ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

माया : एक अनुशीलन

February 22, 2021 0

आत्मिक संदेश ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह संसार अशरीरी से संत्रस्त है। निदर्शनस्वरूप प्रथम स्थान ‘माया’ का है और द्वितीय स्थान ‘कामदेव’ का। माया और अनंग (कामदेव) की सर्वत्र व्याप्ति है। दोनों का अस्तित्व […]

शिक्षक दिवस पर विशेष : “नायमात्मा बलहीनेन लभ्य”

September 5, 2020 0

डाॅ. निर्मल पाण्डेय (इतिहासकार/लेखक) शिक्षा का सही उद्देश्य बताते एक उद्बोधन में, जिसे डॉ. राधाकृष्णन ने 23 जनवरी 1957 को कलकत्ता विश्वविद्यालय शताब्दी वर्ष में उपाधि-वितरण-समारोह के अवसर पर दिया था, कहते हैं: ‘पुराने विश्वविद्यालयों […]

चीन को चारों ओर से घेरने की भारतीय रणनीति

July 3, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारत-चीन-सीमा पर आज (३ जुलाई) जाकर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का सीमा पर डटे भारत के सैनिकों से मिलना; घायल भारतीय सैनिकों को सुखद आश्वासन […]

शिक्षा-परीक्षा को कलुषित और निरर्थक करती हमारी व्यवस्था

June 1, 2020 0

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय —- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय श्रमिक-वर्ग की बेकारी उतना चिन्त्य नहीं है जितना कि शिक्षित-वर्ग की। श्रमिक-वर्ग कहीं-न-कहीं सामयिक काम पाकर अपना जीवन-यापन कर लेता है; परन्तु शिक्षित-वर्ग जीविका […]

आज ८ मार्च है– अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : परम्परा का तक़ाज़ा जो है

March 8, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय : नारी-समाज में और नारी-समाज के प्रति जागरूकता आज बढ़-चढ़कर दिख रही है। आज के समाचार-चैनलों और कल के अख़बारात में परम्परा का भराव दिखेगा और ९ मार्च के बाद से अगले ७ […]

खुदा मुझे इलाहाबादी खुराफ़ातियों से बचाये : मिर्ज़ा ग़ालिब (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ● आज (१५ फ़रवरी) मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि है । जाने क्यों, असद उल्लाह बेग़ ख़ाँ ‘मिर्ज़ा ‘ग़ालिब’ जैसे ज़हीनी अदीब और बेमिसाल शाइर के साथ ऐेसा कौन-सा वाक़िआ हुआ कि […]

अपनी बेटियों को ‘श्रीमती’ नहीं, ‘शक्तिमती’ बनाइए!

October 9, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नपुंसक और पुरुषार्थविहीन हैं वे, जो बेटी बचाने की बात तो करते हैं; परन्तु उन्हीं के लोग जब बेटियों का शीलहरण करते हैं तब वे ‘शीलहरणकर्त्ताओं’ के साथ खड़े होते दिखायी पड़ते […]

हिन्दी दिवस विशेष :- “हिन्दी हमारी जीवनशैली एवं हमें हमारी मां की तरह प्यारी है”

September 13, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”          हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं,बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट, हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम हैं। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे […]

“सुरमई अँखियों में इक नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे!”

August 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]

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