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जन्मदिन पर विशेष : देश के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक माखनलाल चतुर्वेदी

ये कलरव कण्ठ सुहाने लगते हैं
संदर्भ:- जन्मतिथि-, 4 अप्रैल

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” कवि, साहित्यकार-

“मुझे तोड़ लेना वनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावे वीर अनेक “।

ऐसी कविताओं के कवि, सरल भाषा व ओजपूर्ण भावनाओं के अनूठे रचनाकार देश के ख्यातिप्राप्त लेखक, कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 में हुआ था। प्रभा और कर्मवीर के आप संपादक रहे। इन पत्रों में आपने ब्रिटिश शासन के खिलाप जोरदार प्रचार किया। नई पीढ़ी को आह्वान किया कि तुम गुलामी की जंजीरों को तोड़कर बाहर आओ। उन्हें कई बार इसी कारण अंग्रेजों का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रेमी थे। इन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और जेल भी गए। 1921 व 1922 में जेल यात्रा की। आप प्रकृति प्रेमी भी थे। मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई नामक स्थान पर जन्मे चतुर्वेदी के पुट नंदलाल चतुर्वेदी थे। आपने प्राइमरी शिक्षा के बाद घर पर ही संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती भाषाओं का अध्ययन किया।

माखनलाल चतुर्वेदी का तैकलीं राष्ट्रीय परिदृश्य और घटनाक्रम ऐसा था जब लोकमान्य तिलक का उदघोष स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है । बलि पंथियों का प्रेरणास्रोत बन चुका था। दक्षिणी अफ्रीका में सत्याग्रह के अमोघ अस्त्र का सफल प्रयोग कर बापू का राष्ट्रीय परिदृश्य के केन्द्र में आगमन हो चुका था। आर्थिक स्वतंत्रता के लिए स्वदेशी का मार्ग चुना गया था।सामाजिक सुधार के अभियान गतिशील थे। राजनैतिक चेतना स्वतंत्रता की चाह के रूप में सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई थी। ऐसे समय में हिन्दी केसरी ने राष्ट्रीय आन्दोलन और बहिष्कार विषय पर निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसमें खंडवा के युवा शिक्षक माखनलाल चतुर्वेदी का निबन्ध प्रथम आया।

अप्रैल 1913 में खंडवा निवासी हिन्दी सेवी कालूराम गंगराड़े ने एक मासिक पत्रिका”प्रभा” का प्रकाशन आरंभ किया। जिसके सम्पादन का दायित्व माखनलाल चतुर्वेदी को सौंपा।सितम्बर 1913 को उन्होंने शिक्षक की नोकरी छोड़ दी।आप पूरी तरह पत्रकारिता, साहित्य और राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गए।

इसी वर्ष कानपुर सर गणेश शंकत विद्यार्थी ने प्रताप का सम्पादन प्रकाशन आरम्भ किया।1916 के लखनऊ में आयोजित कॉंग्रेस के अधिवेशन के दौरान चतुर्वेदी ने विद्यार्थी के साथ मैथिलीशरण गुप्त व महात्मा गांधी से मुलाकात की। महात्मा गांधी द्वारा 1920 के असहयोग आंदोलन में महाकौशल अंचल से पहली गिरफ्तारी माखनलाल चतुर्वेदी ने दी।

1930 को सविनय अवज्ञा आंदोलन करने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया। चतुर्वेदी के महान कृतित्व के तीन आयाम हैं पत्रकारिता में प्रभा,कर्मवीर ,प्रताप का आपने सम्पादन किया। उनकी कविताएं, नाटक, कहानी, अभिभाषण, व्याख्यान आदि प्रमुख हैं। 1943 में उन्हें हिंदी साहित्य के सबसे बड़ा देव पुरस्कार मिला। उन्हें यह सम्मान हिमकिरीटनी पर दिया गया। पुष्प की अभिलाषा व अमर राष्ट्र के लिए इन्हें 1959 में डी लिट् की मानद उपाधि से समान्नित किया गया। 1963 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से अलंकृत किया।16 जनवरी 1965 को उनका खंडवा में नागरिक अभिनन्दन किया। भोपाल का माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविधालय उन्हीं के नाम से हैं। उनको काव्य संग्रह हिमतरंगिनी के लिए 1955 में हिंदी के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

माखनलाल चतुर्वेदी की प्रमुख कृतियो में हिमकिरिटीनी, हिमतरंगिणी, युगचरण, समर्पण, मरण ज्वार, माता, वेणु लो गूँजे धरा, बिजुरी काजल आज रही, इनकी प्रसिद्ध काव्य कृतियाँ है। कृष्णर्जुन युद्ध, साहित्य के देवता, समय के पांव, अमीर इरादे:गरीब इरादे आदि इनकी प्रसिद्ध गद्यात्मक कृतियाँ है।

98 पुरोहित कुटी,श्री राम कॉलोनी,भवानीमंडी जिला झालावाड राजस्थान

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