ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

बाहर का कप

April 4, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा मोहिनी, सुबह 7 बजे से लेकर 11 बजे तक अपनी मेम साहब के यहाँ काम करती । सारे काम मोहिनी के जिम्मे ……. मेमसाहब 8 बजे उठती, उसके एक घण्टे पहले मोहिनी के […]

चिंतन : मूरख को मूरख कहै, अतिशय मूरख होय

April 2, 2021 0

आज ‘फर्स्ट अप्रैल’- मूरख दिवस है । आज के दिन चतुर लोग किसी को मूर्ख बनाने में आनन्दित होते हैं । मूर्ख बनाये नही जाते, होते ही हैं । मूर्खता साधारण बुद्धिमानो को विकार या […]

पढ़ीं-लिखीं चतुर मूर्ख महिलाएँ

March 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैं गंगा-गोमती से लखनऊ जा रहा था। मेरे पार्श्व में दो महिलाएँ एक बच्चे के साथ बैठी हुई थीं। मैं अपनी पुस्तक ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ और ‘समग्र सामान्य ज्ञान’ के […]

क्रिमिनल बाबा का दरबार

January 20, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : ‘क्रिमिनल बाबा’ का अय्याशीभरा दरबार सज गया है। धर्म-कर्म का ठीकेदार ‘क्रिमिनल बाबा’ ६५ इंच का सीना फुलाये धर्म-कर्म की झाड़-फूँक कर रहा है। पहली भक्तिन— बाबा के चरणों में […]

तानाशाही चरम पर, नहीं कोई दरकार

October 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गयी हाथ से नौकरी, लोग हुए बेकाम।नमो-नमो का जप करो, बोलो जयश्रीराम।।दो–शर्म-हया सब पी गये, छान पकौड़ा तेल।जनता जाये भाँड़ में, अजब-ग़ज़ब का खेल।।तीन–थपरी मारो प्रेम से, उत्तम बना प्रदेश।गुण्डे […]

न्याय-देवता कह रहे, लाओ! घर में सौत

October 2, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति।मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।।दो–पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर।भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब शोर।।तीन–अजब-ग़ज़ब के लोग हैं, शर्म-हया […]

रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल

September 28, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जपो नमो-नमो माला, लिये कटोरा हाथ।कंगाली में देश है, दिखे न कोई साथ।।दो–देश की शिक्षा चोर है, चहुँ दिशि दिखें दलाल।रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल।।तीन–देश विपक्षी ‘कोमा’ में, […]

व्यंग्य : E-पोथी अर्थात Google बाबा

September 24, 2020 0

चिन्तन : पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, ई-पोथी पढ़ि जिये। बालपोथी (कक्षा एक की पुस्तक) से आरंभ शिक्षा ई -पोथी ने क्या ले लिया,चमत्कार हो गया। बस्ते बच्चों या लेखपालों को लादने से मुक्ति मिली। […]

भोजपूरी के पोंछिटा मत खींच…S..S..S

August 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भोजपूरी के हड़ाह लिक्खाड़), परियागराज भोजपूरी ‘चिनियाबादाम’ न हवे ए बाबू कि अँगुठवा दबाई के फोरि देहला आ मुँहवाँ में ढुकाइ लेहल। जेकरा फराकी ठोकला के बदिया……धोवे के सहूर ना […]

“ताँत बजी और राग बुझा”

August 26, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ताँत के बजते ही राग की अनुभूति होने लगती है। इसे रेखांकित करता है, सत्य और मिथ्या का मंच— ‘मुक्त मीडिया’ अर्थात् ‘सोशल मीडिया’। अनौचित्य की स्थापना करते हुए जब […]

“न ख़ुदा ही मिला, न विसाले सनम!”

