पृथ्वी-दिवस’ पर वैचारिक शत्रु-मित्र के नाम एक मुक्त पत्र

April 22, 2018 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय को जब ‘मैं’ ही पूरी तरह नहीं समझ पा रहा हूँ, जो उसका चरित्र जी रहा है तब आप अथवा अन्य कोई कैसे समझ सकता है? पृथ्वीनाथ किसी ‘नाम’ की बैसाखी लेकर नहीं […]