देश के दस राज्यों में नदियों के प्रचण्ड रूप!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

पिछले एक सप्ताह से उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश (भोपाल, मन्दसौर आदिक), महाराष्ट्र, गुजरात (अहमदाबाद, सौराष्ट्र, कच्छ, गोधरा, सुरेन्द्रनगर, मोरबी) आन्ध्रप्रदेश (कुर्नूल आदिक) केरल तथा कर्नाटक में आवृष्टि (मूसलाधार वर्षा) के कारण वहाँ की नदियाँ विकराल रूप दिखा रही हैं। केरल में नदियों के प्रकोप के अतिरिक्त वहाँ भूस्खलन भी हो रहा है, जिनके कारण स्थानीय लोग अपने जीवन से हाथ धो रहे हैं। प्रभावित लोग और पशुओं को शासन-प्रशासन की ओर से यथासम्भव सहायता मिलनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों के शिक्षणसंस्थान और सभी कार्यालयों को तब तक बन्द करना होगा जब तक वहाँ की स्थिति आवागमन-योग्य नहीं हो पाती। अभी उक्त राज्यों में और भीषण वर्षा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पहाड़ से मैदान तक वर्षा का निर्दय प्रहार जारी है। ‘एन०डी०आर०एफ० के सुरक्षाकर्मी जीवनरक्षा करने के लिए यथाशक्य प्रयत्नशील हैं। अब नावों पर बची है, जनजीवन की आशा। प्रकृति-प्रकोप पर किसी का वश नहीं दिख रहा है।

पानी की लहरें इतनी बेरहम हैं कि किसी को भी नहीं छोड़ रही हैं; जनजीवन को ‘बन्धक’ बना रही हैं। ऐसी स्थिति में, प्रभावित लोग के पास भोजन की व्यवस्था नहीं है और केन्द्र-राज्य की सरकारों की उदासीनता स्पष्ट दिख रही हैं। जिस प्रकार और जिस स्तर की सहायता लोग को चाहिए , सरकार की ओर से नहीं की जा रही है। रेलगाड़ी मार्ग बाधित हैं।

सर्वाधिक चिन्तनीय विषय यह है कि इन सभी राज्यों के बाँध के ‘गेट’ खोल दिये गये हैं, जिनके कारण जल का उद्दाम प्रवाह ‘रिहायशी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० अगस्त, २०१९ ईसवी)

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