सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करें–
(यह वाक्य निर्देशात्मक है, इसलिए यहाँ ‘निर्देशक- चिह्न’ (–) प्रयुक्त हुआ है।)
वाक्य– कल रुई(रूई) की खेती होती है।

सकारण उत्तर
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यह प्रश्न देखने में सहज लग रहा है, जबकि है नहीं। पहली बात, इस वाक्य में ‘कल’ शब्द का प्रयोग है, जो भूत और भविष्यत् काल का परिचायक है; दूसरी बात, वाक्य की क्रिया ‘होती है’ ‘वर्तमान काल’ के अन्तर्गत आती है। यहाँ आपको मात्र क्रिया में बदलाव करना होगा।

अब जो मुख्य विषय है, वह ‘रुई (रूई) की खेती’ को लेकर है। यह सुस्पष्ट हो जाना चाहिए कि ‘रुई’ की खेती नहीं होती, खेती ‘कपास’ की होती है। रूई तो कपास में से निकाली जाती है। इसके लिए आप अधोटंकित तथ्यों को समझें–

★ रुई/रूई— कपास के कोश (यहाँ ‘कोष’ का प्रयोग अशुद्ध है।) का भीतरी रेशा ‘रुई’ है।

★ कपास– एक पौधा, जिसके कोश से रुई निकलती है।
इस तरह से शुद्ध और उपयुक्त वाक्य का गठन होगा :–
(:— यह विवरणचिह्न है, जो गठित वाक्य के लिए प्रयुक्त है।)

◆ कल कपास की खेती होती थी।
(अथवा)
◆ कल कपास की खेती होगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ जून, २०२२ ईसवी।)