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10 मांगों के समर्थन में बैंक कर्मियों ने की टूल डाउन स्ट्राइक

अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस ब्यूरो-
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10 सूत्रीय मांगों के समर्थन में बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक प्रभाव रहा। सरकारी बैंकों के अलावा क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों की करीब 250 शाखाओं में आज दिन भर ताले लटकते रहे। करीब ₹125 करोड़ का बैंकिंग लेनदेन हड़ताल की चपेट में आया तो रोजाना होने वाली कोई ₹20 करोड़ की चेकों की क्लीयरिंग भी नहीं हो सकी। यूनियन नेताओं ने हड़ताल को केन्द्र सरकार और बैंक प्रबन्धन की हठधर्मिता का नतीजा बताते हुए हड़ताल पूरी तरह कामयाब रहने का दावा किया। ‘नो वर्क-नो पे’ रूल के चलते हड़ताली बैंक कर्मचारियों के वेतन से एक दिन की पगार की कटौती होगी।

हड़ताली बैंक कर्मी सुबह 10 बजे स्टेशन रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर एकत्रित हुए। सरकार और बैंक मैनेजमेंट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस की स्थानीय इकाई के चेयरमैन मनोज सिंह ने कहा कि सरकार और बैंक मैनेजमेंट के नकारात्मक रवैये के कारण बैंक कर्मी हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए। कहा कि समय से हड़ताल का नोटिस मिलने के बाद भी इनकी तरफ से बातचीत की पहल नहीं हुयी। दो दिन पहले बातचीत का न्यौता इस शर्त के साथ दिया कि पहले हड़ताल वापस ली जाए, फिर बात करेंगें। कहा कि यूनियनों का कहना था कि पहले बात करो, अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो हड़ताल वापस हो सकती है। सरकार और बैंक मैनेजमेण्ट बातचीत को तैयार न हुए और हमें हड़ताल पर जाना पडा।

यूएफबीयू के स्थानीय संयोजक आर0 के0 पाण्डेय ने कहा कि सरकार तमाम विरोधों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम कर रही है। स्टेट बैंक में सहयोगी बैंकों का विलय सरकार के मनमाने फैसले का ज्वलन्त उदाहरण है। कहा कि बैंकों के हालात अच्छे नहीं हैं। डूबे कर्जों को बट्टे खाते में डाल देने से बैंकों की हालत चिंताजनक हो गयी है। सरकार ने इस बजट में बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए महज ₹10 हजार करोड़ का ही प्रावधान किया है, जो अपर्याप्त है। इसके चलते बैंकें पूंजी जुटाने के लिए शेयरों की बिक्री की ओर धकेली जाएंगी, जो एक तरीके से निजीकरण का प्रयास होगा। पाण्डेय ने कहा कि बैंक कर्मचारी सरकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे और हितों पर कुठाराघात के प्रयास को कामयाब नहीं होने देंगे।

प्रदर्शनकारियों को क्षितिज पाठक, अजय मेहरोत्रा, अनिल सिंह, अनुपम मिश्रा, प्रिया रस्तोगी, आर0 के0 मिश्र, आदर्श बाजपाई, मनोज वर्मा और वर्षा मेहरोत्रा ने सम्बोधित किया। प्रदर्शन में अनामिका सिंह, आकांक्षा द्विवेदी, मोनाली, अनूप सिंह, दीपक शुक्ला, अनुज सिंह, श्याम मोहन, वीर बहादुर, आनंद वर्मा, वरुण, प्रदीप कुमार, संदीप, टी0 के0 कपूर, गोपाल सक्सेना, नन्हें, सुशील कुमार, तुषार, प्रकाश दुबे, शिव कुमार , शिवशंकर, सुरेन्द्र, सुजीत, आलोक मेहरोत्रा, संजय टण्डन, ठाकुर प्रसाद सहित तमाम कर्मचारी मौजूद रहे।