ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

साक्षात्कार : सामाजिक मुद्दों पर आधारित एक लघु फिल्म “स्पीच” के निर्देशक राम वशिष्ठ से वार्ता

आज हम बात करने जा रहे हैं युवा फ़िल्मकार राम वशिष्ठ जी से । राम वशिष्ठ जी ने अभी – अभी सामाजिक मुद्दों पर आधारित एक लघु फिल्म “स्पीच” पूरी की है । स्पीच अब प्रदर्शन को तैयार है । स्पीच फिल्म के निर्माण में किन – किन समस्याओं या परिस्थितियों से निर्माता/निर्देशक को गुजरना पड़ा, इसी से सम्बन्धित जानकारी पाठकों तक पहुँचाने के लिए युवा फ़िल्मकार राम वशिष्ठ से हमारे प्रधान संपादक राघवेन्द्र कुमार “राघव” की हुई बातचीत के अंश-



Raghavendra Kumar “Raghav” —————–EDITOR IN CHIEF———

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- पहले तो आप यह बताएँ कि सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाने का आइडिया कैसे आया ?

राम वशिष्ठ- रोजमर्रा के अखबार में महिला उत्पीड़न, एसिड अटैक, दहेज हत्या, किसान आत्महत्या और पर्यावरण प्रदूषण की खबरें पढकर मन विचलित हो जाता था ।तो एक कहानी लिखी थी । फिर एक दिन एक शॉर्ट फिल्म करते हुए कुछ सहयोगी कलाकारों ने कहा कि हमें दोयम दर्जे की फिल्म की बजाय कुछ क्लासिकल करना चाहिए तो मेरे दिमाग में अपनी कहानी पर फिल्म बनाने का विचार आया ।

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- वशिष्ठ जी आप ने फिल्म निर्माण जैसा पेचीदा काम चुना है । आप यह बताएँ कि कलाकारों का चयन कैसे किया ?

राम वशिष्ठ- सभी कलाकार स्थानीय है और पहले भी साथ काम कर चुके है ।

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- आप अभी काफी युवा हैं । फिल्म निर्माण में क्या – क्या परेशानियाँ सामने आयीं – ?

राम वशिष्ठ- परेशानियां तो बहुत आयी । सबसे पहले तो बजट की समस्या थी फिर जैसे तैसे बजट का इंतजाम हुआ तो कुछ कलाकार ऐसे थे जिन्होंने बिना मेहनताना लिए फिल्म करने की हामी तो भर दी लेकिन काम करने में आनाकानी करने लगे उनको बदलना पड़ा । एक हम फिल्म को क्लासिकल बनाने के लिए प्रतिबद्ध थे तो कोई कसर नही छोड़ना चाहते थे और कैमरे से शूटिंग से पहले रिहर्सल का लंबा दौर चला जो कुछ कलाकारों को पसंद नही था उनको कुछ समय बाद बदलना पड़ा । लेकिन हम अडे रहे और फिर हमें समर्पित कलाकार मिले जिन्होंने जी जान से मेहनत की और फिल्म कमाल बनी है । हमारे पास संसाधनो की कमी थी और आज भी है तो निर्देशक नही रख सकते थे । इस कारण निर्देशन में भी हाथ आजमाना पड़ा । मैंने पहले कभी निर्देशन नही किया था तो शुरू में थोड़ी परेशानी हुई ।

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- क्या आप अपनी लघु फिल्म स्पीच के बारे में पाठकों को कुछ बताएंगे ?

राम वशिष्ठ- यह फिल्म केवल किसान आत्महत्या, पर्यावरण प्रदूषण और महिला उत्पीड़न के मुद्दों को सिर्फ उठाएगी ही नही है बल्कि यह उनको दिखाते हुए दर्शको को अंदर तक झकझोर देगी । यह निश्चित रूप से एक क्लासिकल फिल्म होने जा रही है । हमने इस पर बहुत मेहनत की है । हर कलाकार ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है ।

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- अब आगे की योजना क्या है ?

राम वशिष्ठ- आगे भी और बहुत से मुद्दे है जिन पर मैं फिल्म बनाने की सोच रहा हूँ । बेटी बचाओ – बेटी पढाओ पर एक दमदार कहानी है । आगे भी समाज और देश हित के मुद्दों पर फिल्म बनाता रहूंगा । असल में मुझे लगता है कि हमारे समाज में एक सुधारवादी आन्दोलन चलना चाहिए जिससे समाज की बुराईयों को दूर कर एक अच्छा समाज बन सके और उस आन्दोलन को आगे बढ़ाने का मेरा तरीका यह फिल्में है ।

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- आप व्यूवर्स के लिए क्या कहना चाहेंगे ?

राम वशिष्ठ- इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को मैं धन्यवाद देता हूं और आशावान हूँ कि फिल्म सभी को पसंद आएगी ।

url and counting visits