‘पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक भाषिक पाठशाला’

यह ‘समय’ (छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश) के समाचार-चैनल का चित्र है। इस चैनल के चित्र को ध्यानपूर्वक देखें।

सबसे नीचे के समाचार-शीर्षक को पढ़ें :—

० सभी मृतक लकड़ी से लदे ट्रैक्टर में सवार थे।

इस सामाचारिक वाक्य में भयंकर अशुद्धियाँ लक्षित हो रही हैं।

यहाँ इस वाक्य में दो प्रकार की अशुद्धियाँ हैं :— प्रथम, सार्थक शब्द-प्रयोग की और द्वितीय, कारकीय विभक्ति की।

अब यहाँ हमने क्रमश: दोनों अशुद्धियों पर विचार किये हैं :—
प्रथम अशुद्धि :— ‘मृतक’ का प्रयोग भयंकर भूल है; क्योंकि ट्रैक्टर पर बैठने के लिए सक्रिय रहना पड़ता है। सजीव ही सक्रिय रहते हैं, निर्जीव नहीं। ‘मृतक’ शब्द का अर्थ ‘मरा हुआ’ है। मृतक शब्द का सर्जन ‘मृत’ शब्द से हुआ है। शब्द-भेद की दृष्टि से ‘मृत’ और ‘मृतक’ विशेषण शब्द हैं, जिनका अर्थ ‘मरा हुआ’ है। मृतक की व्युत्पत्ति समझने के लिए ‘मृत’ का संज्ञान आवश्यक है। मृत शब्द ‘मृ’ धातु का शब्द है, जिसका अर्थ ‘मरना’ है। ‘मृ’ धातु में जैसे ही ‘क्त’ प्रत्यय का संयोग होता है वैसे ही ‘मृत’ शब्द की उत्पत्ति हो जाती है। इसी ‘मृत’ शब्द में जब ‘कन्’ प्रत्यय जुड़ता है तब हमें वांछित शब्द ‘मृतक’ की प्राप्ति होती है।

ऐसे में, प्रश्न है : क्या मृतक स्वयं आकर ट्रैक्टर ‘पर’ बैठ गये थे?

यहाँ ‘समय’ चैनल को ‘मृतक’ के स्थान पर ‘लोग’ का प्रयोग करना चाहिए था और भाव को सुस्पष्ट करने के लिए ‘लोग’ से पूर्व ‘दुर्घटना से पूर्व’ वाक्यांश का प्रयोग।

द्वितीय अशुद्धि :— इसके अन्तर्गत कारकीय विभक्ति की अशुद्धि है। जब कोई गहराई में अथवा भीतर प्रवेश करता है तब ‘में’ का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए :— कार, बस, रेलगाड़ी इत्यादिक वाहनों ‘में’ बैठा जाता है और स्कूटर, साइकिल, ट्रैक्टर इत्यादिक वाहनों ‘पर’ बैठा जाता है। इस ‘में’ और ‘पर’ के प्रयोग को निम्नलिखित उदाहरणों से भी समझा जा सकता है :—
१- वह घर में है।
२- वह द्वार पर है।
३- वह डेरा पर है।
४- वह जंगल में है।
५- वह स्कूटर पर बैठी है।
६- वह ट्रैक्टर पर बैठा है।
७- वह रेलगाड़ी में बैठी है।
८- वह नदी में स्नान कर रहा है।
इस प्रकार शुद्ध समाचार-वाक्य है :—
० दुर्घटना से पूर्व लोग लकड़ी से लदे ट्रैक्टर पर सवार थे।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ मार्च, २०२० ईसवी)

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