आधुनिक वेदान्त के विख्यात आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद

संदर्भ:- 12 जनवरी (विवेकानंद जयंती)

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”

कवि, साहित्यकार वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानन्द जी के बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। सब उन्हें नरेन्द्र के नाम से पुकारते थे। उन्होंने अमेरिका के शिकागों में विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन यूरोप और अमेरिका में स्वामी जी ने प्रसारित किया था। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे।

एक असीमित पवित्र शुद्ध सोच एवम गुणों से परिपूर्ण उस परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पित रहे इस युवा सन्यासी ने दुनिया को आध्यात्म का रहस्य समझाया था। कलकत्ता के कुलीन परिवार में जन्मे स्वामी जी बंगाली परिवार के थे। उन्होंने अपने गुरु से सीखा की सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार है इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। अपने गुरु के शरीर त्यागने के बाद स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत की स्थितियों का ज्ञान प्राप्त किया।

1893 में संयुक्त राज्य अमेरिका गए। उन्होंने इंग्लैंड व यूरोप में भी हिन्दू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया। खूब व्याख्यान दिए। भारत मे स्वामी जी को देशभक्त संत माना जाता है।इनके जन्मदिन को पूरा देश राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप मे मनाते हैं। बालपन से ही कुशाग्र बुद्धि वाला नरेंद्र आध्यात्म के संस्कार वाला था। माता पिता के धार्मिक वातावरण में बालक नरेंद्र बड़ा हुआ। वह बचपन मे अध्यात्म संबंधी ऐसे प्रश्न कर लेता था जिससे कथावाचक पंडित व मातापिता भी निरुत्तर हो जाते थे। इनकी माता भुवनेश्वरी जी को रामायण पुराण महाभारत सुनने का बहुत शौक था। इनके यहां कई कथावाचक आते थे। इनके घर मे पूजा पाठ चलता रहता था।

दर्शन धर्म इतिहास सामाजिक विज्ञान कला साहित्य सहित अनेक विषयों के ज्ञाता विवेकानंद को वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, पुराणों सहित अनेक हिन्दू धर्म शास्त्रों को पढ़ने में गहन रुचि थी। वह भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रवीण थे । नियमित व्यायाम करते थे। शारीरिक खेलों में नित्य भाग लेते थे। 1884 में कला स्नातक किया।
नरेन्द्र ने डेविड हुम् इमैनुअल कांट जॉन स्टुअर्ट मिल का भी अध्ययन किया । विलियम ने कहा था “नरेन्द्र वास्तव में जीनियस है मैंने कई यात्राएं की लेकिन ऐसा प्रतिभाशाली बालक नहीं देखा। यह विलक्षण प्रतिभा वाला है।”

विवेकानंद स्वप्नद्रष्टा थे वे चाहते थे धर्म जाति के आधार पर मनुष्यो में परस्पर भेद न रहे। उन्हें युवकों से बड़ी आशाएं थी। युवा देश के विकास में भागीदार हों । उठो जागो ओर जब तक चलते रहो जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।
रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था कि यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद को पढ़िए उनमे आप सब कुछ सकारात्मक ही पाएंगे नकारात्मक कुछ भी नहीं। सचमुच स्वामी जी एक महान देशभक्त दार्शनिक वेदान्त के ज्ञाता वक्ता विचारक मानव प्रेमी युवा संत थे। महात्मा गांधी जी को आज़ादी की लड़ाई में जो जनसमर्थन मिला वह स्वामी जी के आह्वान का फल था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख प्रेरणा स्रोत थे।

विवेकानंद पुरोहितवाद धार्मिक आडंबरवाद कठमुल्लापन रूढ़ियों के खिलाफ थे। वे देश के करोड़ो भूखे दरिद्र कुपोषित लोगो को देवताओं की तरह मंदिरों में स्थापित करने की बात कहते थे। ईश्वर ही है ये। भारतीय सभ्यता संस्कृति के प्रति तटस्थ रहे। स्वामी जी कहते थे वह शिक्षा किस काम की जो जीवन मूल्य नहीं सीखाती। जो चरित्र निर्माण नहीं करती। जो समाज सेवा की भावना विकसित नहीं कर सकती। जो साहसी नहीं बना सकती।

स्वामी जी ने कहा शिक्षा वह है जो चरित्र का गठन करे। बुद्धि का विकास करे। व्यक्ति स्वावलंबी बने। वे कहते थे ” शिक्षा मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।”
ज्ञान स्वयं में वर्तमान है मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है। पवित्रता दृढ़ता तथा उद्यम ये तीनो गुण व्यक्ति में एक साथ होना चाहिए। जब तक जीना तब तक सीखना चाहिए। अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है। उतनी ही इच्छा शक्ति हमारी बलवती होती है। तुम अपनी अन्तस्थ आत्मा को छोड़ किसी ओर के सामने सिर मत झुकाओ। जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवो के देव हो तब तक तुम मुक्त नहीं हो सकते।

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
कवि,साहित्यकार
98 ,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी
भवानीमंडी ,जिला – झालावाड़, राजस्थान, पिन 326502

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