संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

प्रेमचन्द की कथा में सामाजिक यथार्थ : मत और सम्मत

August 1, 2021 0

प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ आज भी जीवित है ★डॉ० प्रदीप चित्रांशी (साहित्यकार, प्रयागराज) मुंशी प्रेमचंद ने बहुत सी कहानियाँ,उपन्यास लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों का वर्णन जितनी वास्तविकता […]

प्रेमचन्द के बाद धीमा होता कहानी का सफ़र, क्यों?

July 31, 2021 0

आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कथा-विषय पर जब संवाद-परिसंवाद होता है तब समीक्षक पारदर्शिता के साथ ‘प्रेमचन्द’ से आगे बढ़ नहीं पाता है। यह अलग बात है कि […]

प्रेमचन्द के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ : एक चिन्तन

July 31, 2021 0

‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान में आज (३१ जुलाई) एक आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया। प्रेमचन्द की १४१ वीं जन्मतिथि के अवसर पर आयोजित ‘प्रेमचन्द के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ’ विषय पर देश […]

प्रेमचन्द के उपन्यासों में भारतीय समाज का मानसिक चिन्तन है – आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

July 31, 2020 0

● प्रेमचन्द की जन्मतिथि ३१ जुलाई पर विशेष ‘सर्जनपीठ’, प्रयाग की ओर से आज प्रेमचन्द की जन्मतिथि के अवसर पर ‘प्रेमचन्द– एक सार्वकालिक कथाकार’ विषयक एक सारस्वत आयोजन अलोपीबाग़, प्रयागराज में किया गया। आयोजन की […]

देश को क्यों नहीं मिला ‘दूसरा प्रेमचन्द’?

July 31, 2020 0

● आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है। — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कथा-विषय पर जब संवाद-परिसंवाद होता है तब समीक्षक पारदर्शिता के साथ ‘प्रेमचन्द’ से आगे बढ़ नहीं पाता है। यह अलग बात है […]

देश को क्यों नहीं मिला ‘दूसरा प्रेमचन्द’?

July 31, 2019 0

आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है। डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय कथा-विषय पर जब संवाद-परिसंवाद होता है तब समीक्षक पारदर्शिता के साथ ‘प्रेमचन्द’ से आगे बढ़ नहीं पाता है। यह अलग बात है कि कतिपय साहित्यिक […]

प्रेमचन्द का लेखन— मेरी दृष्टि में 

July 31, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है । प्रेमचन्द के लेखन की सार्थकता और प्रासंगिकता इस विषय में है कि उन्होंने देश के मध्यवर्गीय चरित्र को विस्तीर्ण और वास्तविकता में दृष्टिपात करने […]