उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग ने खड़ा किया ‘भयंकर अशुद्धियों’ का पहाड़!

उत्तरप्रदेश पी०सी०एस० (प्रा०) परीक्षा सामान्य अध्ययन और हिन्दी-भाषा के प्रश्नों और वैकल्पिक उत्तरों में अक्षम्य अशुद्धियाँ

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक)


दशकों से उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग की अयोग्यता उसका पीछा नहीं छोड़ रही है। इस आयोग की ओर से जितनी भी परीक्षाएँ आयोजित की जा रही हैं, सभी में प्रश्नपत्र तैयार करनेवाले और उत्तरपुस्तिका का परिणाम तैयार कर उन्हें घोषित करनेवाले एक सिरे से उत्तरदायी हैं। पिछले जुलाई-माह में सम्पन्न एल०टी० ग्रेड परीक्षा के लिए तैयार किये गये भ्रामक और ग़लत प्रश्नों और उनके वैकल्पिक उत्तरों के औचित्य पर गम्भीर प्रश्न खड़े किये जा चुके हैं, जिनके उत्तर आयोग के सचिव जगदीश के पास नहीं हैं।

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पिछले रविवार (२८ अक्तूबर, २०१८ ई०) को सम्पन्न उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग की प्रमुख परीक्षा ‘उत्तरप्रदेश पी०सी०एस० (प्रा०) परीक्षा २०१८’ के सामान्य अध्ययन और हिन्दी के प्रश्नों, उनके वैकल्पिक उत्तरों में ‘सैकड़ों अशुद्धियाँ’ हैं। इतना ही नहीं, जिस परीक्षा में उत्तरप्रदेश के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारी का सपना सँजोये हुए लाखों की संख्या में परीक्षार्थी परीक्षा देने के लिए बैठते हैं, उसके प्रश्नपत्रों की शब्दावली में ऐसी-ऐसी भाषिक अशुद्धियाँ हैं, जिन्हें पढ़कर यही लगता है कि उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग के सम्बन्धित समस्त अधिकारियों को ‘कक्षा छ:’ तक के स्तर का भी ‘हिन्दी शब्दज्ञान’ नहीं है, जिनका हम आगे उल्लेख करेंगे।

पहले हम ‘सामान्य अध्ययन’ के प्रश्नों और उनके वैकल्पिक उत्तरों पर विचार करेंगे :—

शुरू के प्रश्नों को देखें— निम्नलिखित युग्मों में से कौन सही सुमेलित नहीं है?

(a) अदीना मस्जिद– मांडु (b) लाल दरवाजा मस्जिद– जौनपुर (c) दाखिल दरवाजा– गौड़ (d) तीन दरवाज़ा– अहमदाबाद

इस प्रश्न में जब ‘सुमेलित’ है तब ‘सही’ शब्द का कोई औचित्य नहीं है। सुमेलित का अर्थ ही होता है, ‘अच्छी तरह से मिलान किया गया’। इस प्रश्न के मात्र (b) और (d) विकल्प सही हैं, जबकि (a) और (c) के उत्तर ग़लत हैं; जबकि (a) का उत्तर ‘पाण्डुआ’ और (c) का ‘मालदा’ होगा। ऐसे में, यह प्रश्न ही ग़लत तरीक़े से किया गया है।

इसी प्रश्न के बाद के एक प्रश्न और उसके वैकल्पिक उत्तरों को देखें– निम्नलिखित युग्मों में कौन सही सुमेलित नहीं है?

