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आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं॰ पृथ्वीनाथ पाण्डेय

■ निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिए।
★ कल रुई(रूई) की खेती होती है।

सकारण उत्तर–
यह प्रश्न देखने में सहज लग रहा है, जबकि है नहीं। पहली बात, इस वाक्य में ‘कल’ शब्द का प्रयोग है, जो भूत और भविष्यत् काल का परिचायक है; दूसरी बात, वाक्य की क्रिया ‘होती है।’ ‘वर्तमान काल’ की है। आपको मात्र क्रिया में बदलाव करना होगा।

अब जो मुख्य विषय है, वह ‘रुई (रूई) की खेती’ को लेकर है। अब यह सुस्पष्ट हो जाना चाहिए कि ‘रुई’ की खेती नहीं होती, खेती ‘कपास’ की होती है। रूई तो कपास में से निकाली जाती है। इसके लिए आप निम्नलिखित तथ्यों को समझिए :–

★ रुई/रूई— कपास के कोश का भीतरी रेशा ‘रुई’ है।
★ कपास– एक पौधा, जिसके कोश से रुई निकलती है।
इस तरह से शुद्ध और उपयुक्त वाक्य है :—
◆ कल कपास की खेती होती थी।
(अथवा)
◆ कल कपास की खेती होगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ मई, २०२० ईसवी)

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