सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

डॉ. आंबेडकर और महापंडित राहुल सांकृत्यायन

भारत में ब्राहणों के पास ज्ञान की समृद्ध परम्परा रही , लेकिन वे एक वाल्तेयर नहीं दे सके : बाबासाहेब अम्बेडकर

प्रेम कुमार मणि-


अप्रैल महीने में दो बड़े विद्वानों -चिंतकों का जन्मदिन है ,जिनसे मैं प्रभावित रहा हूँ . ये हैं डॉ आंबेडकर और महापंडित राहुल सांकृत्यायन . डॉ आंबेडकर के जन्मदिन 14 अप्रैल को तो राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजानिक अवकाश होता है , लेकिन राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिन 9 अप्रैल को बहुत कम लोग उन्हें याद करते हैं . इन दोनों में कुछ बातों की समानता है . दोनों प्राचीन भारतीय वांग्मय में गहरी रूचि रखते थे , लेकिन विचारों में आधुनिकता को पसंद करते थे . दोनों वैश्विक दृष्टि रखते थे . दोनों ने सुधारवादी हिन्दू के रूप में कार्य आरम्भ किया ,लेकिन दोनों को इसकी सीमाओं का पता बहुत जल्दी चल गया और दोनों बौद्ध हुए .1927 में आंबेडकर चौदार तालाब विमुक्ति आंदोलन चला रहे थे ,तब राहुलजी बौद्ध धर्म की दीक्षा ले रहे थे . आंबेडकर ने 1956 में दीक्षा ली . दोनों की दिलचस्पी राजनीति में भी थी . एक ने दलितों के बीच तो दूसरे ने किसानों के बीच राजनैतिक चेतना विकसित करने हेतु कार्य किया .
बाबासाहेब अम्बेडकर का जन्म महाराष्ट्र के दलित परिवार में हुआ था . महापंडित राहुलजी का जन्म पूर्वी उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण परिवार में . राहुलजी ने एक जगह आंबेडकर की तुलना महर्षि व्यास से की है . लेकिन प्रतीत होता है आंबेडकर को राहुलजी के बारे में जानकारी नहीं थी ,अन्यथा वह नहीं कहते ‘भारत में ब्राहणों के पास ज्ञान की समृद्ध परम्परा रही , लेकिन वे एक वाल्तेयर नहीं दे सके . ‘