(a) ध्रुवदास– भगत नामावली (b) नाभादास– भक्तमाल (c) रसखान— रसिकप्रिया (d) उस्मान— चित्रावली
इन प्रश्नों के दो उत्तर सही और दो ग़लत हैं। ध्रुवदास ने ‘भगत नामावली’ नहीं, ‘भक्तनामावली’ की रचना की थी। इस प्रकार यह प्रश्न और इसके वैकल्पिक उत्तर ग़लत हैं। विकल्प (d) में ‘उस्मान‘ के स्थान पर ‘उसमान‘ होगा।इस तरह से यह विकल्प भी ग़लत हो गया है। प्रश्न 10 देखिए– ‘चन्द्रमा’ तथा ‘ब्राह्मण’ के लिये एक शब्द है। इस प्रश्न में ‘लिये’ का प्रयोग अशुद्ध है; क्योंकि ‘लिये’ शब्द क्रिया है, जबकि यहाँ अव्यय के रूप में ‘लिए’ का प्रयोग किया गया है।

एक प्रश्न में ‘आवरोही क्रम‘ का प्रयोग किया गया है, जो कि ग़लत है; सही शब्द ‘अवरोही‘ है, फिर प्रश्न उठता है, प्राश्निक (प्रश्नपत्र तैयारकरनेवाला) ‘अवरोही’ क्रम की बात कर रहा है अथवा ‘आरोही क्रम’ का?

