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आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

प्रश्न– आपको अधोलिखित शब्दों में से जो शब्द/ शब्दप्रयोग अशुद्ध लगते हों, उन्हें शुद्ध करते हुए लिखें—
१- समन्दर
२- जीवन में सुख और दुख दोनों है।
३- पाठ्येत्तर और शिक्षणेतर
४- ऋषि पातंजली एवंम् पाणिनि
५- उसके साँसों/श्वास में

◆ अब कारणसहित शुद्ध उत्तर ग्रहण करें :–
१- समन्दर (फ़ारसी-भाषा)– यह ‘सामन्दर’ का लघु रूप है, जिसका अर्थ ‘अग्निकीट’ (अग्नि से उत्पन्न होनेवाला एक कीड़ा है। ‘समन्दर’ का ‘समुद्र-अर्थ से कोई प्रयोजन नहीं। हमारे देश की ‘शाइर-शाइरा’ (‘शायर-शायरा’ अशुद्ध हैं।) और ‘कवि-कवयित्री’ (‘कवित्री’ और ‘कवियित्री’ अशुद्ध हैं।) इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि वे जिस अर्थ में ‘समन्दर’ का प्रयोग करते आ रहे हैं, वह पूरी तरह से हास्यास्पद है।)
२- जीवन में दु:ख और सुख’ आते हैं। (पहले ‘दु:ख’ आता है। नारी पहले ‘प्रसव-वेदना’ को सहती है, फिर सन्तानप्राप्ति पर प्रसन्नता का अनुभव करती है। जब ‘दु:ख-सुख’ ‘दोनों’ दिख ही रहे हैं तब अलग से ‘दोनों’ का व्यवहार ‘पुनरुक्त-दोष’ है।)
३- पाठ्येतर और शिक्षणेतर (दोनों में ‘इतर’– भिन्न का प्रयोग है, न कि ‘इत्तर’ (निरर्थक शब्द) का है।)
४- महर्षि पतञ्जलि/पतंजलि और पाणिनि (यहाँ शुद्ध शब्द ‘एवं’ है, जो ‘और भी के अर्थ में प्रयुक्त होता है, जिसका यहाँ प्रयोग उचित नहीं है। यहाँ ‘और’ का व्यवहार होगा।
५- उसकी साँस/ उसका श्वास (‘साँस’ से ‘साँसें और साँसों के प्रयोग अशुद्ध हैं। इनके अतिरिक्त ‘श्वाँस’ और ‘श्वांस’ निरर्थक शब्द हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १७ सितम्बर, २०२१ ईसवी।)