पुरोहित की दो कविताएं

  1. समर्पण की भावना जगाती दोस्ती

रिश्तों में सबसे अच्छा रिश्ता है दोस्ती।
सुख दुख में सबसे पहले काम आती दोस्ती।।

कृष्ण सुदामा सी दोस्ती आज भी मिल जाएगी।
त्याग समर्पण की भावना जगाती है दोस्ती।।

कदम कदम से मिलाकर बचपन से चले साथ जो।
आजीवन वही साथ चल निभाते हैं दोस्ती।।

छल कपट धोखा भी होने लगे जमाने में।
धन के लालच में टूट जाती है अक्सर दोस्ती।।

खेल खेल में कई बार लड़ना झगड़ना होता।
अब बड़े होकर बड़ी जंग कराने लगी दोस्ती।।

सच्चा दोस्त बन कर जो दिखाते हैं लोग यहाँ।
अमर उनकी ही होती है जमाने मे राजेश दोस्ती।।


2. परिंदों में ख़ौफ़


हर शाख अब सूखने लगी
जंगल सारे कटने लगे अब
खेत कंक्रीट के भरने लगे
वन पक्षी अब कम होने लगे
सूखे ठूँठ बेजान लगने लगे
डालें सूखकर गिर गई सारी
आबादी के कहर से डरने लगे
प्रकृति की रम्यता छीनने लगे
मतलबपरस्ती में पेड़ काट अब
लोग फिर से हाथ मलने लगे
छाया वाली डालियाँ अब कहाँ
जब शाख को लोग काटने लगे
कदम्ब की डाल पर खेलते हम
अब बातें पुरानी हो गई सभी
अब डाल पर पक्षी का कलरव नहीं
सारे परिंदे इंसानों से डरने लगे
सुरभित डालियाँ झूमते फल कहाँ
गर्म धरा के जिम्मेदार हम बनने लगे

कवि राजेश पुरोहित
भवानीमंडी

url and counting visits