प्रश्न 34 के उत्तर-विकल्प (A) में ‘अशोघित जन्म दर’ (B) में ‘अशोघित मृत्यु दर’ तथा (C) में ‘प्रव्रजन’ दिये गये हैं। वर्तनी की दृष्टि से तीनों अशुद्ध हैं; शुद्ध शब्द क्रमश: हैं :– ‘अशोधित जन्मदर’, ‘अशोधित मृत्युदर’ तथा ‘प्रब्रजन’। उक्त प्रश्नों में अंगरेजी के बड़े अक्षरों का प्रयोग किया गया है; जबकि अधिकतर प्रश्नों में छोटे अक्षरों के ही प्रयोग हैं। प्रश्न 56 में वैकल्पिक उत्तर (a) में ‘कृषी‘ दिया है, जबकि ‘कृषि’ होगा। प्रश्न 83 के विकल्प (c) में ‘असम’ दिया गया है, जबकि असम का नवीनतम नाम ‘असोम’ है। प्रश्न 84 में ‘पुर्वानुमान प्रणाली’ दिया हुआ है, जबकि सही शब्द ‘पूर्वानुमान’ है। इसी के वैकल्पिक प्रश्न (d) में ‘उपरोक्त में कोई नहीं’ दिया गया है। ज्ञातव्य है कि ‘उपरोक्त’ का कोई अर्थ नहीं होता। उपरोक्त के स्थान पर सार्थक शब्द ‘उपर्युक्त’ का प्रयोग होगा। इस प्रकार यह उत्तर लिखा जायेगा– ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं।’ प्रश्नपत्र में ‘उपरोक्त’ का प्रयोग पच्चीसों बार हुआ है। प्रश्न 21 में ‘प्राकृतिक आपदाओं’ और ‘भारत आपदायुक्त देश है’ का उल्लेख है, जबकि उनके स्थान पर ‘आपदाओं’ और ‘भारत आपदामुक्त देश है’ का प्रयोग होगा। प्रश्न 56 के विकल्प में ‘अलंकारिक परिभाषा’ अंकित है, जबकि ‘आलंकारिक परिभाषा’ होगाप्रश्न 57 में ‘कुर्सियों की टांग’ के स्थान पर ‘कुर्सियों की टाँगें’ होगा। यहाँ पर भी समुचित ‘अयोगवाह और वचन’ का अशुद्ध प्रयोग हुआ है। प्रश्न 69 के विकल्प (c) में ‘आर्द्रता’ की वर्तनी अशुद्ध है। प्रश्न 72 के सभी विकल्प अशुद्ध हैं; क्योंकि किसी में भी ‘पूर्ण विरामचिह्न प्रयुक्त नहीं हुआ है। इसी के विकल्प (a) में ‘व्याख्यान दिया’ के स्थान परव्याख्यान किया’ होगा। विकल्प (b) में ‘मोबाइल’ के स्थान पर ‘मोबाईल’ प्रयुक्त है। प्रश्न 99 में ‘जैवीक आपदा’ का प्रयोग किया गया है, जो कि वर्तनीदोष है; क्योंकि शुद्ध शब्द ‘जैविक’ है। प्रश्न 109 में ‘अगणी’ का प्रयोग है, जबकि सही शब्द ‘अग्रणी’ है। प्रश्न 115 के विकल्प (a) में ‘मंत्रीमंडल’ दिया हुआ है, जबकि सही शब्द ‘मंत्रिमंडल’ है। प्रश्न 116 के प्रश्न में सड़कों की ‘लम्भाई’ अंकित, जो कि ‘लम्बाई’ शब्द है। प्रश्न 122 में ‘पारिस्थितिकी’ और ‘प्रजातीय’ के स्थान पर ‘पारिस्थिति की’ और ‘प्रजातिय’ दिये गये हैं। इसी प्रश्न के वैकल्पिक उत्तर में ‘उष्ण कटिबन्धीय‘ के स्थान पर ‘उष्ण कटीबंधीय‘ है। प्रश्न 129 के विकल्प (d) में ‘नदियों और झिलों’ का प्रयोग किया गया है, जबकि ‘नदियों और झीलों’ होगा। ‘संस्तुतियाँ’, ‘शक्तियाँ’ तथा यूरोप’ के स्थान पर ‘संस्तुतिया’,’शक्तिया’ तथा ‘युरोप’ शब्द के प्रयोग किये गये हैं। एक प्रश्न है :– 15 वाँ प्रवासी भारतीय दिवस जनवरी, २०१९ में किस शहर में आयोजित होगा? इनके विकल्प के रूप में दिये गये शब्द-वर्तनी को देखें — वारणासी, वदोदरा तथा पूणे। ये तीनों– वाराणसी, बड़ोदरा तथा पुणे लिखे जायेंगे। अब एक प्रश्न के अशुद्ध प्रयोग को समझें :– निम्नलिखित में से किन स्थानों मध्य पाषाण काल में पशु पालन के प्रमाण मिलते हैं? यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध तो है ही, वाक्यविन्यास भी सन्तुलित नहीं है। प्रश्न 43 के विकल्प (a) में ‘ठेंदुलकर समिति’ दिया गया है, जबकि सही नाम ‘तेंदुलकर समिति’ है, जो सुरेश तेन्दुलकर के नाम पर है। इसी के विकल्प (c) में ‘लकड़ावाला समिति’ के स्थान पर ‘लकड़वाला’ अंकित है। प्रश्न 44 में ‘प्रतिशतांश’ और ‘रीपोर्ट’ का प्रयोग है, जबकि ‘प्रतिशतांक’ और ‘रिपोर्ट’ होगाप्रश्न 130 के विकल्प (c) में ‘इकाई के स्थान पर ‘ईकाई‘ दिया गया है, जो कि कोई सार्थक शब्द ही नहीं है। प्रश्न 141 में ‘गांव’ और ‘अन्तर्राष्ट्रीय संगठन’ का उल्लेख है, जो कि ग़लत है; सही शब्द हैं, ‘गाँव’ और ‘अन्तरराष्ट्रीय संगठन’। प्रश्न 146 में ‘ऊंची’ की जगहऊँची‘ होगा। प्रश्न 92 में ‘मन्द बुद्धिमान’ को एक साथ प्रयोग किया गया है, जबकि अलग-अलग प्रयोग होता है; इस तरह से– मन्द बुद्धिमान। दूसरी बात, यह शब्द ही ग़लत है; क्योंकि बुद्धिमान के साथ ‘मन्द’ शब्द का प्रयोग अनुपयुक्त है। प्रश्न ९६ में ‘श्रृंखला’ की वर्तनी अशुद्ध है। एक अन्य प्रश्न– ‘महिला एवं बाल विकास के लिए स्वतन्त्र मन्त्रालय कब स्थापित किया गया? इसके विकल्प देखें– 1985, 1986, 1987 तथा 1988। ये सभी विकल्प ग़लत हैं; क्योंकि ३० जनवरी, २००६ ई० को इसकी स्वतन्त्र मन्त्रालय के रूप में स्थापना की गयी थी।

