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भारत-पाकिस्तान-मैच में ‘क्रिकेट’ की जीत हो

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

२४ अक्तूबर को दुबई में भारत-पाकिस्तान के मध्य खेले जानेवाले ‘टी-20 विश्व कप क्रिकेट-प्रतियोगिता’ में भारतीय मीडिया को बहुत उछलने की ज़रूरत नहीं है; क्योंकि ‘टी-20’ में कुछ भी हो सकता है। हम ‘क्रिकेट’ की जीत चाहते हैं। सौमनस्य भाव के साथ वहाँ खेल हो और जिसमें खेल-कौशल हो, वह जीते।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि भारत की तुलना में पाकिस्तान ने दुबई में सर्वाधिक मैच खेले हैं। भारत की ओर से विराट कोहली से अभी तक जिस स्तर के प्रदर्शन की आशा की जाती रही है, उस पर वे अभी तक खरे नहीं उतरे हैं। के० एल० राहुल और रोहित शर्मा पर विश्वास किया जा सकता है। नवोदित हरफ़नमौला वरुण चक्रवर्ती हमारे अनुभवी खिलाड़ियों की तुलना में बेहतर साबित हो सकते हैं। ईशान किशन का आत्मविश्वास हम पिछले मैच में देख चुके हैं। विकेटरक्षक ऋषभ पन्त एक बल्लेबाज़ के रूप में प्रभावकारक दिख नहीं रहे हैं। गेन्दबाज़ के रूप में जसप्रीत बुमराह, आर० डी० चहर, मो० शमी, आर० अश्विन तथा रवीन्द्र जडेजा घातक सिद्ध हो सकते हैं।

हम पाकिस्तान को कमतर नहीं मान सकते। पाकिस्तान के शालीन और गम्भीर बल्लेबाज़ बाबर आज़म ‘टी-20 विश्व कप क्रिकेट-प्रतियोगिता में पहली बार कप्तानी कर रहे हैं। उनके अनुभवी हरफ़नमौला शोएब मलिक प्रभावकारी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम पाकिस्तानी आरम्भिक बल्लेबाज़ फ़ख़र जमाँ के उस प्रदर्शन को भूल नहीं सकते, जब उन्होंने वर्ष २०१७ की ‘चैम्पियन्स ट्रॉफ़ी’ के फ़ाइनल में भारत के विरुद्ध शतकीय पारी खेली थी।

जीत किसी की भी हो; लेकिन एक बात निश्चित है कि दोनों शत्रु-देशों के मध्य २४ अक्तूबर को खेला जानेवाला मैच रहस्य-रोमांच तथा आक्रामकता से भरपूर दिखेगा, जो एक प्रकार से भारत-पाकिस्तान के बीच ‘फाइनल-जैसा’ मुक़बला दिखेगा। एक बात और है, जो मनोवैज्ञानिक स्तर पर भारत के पक्ष में जाता दिख रहा है; और वह यह कि भारतीय खिलाड़ियों ने ‘टी-20 मैच’ में पाकिस्तान को लगातार ५-० से पराजित किया है। इसका मनोवैज्ञानिक लाभ भारत के साथ है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय,प्रयागराज; २२ अक्तूबर, २०२१ ईसवी।)