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अधिकारियों की लापरवाही के चलते किसानों को नहीं मिल पा रहा न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ

कछौना, हरदोई – किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके, इसके लिए सरकार क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों की उपज को खरीदती है। परंतु सरकार के लाख प्रयास के बावजूद केंद्र प्रभारियों व ठेकेदारों के गठजोड़ के चलते किसानों को उनका उचित लाभ नहीं मिल पाता। किसान मजबूर होकर अनाज को बाजारों में औने-पौने दामों में बेचते हैं।

केंद्रों पर काफी अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। केंद्र पर लगे बैनर पर केंद्र का नाम, संबंधित कर्मचारियों के अधिकारियों के मोबाइल नंबर दर्ज होते हैं, परंतु उन पर इनकमिंग कॉल की सुविधा तक नहीं होती या फिर उनके फोन बंद होते हैं। केंद्र प्रभारियों द्वारा किसानों को बारदाना नहीं, मशीन कार्य नहीं कर रही है, मजदूर नहीं है, सचिव नहीं है, आदि बहाने बनाकर टरका दिया जाता है। ज्यादातर केंद्रों पर सचिव नदारद रहते हैं। ज्यादातर केंद्र ठेकेदारों द्वारा ही संचालित होते हैैं। ठेकेदार अपने चहेते आढ़तियों से सुविधा शुल्क तय करके खरीद का लक्ष्य पूरा करते हैं। जिसे सरकार अपने ट्विटर अकाउंट या समाचार पत्र में प्रकाशन कर खरीद लक्ष्य को किसानों को अपना फीलगुड कराती है। आम किसानों की गेहूं बिक्री न होने के पीछे एक अहम कारण खरीद लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम होती है, वही केंद्रों पर गेहूं कार्यकारी संस्था द्वारा समय पर नहीं उठाया जाता है। हफ्तों तक किसानों की ट्राली केंद्रों पर ही खड़ी रहती है। किसानों द्वारा खरीदे गए गेहूं का भी उठान नहीं होता है। खाद निगम के भंडारण पर ठेकेदारों का एक बड़ा सिंडिकेट चलता है जिसमें एफसीआई के कर्मचारियों व ठेकेदारों का गठजोड़ होता है। बिना सुविधा शुल्क के गोदामों पर गेहूं नहीं उतारा जाता है। कई दिनों तक ट्रकों की लंबी कतार लगी रहती है। इससे ट्रक मालिकों को केंद्र प्रभारियों के ठेकेदारों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। जिसका बोझ किसानों से सुविधा शुल्क के रूप में लिया जाता है। केंद्र प्रभारियों को बारदाना उठाने पर भी सुविधा शुल्क देना पड़ता है।

केंद्र प्रभारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, कि मजदूर के शुल्क का भुगतान भी बाजार से कम मिलता है उसे जिला प्रबंधकों को खरीद के लक्ष्य के अनुसार कमीशन देना पड़ता है। लगभग ₹30 प्रति कुंतल अतिरिक्त खर्चा देना पड़ता है, जिससे मजबूर होकर हमें यह किसानों से ही लेना पड़ता है। सरकार द्वारा इस बार ऑनलाइन टोकन की सुविधा उपलब्ध कराई गई, परंतु उसे भी केंद्र प्रभारियों ने दरकिनार कर दिया। जब कोई शासन स्तर का अधिकारी निरीक्षण करने आता है, तब केंद्रों पर अपने चहेते किसानों को खड़ा कर लिया जाता है और वह सभी केंद्र प्रभारी की ही भाषा में बोलते हैं। केंद्र पर पेयजल, शामियाना, पार्किंग, तख्त तथा गेहूं की सुरक्षा हेतु तिरपाल आदि व्यवस्थाएं दुरुस्त करा कर फीलगुड कराया जाता है। अधिकारी के जाते ही व्यवस्था जस की तस हो जाती है।

क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के अध्यक्ष रामखेलावन कनौजिया ने बताया, कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एक तरह किसानों के लिए समझ का कार्य करती है। शुक्रवार की तेज बारिश से क्रय केंद्र गौसगंज में पड़ा सैकड़ों कुंटल गेहूं भीग गया, वहीं बालामऊ क्रय केंद्र पर किसानों का गेहूं भीगने की शिकायत मिली है। केंद्र प्रभारियों ने बताया लाख प्रयास के बाद भी कर्मचारी कार्यदाई संस्था के द्वारा गेहूं नहीं उठाया गया है। जिसके कारण सैकड़ों कुंटल गेहूं भीग गया है, जो कि बर्बाद होने की स्थिति में है। संबंधित अधिकारियों से बात करने पर उनका रटा रटाया जवाब मिलता है, कि जांच कराते हैं, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करते हैं। सुविधा शुल्क लेने वाले केंद्र प्रभारियों के खिलाफ जवाबी कार्यवाही की जाएगी। लेकिन व्यवस्थाएं नीचे से ऊपर तक सिस्टम के तहत चलती हैं, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले व राजनैतिक पार्टियां भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही हैं।