ग्रंथों से जीवन के तमाम अंतर्विरोधों का होता है निराकरण

धूप से बिजली बनाना हो या फिर पानी से बिजली तैयार करने की तकनीक। कम संसाधनों में अपने हुनर को नई उड़ान दे रहे सरकारी स्कूलों के बच्चों के ऐसे ही न जाने कितने मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई गई है। जहा न केवल स्कूली बच्चों की काबिलियत से रूबरू कराया जा रहा है, बल्कि युवाओं को बेकार घरेलू सामग्री से तरह-तरह की उपयोगी वस्तुएं बनाना सिखाकर रोजगार से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी परिसर में लगे लखनऊ पुस्तक मेले में आई केयर इंडिया की ओर से पहली बार अंकुरम शिक्षा महोत्सव का आयोजन हुआ। जहां लखनऊ के 17 स्कूलों सहित प्रदेश के आठ जिलों के करीब 40 स्कूलों के बच्चों द्वारा तैयार मॉडल का प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संदेश को फैलाकर उनके हुनर से रूबरू कराया जा रहा है। मेले के तीसरे दिन रविवार छुट्टी के दिन पाठकों की जबरदस्त भीड़ रही।
लोगों ने अपनी मनपसंद किताबों के साथ मेले में आयोजित कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया। संस्था के आशीष मौर्या ने बताया कि मेले में आने वाले लोगों को महोत्सव में रखे मॉडल के बारे में बताकर उनको घरेलू बेकार की वस्तुओं से तरह-तरह के शो पीस बनाने का तरीका भी बताया जा रहा है। महोत्सव में साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों की बदौलत बाल व युवाओं की भीड़ रही। जिलों से आए बच्चों ने रंगबिरंगी प्रस्तुतिया देकर दर्शकों का मनमोह लिया। इससे पहले बस्ती के सरकारी विद्यालयों के बच्चों ने काव्यपाठ किया। वहीं मेले के मुख्य पांडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ सहज योग से किया गया। कर्नल चक्रवर्ती और डॉ एससी मित्तल ने सहज योग के साथ कुण्डलिनी जागरण से आत्म साक्षात्कार के बारे में बताया। शाम को प्रयास रूपल द्वारा रचित व मां शकुंतला श्रीवास्तव को अर्पित पुस्तक वो लटक बाल का लोकार्पण ऑन लाइन गाथा के स्टॉल पर किया गया। न्यायाधीश व संयुक्त निबंधक ज्ञानेश कुमार ने पुस्तक का लोकार्पण किया। साथ ही सदानंद तत्वज्ञान परिषद के सत्संग में महात्मा कमलजी ने जीवन में सादगी और सच्चाई अपनाने पर बल दिया। ओपन माइक में अंकित, रवि, प्राशु, हितेश आदि ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


युवाओं से जुड़ी है ‘जागो उठो चलो’ किताब


पुस्तक मेले में पं. हरिओम शर्मा हरि की पुस्तक ‘जागो उठो चलो’ और ’12 महीने 365 दिन’ पर चर्चा की गई। विधानसभाध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि जीवन में तमाम अंतर्विरोध आते हैं और उनका निराकरण हमें ग्रंथों में मिल जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर वैदिक काल के कठोपनिषद आदि ग्रंथ जो संदेश देते हैं वहीं हरिओम शर्मा की ये पुस्तकें भी देती हैं। आइएएस उमेश चंद्र तिवारी ने कहा कि पं.शर्मा की यह पुस्तक हमें सामाजिक व्यवस्था में मजबूती प्रदान करती है। टीपी हवेलिया ने कहा कि पं.शर्मा की पुस्तकें समाज का पथ प्रदर्शक हैं। कृषि और दुग्ध उत्पादन में रोजगार की संभावनाओं पर हुई परिचर्चा में हिमाशु गंगवार, राघवेन्द्र श्रीवास्तव, रामशरण वर्मा, कर्नल सुभाश देशवाल और आईकेयर इंडिया के मिशन प्रमुख अनूप गुप्ता ने विचार व्यक्त करते हुए परम्परागत तौर-तरीकों के साथ नई तकनीकों के प्रयोग को जरूरी बताया। शाम को सदानन्द तत्वज्ञान परिषद के सत्संग में महात्मा कमलजी ने जीवन में सादगी और सच्चाई अपनाने पर बल देते हुए जीवात्मा और परमात्मा की बात रखी।