राजस्व के भरे भण्डार से सर्वांगीण विकास की अवधारणा होगी साकार : अरुण जेटली

    प्रधानसंपादक       इण्डियनवॉयस 24

रिपोर्ट- राघवेन्द्र कुमार राघव


हरियाणा में फरीदाबाद में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बोलते हुए कहा कि वस्‍तु एवं सेवाकर में करों की कम दरों वाली श्रेणियां राजस्‍व बढ़ने से बन सकती हैं । जीएसटी पर श्री जेटली ने कहा कि विवरणी जमा कराने में करदाताओं के सामने आने वाली जटिलताओं को भी कम करने की आवश्यकता है ।
आज भारतीय राजस्‍व सेवा के अधिकारियों को वित्‍त मंत्री ने संबोधित करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्ग अप्रत्‍यक्ष करों का बोझ उठाते हैं । जन उपभोग की वस्‍तुओं पर करों की दर कम करने के लिए सरकार भी हमेशा प्रयासरत रहती है । विकास की मांग करने से पहले करों का सही और समय पर यदि जनता भुगतान कर दे तो उसे विकास के लिए कहने की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी । कोई भी सरकार पर्याप्‍त राजस्‍व की दशा  में देश को उन्नति के मार्ग पर आसानी से ले जा सकती है । वित्‍त मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था करदाताओं की ईमानदारी से अगड़े देशों की श्रेणी में आ सकती है । देश के लिए राजस्‍व लाइफ लाइन है । राजस्व के अभाव में विकास की अवधारणा ही निर्मूल है । श्री जेटली ने राजस्व अधिकारियों से कहा कि आप सोचकर देखिए कि हमारे पास यदि पर्याप्त राजस्व उपलब्ध हो तो हम रक्षा क्षेत्र में हम कहाँ होंगे । भारत के गाँव विकास की लहलहाती फसल के बीच कैसे दिखेंगे । राजस्व के भरे भण्डार से सर्वांगीण विकास की अवधारणा हम देखते ही देखते साकार कर सकते हैं ।

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