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विश्वविद्यालय पूरा जीवन जीने की कला की कार्यशाला होते हैं – राज्यपाल

● लखनऊ विश्वविद्यालय का 63वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न ।

● विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रपति ने दी बधाई ।

विश्वविद्यालय उत्तम चरित्र निर्माण केन्द्र बनें- आनंदीबेन पटेल

लखनऊः 21 नवम्बर, 202

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय के 63वें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है इस दृष्टि से यह दीक्षान्त समारोह महत्वपूर्ण है। गौरवमयी उपलब्धियों को अपने में समेटे लखनऊ विश्वविद्यालय का प्रदेश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने विशेष परिस्थितियों में नवीन तकनीकों के प्रयोग से छात्र-छात्राओं को ज्ञान-विज्ञान सुलभ कराने, उनके मनोबल को संबल प्रदान करने तथा उनमें सामाजिक चेतना का विकास करने में विशेष भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले यही छात्र इस गौरवशाली संस्था की विरासत को आगे ले जायेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की वैचारिक एवं शैक्षिक परम्परा प्राचीन है, परन्तु इस परम्परा में कई उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। भारतीय परम्परा में भौतिकता संबंधी जिज्ञासा एवं वैज्ञानिक चेतना का विकास भी हुआ है। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व अधिक है, क्योंकि वे ज्ञान के नये आयाम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं का वातावरण उन्मुक्त होना चाहिए। छात्र-छात्राएं सांस्कृतिक व शैक्षिक गतिविधियों का न केवल भाग बनें, बल्कि सतत् प्रबन्धन का हिस्सा भी बनें। इससे जानकारी के साथ दायित्वबोध भी बढ़ेगा। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय पूरा जीवन जीने की कला की कार्यशाला होते हैं।

कुलाधिपति ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति में नई ऊर्जा है, नई राजनैतिक प्रतिबद्धता है, बुनियादी शिक्षा हेतु मातृ भाषाओं पर बल है, बहु-आयामिता है, नवाचारों और शिक्षक प्रशिक्षण पर भी बल है। इसके साथ ही इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता विषय चयन को लेकर है। मूल्यांकन की भी अधिक संवेदनशील व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति देश को आगे ले जाने में अह्म भूमिका निभायेगी।

राज्यपाल ने पदक व उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सदैव श्रेष्ठता की चेष्टा करो, क्योंकि साधारणता के लिए कोई स्थान नहीं है। आपकी विचारधारा सदैव राष्ट्रहित में हो न कि राष्ट्र के खिलाफ और देश के सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति में भागीदार बनेें। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह दिन वर्षों तक आप सबकी स्मृति पटल पर अंकित रहेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय को नये लक्ष्य प्राप्त करने एवं राष्ट्र निर्माण हेतु साकारात्मक कदम बढ़ाने की दिशा में प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने 15 विद्याार्थियों को पदक एवं उपाधि देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डा0 दिनेश शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षान्त समारोह का मतलब दीक्षा का अन्त नहीं होता है, बल्कि आज तक आपने जो शिक्षा प्राप्त की है, उससे नये जीवन की शुरूआत होती है। आप लोग सत्य का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ें। यह विशेष अवसर संकल्प लेकर नई ऊचाइंयों को छूने का है। विश्वविद्यालय ने कोरोना काल में पठन-पाठन की आनलाइन व्यवस्था कर सराहनीय प्रयास किया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 आलोक कुमार राय ने अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के 60 प्रतिशत प्रावधानों का अनुपालन लखनऊ विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से ही कर लिया है। इस अवसर पर कुलपति ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

इससे पहले राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने देश के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द की तरफ से लखनऊ विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर विश्वविद्यालय परिवार एवं छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। राज्यपाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय के नवीन प्रकाशनों का विमोचन भी किया। उन्होंने कला दीर्घा, संग्रहालय एवं हैप्पीनेस सेंटर का डिजिटल शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा अंगीकृत छोटे बच्चों को पुस्तक, बैग एवं पोषण युक्त खाद्य सामग्री भेंट की।

दीक्षान्त समारोह में अपर मुख्य सचिव राज्यपाल श्री महेश कुमार गुप्ता, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा श्री केयूर सम्पत, विश्वविद्यालय के अध्यापकगण, छात्र एवं उपाधि प्राप्त करने वाले अन्य छात्रगण आनलाइन जुड़े हुए थे।


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