सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

अब ‘भारतीय हॉकी-दल’ को भंग करने की ज़रूरत

◆ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

■ आज भारतीय दल हॉकी-विश्वकप से बाहर हुआ।
● हॉकी-विश्वकप की प्रतियोगिता मे क्वार्टर फ़ाइनल मे पहुँचने के लिए न्यूज़ीलैण्ड के विरुद्ध भारतीय खिलाड़ियों का बेहद घटिया प्रदर्शन रहा।
● न्यूज़ीलैण्ड-दल ने भारतीय दल को ‘पेनाल्टि शूट-आउट’ मे ५-४ से बुरी तरह से परास्त कर, विश्वकप-प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
● भारतीय दल १-०, २-०, ३-१ तथा ३-२ से आगे रहा; परन्तु अपनी अग्रता (बढ़त) को बचा न सका।
● भारतीय दल को सर्वाधिक १० पेनाल्टि कॉर्नर मिले थे, जिनमे से वह ३ को भी गोल मे बदल नहीं सका था।
● भारतीय दल की आक्रमण-पंक्ति व्यर्थ सिद्ध होती रही, जबकि रक्षा-पंक्ति बेहतर दिखी।
● भारतीय खिलाड़ियों से जिस तरह की ‘बुनियादी ग़लतियाँ’ होती रहीं, नहीं होनी चाहिए थीं, जिसके कारण न्यूज़ीलैण्ड-दल ‘प्रत्याक्रमण’ और ‘पेनाल्टि-कॉर्नर’ के द्वारा गोल करता रहा और भारतीय खिलाड़ी मुँह चियार कर (फैलाकर) अपने गोल-पोस्ट मे जाते गेंद को देखते रह जाते थे।
● अनेक भारतीय खिलाड़ी अपने अधिकार मे गेंद को लेते ही स्वयं को ‘मेजर ध्यानचन्द’ का अवतार समझते हुए, ड्रिबलिंग करते हुए, ५ से १० मीटर तक गेंद को नचाते रहते थे, जबकि उन्हें छोटे-छोटे पास देकर ‘गोल-पोस्ट’ की ओर बढ़ने चाहिए थे।
● महत्त्वपूर्ण समय पर पास दिये गये गेंद को लेकर आक्रमण बनानेवाले खिलाड़ी बहुत कम दिख रहे थे।
● अब इस हॉकी-दल को भंगकर नये सिरे से ‘जूनियर खिलाड़ियों’ मे से जो वरीयता-क्रम मे पाँच सर्वाधिक प्रतिभावान् खिलाड़ी हों, उन्हें विधिवत् प्रशिक्षित कर, खेलने का अवसर देना चाहिए।
● क्वार्टर फ़ाइनल के लिए हुए मैच मे जिन-जिन खिलाड़ियों का निराशाजनक प्रदर्शन रहा, उन्हें एक वर्ष के लिए ‘आरामगाह’ मे भेज देना चाहिए।
● पाँच खिलाड़ियों को ‘पेनाल्टि-कॉर्नर-विशेषज्ञ’ बनाने के लिए ‘विशेष’ प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी होगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ जनवरी, २०२३ ईसवी।)