मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

——० संरचना-पक्ष ०—–

रचना— किसी भी उस पद्य अथवा गद्य-कृति को ‘रचना’ कहते हैं, जिसका प्रवाह नैसर्गिक होता है और सर्जन करने के लिए किसी का आश्रय नहीं लेना पड़ता।

लेख— किसी विषय पर सांगोपांग अथवा एकांगी दृष्टि से विषय-प्रधान और शास्त्रीय पद्धति में प्रकाशित गद्यबद्ध विचारों को प्रकट करनेवाले लेखन को ‘लेख’ कहते हैं।

निबन्ध— लेखक के ज्ञान, भाव, चित्त-दशा, अभिरुचि तथा व्यक्तित्व के समस्त अंगों में अनुरंजित आत्मानुभूतिपरक विषय का सार्वांगिक अथवा ऐकांगिक प्रतिपादन ही निबन्ध की श्रेणी के अन्तर्गत आता है।

प्रबन्ध— किसी विषय के विस्तृत, सर्वांगीण, पूर्ण तथा वस्तुपरक अध्ययन को निबद्ध करनेवाली गद्य-रचना को ‘प्रबन्ध’ कहते हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ अगस्त, २०२१ ईसवी।)