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केन्द्र सरकार तीन तलाक, हलाला और बहु विवाह प्रथा की विरोध करती है

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी दलीलों में कहा है कि शरीयत के ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं...

 सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ तीन तलाक के मुद्दे पर 11 मई से रोजाना सुनवाई शुरु करेगी। सुप्रीम कोर्ट में इस बीच केन्द्र सरकार ने हलफनामा देकर कहा है कि वह तीन तलाक, हलाला और बहु विवाह प्रथा की विरोध करती है। केंद्र ने तीन तलाक व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसी हर वह परंपरा महिला व पुरुष समानता के खिलाफ है जो महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक या भावनात्मक रुप से कमज़ोर बनाती है। संविधान में दिये गये लैंगिक समानता, लैंगिक न्याय और गरिमा से जीवन जीने के संवैधानिक उद्देश्य के खिलाफ धार्मिक प्रथाएं नहीं हो सकतीं। इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक के खिलाफ दायर याचिकाओं का विरोध किया था। केंद्र सरकार ने तीन तलाक, हलाला और एक से ज्यादा विवाह का विरोध किया है । सभी नागरिकों को संविधान में अपनी आस्था मानने की आजादी है । हर प्रथा आस्था का अभिन्न हिस्सा नहीं हो सकती । लैंगिक समानता, लैंगिक न्याय और गरिमा के खिलाफ धार्मिक प्रथाएं नहीं जा सकतीं हैं । तीन तलाक, एक से ज्यादा विवाह और हलाला इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं हैं ।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी दलीलों में कहा है कि – शरीयत के ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं । तलाक को मूल अधिकारों के दायरे में नहीं देखा जा सकता । याचिकाओं को बिना इस्लामिक कानून समझे दायर किया गया है । संविधान में सभी को अपने धर्म के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार है । याचिकाकर्ता निजी मसले को मूल अधिकार बता रहे हैं, लिहाजा इन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मामले में 11 मई से सुनवाई शुरु करेगी।