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भारतीय गणराज्य के संस्थापक : सरदार बल्लभ भाई पटेल

सन्दर्भ:- 31 अक्टूबर (जन्म दिवस)
राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”
कवि, साहित्यकार

हमारे देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री बल्लभ भाई झावेर भाई पटेल जो सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम से लोकप्रिय थे । वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वे एक अधिवक्ता और राजनेता थे। भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस के बड़े नेता व भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे।उन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने एक एकीकृत स्वतन्त्र राष्ट्र में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया।भारत और अन्य जगहों पर उन्हें हिन्दी उर्दू और फारसी में सरदार कहा जाता था जिसका सीधा अर्थ है प्रमुख।। पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947 के भारत पाकिस्तान युद्ध के समय देश के गृह मन्त्री का दायित्व संभाला।
पटेल का जन्म नड़ियाद गुजरात मे हुआ। लेवा पटेल पाटीदार जाति में जन्में पटेल के पिता झवेरभाई पटेल व माता लाड़बा देवी था। ये चौथी संतान थे। सोमाभाई,नरसीभाई,विठ्ठल भाई उनके बड़े भाई थे।
   पटेल की शिक्षा स्वाध्याय से हुई। लन्दन में उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। जब लन्दन से स्वदेश आये तो उन्होंने अहमदाबाद में वकालात की।महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया।
   
 स्वतन्त्रता आंदोलन में पटेल का सबसे बड़ा 
योगदान रहा।1918 में खेड़ा संघर्ष हुआ। गुजरात का खेड़ा सूखे की चपेट में आ गया था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की माँग की। जब यह स्वीकार नहीं किया तो सरदार पटेल महात्मा गांधी व अन्य लोगों ने उन किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिए प्रेरित किया। अंत मे अंग्रेज सरकार झुकी और करों में राहत दी गई। राजनीति में सरदार पटेल को इस तरह पहली सफलता मिली। 1928 में बारदोली गुजरात मे बारडोली सत्याग्रह में हुआ।जिसका नेतृत्व भी पटेल ने किया। उस समय अंग्रेज सरकार ने किसानों के लगान में तीस प्रतिशत वृद्वि कर दी थी। पटेल ने इस लगान वृद्वि का जमकर विरोध किया। अंग्रेज सरकार ने सत्याग्रह आंदोलन को खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाए। लेकिन मजबूरन उन्हें किसानों की मांगों को मानना पड़ा। उन्होंने 22 फीसदी लगान को 6.3  प्रतिशत कर दिया।

 इस सत्याग्रह आंदोलन के सफल होने पर वहाँ की महिलाओं ने बल्लभभाई पटेल को "सरदार" की उपाधि प्रदान की।

   बारदोली किसान संघर्ष के बारे में गांधीजी ने कहा था इस तरह का हर संघर्ष हर कोशिश हमे स्वराज्य के करीब पहुँच रही है और हम सबको स्वराज्य  की मंजिल तक पहुंचाने में ये संघर्ष सीधे स्वराज्य के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

    अधिकांश प्रान्तीय कोंग्रेस समितियां पटेल के पक्ष में थी। गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ से स्वयं को दूर रखा। और इसके लिए नेहरू जी का समर्थन किया। पटेल भारत के उप प्रधानमंत्री व  गृह मंत्री का कार्य सौंप दिया गया।

    गृह मंत्री बनने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता थी देशी रियासतों यानि राज्यों को भारत मे मिलाना। इस कार्य को पटेल ने बिना कोई खून बहाये संपादित किया। केवल हैदराबाद ऑपरेशन पोलो के दौरान उन्हें सेना भेजनी पड़ी थी। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिए उन्हें "भारत का लौह पुरुष" के रूप में जाना जाने लगा। पटेल ने 562 देशी रियासतों का एकीकरण का बड़ा कार्य किया।उन्होंने बी पी मेनन के साथ एकीकरण किया। पटेल व मेनन ने रियासतों के राजाओं को समझाया कि स्वायत्तता देना अब सम्भव नहीं है। इस बात को सभी राजाओं ने खुश होकर विलय का प्रस्ताव  स्वीकार कर लिया।

 जूनागढ़ हैदराबाद जम्मू कश्मीर के राजाओं ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। जब अधिक विरोध हुआ तो जूनागढ़ का राजा भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ़ का विलय हो गया। हैदराबाद के निजाम ने प्रस्ताव नहीं माना तो पटेल ने सेना भेजकर निज़ाम से आत्मसमर्पण करा लिया। नेहरू ने कश्मीर को अपने पास यह कहकर रख लिया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय  समस्या है। 

            पटेल कहा करते थे,मैंने कला या विज्ञान के विशाल गगन में ऊंची उड़ानें नहीं भरी। मेरा विकास कच्ची झोपड़ियों में गरीब किसान के खेतों की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है। 

          देश की स्वतंत्रता के पश्यात पटेल ने भारतीय संघ में छोटी बड़ी 562 रियासतों का एकीकरण किया। विश्व के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में राज्यों का एकीकरण करने का साहस किसी ने नहीं किया। 5जुलाई 1947 को रियासत विभाग की स्थापना की गई। महात्मा गांधी ने पटेल से कहा था रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे। पटेल ने नौकरशाही का पूर्ण कायाकल्प करने का प्रयास किया। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आई.सी.एस का नाम बदल कर आई.ए.एस. कर दिया। अनेक विद्वान उनको भारत का विस्मार्क कहते थे।

             पटेल सही मायने में मनु के शासन की कल्पना थे। उनमें शिवाजी की दूरदर्शिता,कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता थी। वे भारतीयों के हृदय के सरदार थे।

   सरदार पटेल के पत्रों का विशेष संग्रह (1945 से 1950 तक के) दस खण्डों में किया गया। नवजीवन प्रकाशन से अंग्रेजी में इन पत्रों का प्रकाशन किया गया। सरदार पटेल चुना हुआ पत्र व्यवहार कृति को वी शंकर ने सम्पादित किया।

  अहमदाबाद हवाई अड्डे का नाम सरदार बल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय विमान क्षेत्र नाम कर उनका सम्मान किया। गुजरात के बल्लभनगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय है।1991 में मरणोपरांत पटेल को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

   स्टेच्यू इफ यूनिटी 240 मीटर ऊँची पटेल की आदमकद प्रतिमा को गुजरात मे बनाई जिसे 2018 में 31 अक्टूबर के दिन  नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्र को समर्पित किया । यह प्रतिमा पांच वर्षों में 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई। आओ सरदार पटेल के बताए मार्ग पर चलें। 
 
-----श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी, जिला झालावाड़ राजस्थान