़ा हँसी आवेला ‘बाबू’ के चल्हकिया पर, जे सुरूज के गोला के चनरमा समुझि गइले! डूबत उ खूब देखइहें […]

 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के भोजपुरी उपन्यास का एक अंश :—

May 13, 2018 1

“का हो लजावन चाची! हो कूँड़वा में मुहवाँ ढुकाई के का चपर-चपर कर तारू?” एतना सुनते लजावन चाची बाड़ा हिलवला-डोलवला से आपन फँसल मूड़ी ओही कूँड़वा में से निकालि पइली। फेर आपन राग बदलि के […]

एक अन्तर्द्वन्द्व ०—- ‘मन और काम’ की सत्ता और महत्ता 0

May 13, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मन चंचल है और चपल भी; बाँधने के लिए आगे बढ़ता हूँ तो अँगुलियाँ छिटक जाती हैं और मनभाव को एकाग्र करने की प्रक्रिया से सम्बद्ध होता हूँ तो उपालम्भ के स्वर […]

‘कर’ ‘नाटक’…….पर्दा उठा; नाटक शुरू

May 10, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘कर’ ‘नाटक’ अपने-अपने उस्ताद के साथ जम्हूरे पहुँच गये हैं; ,वहीं हमने भी अपने उस्ताद और जम्हूरे भेज दिये हैं। “तो बोल जमूरे!” “हाँ ओस्ताद!” “जमूरे! ‘कर’ ‘नाटक’ का चुनावी बुखार क्या […]

आरक्षण की अब ‘समीक्षा’ करनी होगी : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

April 3, 2018 631

२ अप्रैल, २०१८ ई० को इलाहाबाद-स्थित ‘चन्द्रशेखर आज़ाद प्रतिमा-स्थल’ से ‘आरक्षणसमीक्षा मोर्चा’ की ओर से आरक्षणसमीक्षा-अभियान का आरम्भ भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता में किया गया था, जिसका नेतृत्व मोर्चा के संयोजक वीरेन्द्र सिंह […]

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