अब हिन्दीभाषा से सम्बन्धित प्रश्नों और उनके विकल्पों में दिख रही अशुद्धियों पर विचार करते हैं :—
प्रश्न 9 को देखें-–यह प्रश्न और इसका उत्तर अशुद्ध है। ‘मसृण’ का विलोम है इस प्रश्न के अन्त में विवरणचिह्न (:–) लगेगा, जो कि नहीं लगा है। इसका विलोम शब्द ‘रुक्ष’ है, जबकि ‘रूक्ष’ दिया हुआ है। ‘रूक्ष’ कोई सार्थक शब्द नहीं है। इस प्रकार इस प्रश्न के सभी विकल्प ग़लत हैं। प्रश्न 11 के सभी विकल्प अशुद्ध हैं; क्योंकि किसी भी विकल्प में अनिवार्यत: प्रयुक्त होनेवाला पूर्ण विरामचिह्न नहीं लगाया गया है। विकल्प (d) में ‘मां‘ के स्थान पर ‘माँ’ का प्रयोग होगा। यहाँ पर ‘अयोगवाह-प्रयोगदोष’ है; जबकि प्रश्न 72 के विकल्प (c) में ‘माँ’ का ही प्रयोग है। प्रश्न 18 के सभी विकल्प ग़लत हैं। प्रश्न देखें– अधोलिखित में अशुद्ध वर्तनी वाला शब्द है यहाँ भी प्रश्न के अन्त में विवरणचिह्न नहीं है। इसके अलावा ‘अधोलिखित में’ के स्थान पर ‘अधोलिखित में से’ होगा; क्योंकि विकल्पों में से एक उपयुक्त विकल्प का ही चयन करना है। अब इसके विकल्प देखिए :– दधीचि, याज्ञवल्क्य, निवृत्ति तथा घनिष्ट। यहाँ ये चारों शब्द ‘शुद्ध’ हैं। ऐसे में, प्रश्नानुसार ‘अशुद्ध’ शब्द परीक्षार्थी ‘कहाँ से’ लायेगा? प्रश्न 19 की वाक्य-संरचना देखें— ‘उसे मृत्यु-दंड की सजा मिली’ प्रस्तुत वाक्य की अशुद्धि स्पष्ट करें। इसके स्थान पर होगा– ‘उसे मृत्यु-दंड की सजा मिली’, इस वाक्य में निम्नांकित में से किस प्रकार की अशुद्धि है?
इनके अतिरिक्त पच्चीसों ऐसी अशुद्धियाँ हैं, जहाँ प्रश्नात्मक और वैकल्पिक वाक्यों में विरामचिह्न तथा विवरणात्मक प्रश्नों में ‘विवरणचिह्न’ नहीं दिखते। ऐसे में, उक्त प्रामाणिक विश्लेषण के आधार पर “डंके की चोट पर” उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग के इस परीक्षा से सम्बन्धित समस्त अधिकारियों की अयोग्यता रेखांकित हो रही है। आयोग के सचिव को इस पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा; क्योंकि इसके साथ देश के लाखों परीक्षार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इतना ही नहीं, उत्तरप्रदेश के उच्च शिक्षामन्त्री, मुख्यमन्त्री तथा देश के प्रधानमन्त्री को शिक्षा-परीक्षा की गुणवत्ता को वापस लाने के लिए आयोग के ‘अकर्मण्य, अयोग्य और कामचोर’ अधिकारियों की नकेल कसनी होगी; क्योंकि वहाँ के कुछ अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से साहित्यिक संस्थानों का भी ‘अतिरिक्त दायित्व’ सौंपा गया है। जैसे– आयोग के एक अधिकारी को ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’, इलाहाबाद में वर्षों से ‘कोषाध्यक्ष’ बनाया गया है, जो वहाँ रहकर सम्पादक, संयोजक, संचालक आदि की भूमिका में दिखता है। ऐसे अधिकारियों को वहाँ से अविलम्ब हटाकर आयोग के कार्यों के साथ ही जोड़ना होगा, जिससे कि वे अपनी साहित्यिक और भाषिक मेधा का प्रयोग इन प्रश्नपत्रों को संशोधित करने में उपयोग करें।

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