सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

कल (३ अप्रैल) रविवार रहेगा। देश-देशान्तर मे बड़ी संख्या मे विद्यार्थी और प्रबुद्धवृन्द को ‘दैनिक जागरण-परिवार’ के सौजन्य से विगत छ: वर्षों से प्रस्तुत किये जा रहे इस भाषिक अभियान की चिर-प्रतीक्षा रहती है और शुद्ध-उपयुक्त शब्दप्रयोग के प्रति अप्रमत्त (जागरूक) वे समस्त आत्मीयजन साप्ताहिक (रविवासरीय) स्तम्भ ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत ‘भाषा की पाठशाला’ मे निरन्तर अध्ययनरत हैं, ई० मेल से प्राप्त उनकी सूचना के आधार पर प्राप्त यह केन्द्रीय विचार की निष्पत्ति है। गुयाना, संयुक्त राज्य अमेरिका, सूरीनाम, मारीशस, नेपाल, न्यूज़ीलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, ओमान तथा क़तर मे भारतीय मूल के अध्यापक, साहित्यकार तथा अन्य हिन्दीप्रेमी आन्तर्जाल-माध्यम से हमारी साप्ताहिक पाठशाला मे ज्ञानवर्द्धन-हेतु अपनी उपस्थिति अंकित कराते आ रहे हैं। हम समस्त हिन्दीसेविजन के प्रति नमित हैं।

आप कल पाँच शब्दों :– शेष; अशेष; अवशेष; अवशिष्ट तथा रिक्त शब्दों के शुद्ध और उपयुक्त व्यवहार से अवगत होंगे।

तो हमेशा की तरह से कल के ‘दैनिक जागरण’ का क्रय कर, अपने/अपनी शब्द-सामर्थ्य मे अभिवृद्धि करना न भूलें।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पाठिकापाठकवृन्द ‘नई दुनिया’ और ‘नव दुनिया’ के माध्यम से हमारी ‘अनन्य’ भाषिक पाठशाला मे प्रवेश कर सकते हैं।

आप समस्त प्रबुद्धजन का स्वागत रहेगा।