August 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुझे ऐसा कोई भी व्यक्ति पसन्द नहीं है, जो कहता कुछ हो और करता कुछ हो। ऐसों से मैं दूरी बना लेता हूँ। अधिकतर ‘लिक्खाड़’ और ‘वाचाल’ लोग ‘महिला- स्वातन्त्र्य’ […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

August 1, 2020 0

● ख़ुदग़रज हँसी बनाम ख़ुद्दार तबस्सुम सच, हँसी कितनी हसीन होती है और गुस्ताख़ भी कि आप चाहकर भी उससे अलग नहीं हो सकते। शातिर हँसी तो इंसान की फ़ित्रत का बाख़ूबी बयान करती है। […]

‘रिश्वतख़ोरी’ और ‘दलाली’ हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

July 13, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘मुण्डकोपनिषद्’ से लिया गया राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ”सत्यमेव जयते” को निरस्त कर, देश के समस्त निजी, शासकीय-अर्द्ध-शासकीय कार्यालयों, प्रतिष्ठानों, साहित्यिक संस्थानों, अधिष्ठानों, परिषदों, समितियों, मण्डियों, मन्त्रालयों, न्यायालयों, संसद्, विधानमण्डल, विधान […]

अपने को बुद्धिजीवी माननेवालो!

June 29, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेशक,तुम्हारे चिन्तन चुराये हुए हैं।किराये की कोख से जन्मेया फिर परखनली में उपजेतुम्हारे वे शब्द हैं,जिन्हें पक्षाघात ने जकड़ लिया है।कोई थिरकन नहीं?प्रतिक्रिया-रहित संवेदना-शून्यतुम्हारा शब्द-जगत!कबाड़ख़ाने से उठाकरलायी गयी लेखनीविकृत संसार […]

ये क़ानून के रखवाले हैं; आँखें ‘चियार’ कर देखिए

June 29, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नियम-क़ानून तो लोकतन्त्र को जीनेवाले हम गुनहगारों के लिए है। अब आँखें चियार करके देखिए– इनके और अनुयायियों ने कितना प्यारा आदर्श प्रस्तुत किया है। सरकारी लोग हमें सरकारी ‘सोसल […]

‘चौकीदार चाचा’ के फराकी ठोकल माहँगा पड़ि गउवे

June 27, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ओकर बियहवा बिदेसे में कराई दीहल जाऊ का? आपन ओनिए रहि के फरियावत रही। काहें से कि जब देख तब, ओकरा गोड़वा में शनिचरे चढ़ल रहेले। हमरा इहो लागता कि […]

चाचा झगड़ू-भतीजा रगड़ू– दो

June 22, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चाचा झगड़ू– अरे बेटवा रगड़ू! तुम्हार फटफटिया क का होइ गा? भतीजा रगड़ू– चाचा! इ बताव, तुम्हार उमर कित्ता होय? झगड़ू– अरे बेटवा साठ कै पार। रगड़ू– त एका कहा […]

चाचा झगड़ू-भतीजा रगड़ू– एक

June 21, 2020 0

—आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चाचा झगड़ू– अरे बेटवा रगड़ू! भतीजा रगड़ू– चाचा! कई दफा बोला है, बेटा मत कहा करो। अरे! कछु लाज-सरम किहा करो। हम तुम्हार भतीजा हैं, भतीजा। भतीजा अउर बेटा मा बहुतै […]

‘मन’ से एक मुलाक़ात

May 10, 2020 0

कभी-कभी लगता है, ‘भाषा’ की कारीगरी करने की जगह ‘पान’ की दुकान खोलकर सीना तानकर बैठ जाऊँ। वहाँ रहकर भी ‘चूना’ लगाता रहूँगा। जिस क्षण निर्णय कर लूँगा, करके दिखा दूँगा; क्योंकि भाषादरिद्रता से युक्त […]

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे

December 10, 2019 0

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे, ले वो वादे बेरोजगारी मिटा देंगे, लो वो वादे भ्रष्टाचार मिटा देंगे, हम नया हिन्दुस्तान बना देंगे । ले वो वादे कुपोषण मिटा देंगे, ले वो भारत को साक्षर […]

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