सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

व्यंग : हम बात रखेंगे आगे साहब की मर्जी

मणि प्रकाश तिवारी

मणि सत्यनारायण तिवारी-


पता लगा कि कोई भी नक्सल जब समर्पण करता है तो सरकार उसे काफी रूपया ,एक सरकारी नौकरी देती है सही मायने में समर्पण करने वाले नक्सल को जो सुविधा मिलती है वो किसी सैनिक को भी नहीं मिलती पता है ऐसा क्यों है ?क्योकि सरकार के अन्दर डर है नक्सल बागियों से, अगर अभी नक्सल कमजोर हो जाए सरकार की ये सभी योजनाएं जो समाज के नक्सल बागियों को मिलती है समाप्त हो जाएँगी |सरकार जब लोगों को सुनना बंद कर देगी तो इन्सान चाहे हम हो या आप या अमर शहीद भगत सिंह हमे यह लगने ही लगेगा कि बहरों को सुनने के लिए बम  के धमाके की आवश्यकता होती है |अब देख लीजिये साहब हमारे गाँव , देहात के बच्चे 12वीं या स्नातक तक हिंदी या स्थानीय भाषा में पढ़ते हैं क्योंकि लगभग सभी सरकारी निःशुल्क विद्यालय जो गरीबों के लिए होते हैं वो हिंदी या स्थानीय भाषा में ही होती है पर जब मेरे गाँव के बच्चे 12वीं के बाद CLAT स्नातक के बाद CAT की परीक्षा देते हैं तो उन्हें पेपर मिलता है अंग्रेजी में या नौकरी के लिए SSC,PO का परीक्षा देते हैं तो उसमे अंग्रेजी का भार 50% से अधिक होता है ,वाह भाई हम गरीब जो देश की 90 % छात्र हैं उनके लिए तो यह परीक्षा ही नहीं है यह परीक्षा देश के 10 % अभिजात्य वर्ग के बच्चों के लिए है जो दून स्कुल ,GD गोयनका ,सेंट माइकल ,डॉन बास्को जैसे लाखों की फीस वाले स्कुल में पढ़ते हैं |मैं अंग्रेजी का विरोध नहीं करता बस यह कह रहा हूँ कि आपको अगर परीक्षा अंग्रेजी में लेनी है तो मेरे गरीब बच्चों को भी प्रारम्भ से ही अंग्रेजी भाषा का माहौल दो क्योंकि किसी भाषा को एक साल में नहीं सीखा जा सकता |

अब यही बात सुप्रीम कोर्ट से कहो तो वह फाइन लगा देता है कि यह सरकार का मामला है आपने PIL डाल कर हमारा समय बर्बाद किया ,PMO या गृह सचिव से कहा तो जबाब आया “हम बात रखेंगे आगे साहब की मर्जी” ,डेढ़ साल हो गए PMO और गृह सचिव को पत्र दिए NEET परीक्षा के आलावा कही और साहब की मर्जी का पता नहीं लग पाया |जब कांग्रेस सरकार में थी तब से गुरूजी श्याम रूद्र पाठक जी का आन्दोलन चल रहा है जिसमे पूरे एक साल ये लिए लगातार ये धरना पर बैठे रहे पर कांग्रेस ने दमन की निति अपनाते हुए एक IIT टॉपर समाज सेवी को हत्यारा ,चोर ,डकैत ,बलात्कारी के साथ उस तिहार जेल में डाल दिया जिसमे अभी तक शहाबुद्दीन को इतने जघन्य अपराध के लिए भी नहीं डाला गया था क्या देश के लोगों के हित में आन्दोलन करना इतना बड़ा गुनाह है कि तिहार में भेज दिया गया इन्हें ?

संघ राष्ट्र एकता और राष्ट्र भाषा का ढकोसला भरता रहता है शायद इसीलिए शिशु मंदिर में “स्टैंड अप “ को “उत्तिष्ठ “ और “सिट डाउन “ को “उपविश “ बोला जाता है पर मित्रों संघ का यह भाषा प्रेम का ढकोसला उपविश के साथ ही बैठ जाता है नहीं तो वह जरुर इस क्षेत्र में आवाज बुलंद करता बहुत उम्मीदें थी कि मोदी जी सुनेगे लेकिन तमाम आवेदन के बाद भी जब कोई आवाज नहीं आया तो ३ बुजुर्ग सत्याग्रही श्याम रूद्र पाठक ,प्रेमचंद्र जायसवाल और ब्रम्हेश्वर मिश्र जी ने सत्याग्रह और धरना के जरीय सरकार तक बात पहुंचानी चाही तो पुलिस द्वारा इन्हें खतरनाक बता कर रस्ते में रोक दिया गया कोई अभिमानी दरोगा इन्हें धमकी दे रहा है कि इनके पैर तोड़ देगा |अगर एक भी लाठी चल गई तो इतिहास को दुहराते देर नहीं लगता जब इतिहास में लाला लाजपत राय पर चली लाठी का बदला लिया जा सकता है और उसे हम सही ठहराते हैं तो वर्तमान में किसी सत्याग्रही पर चले लाठी का बदला क्यों नहीं लिया जा सकता है ?आन्दोलन को अहिंसक ही रहने दिया जाए और सुन लिया जाए तो बेहतर है |खैर लोगो के अन्दर उनके कमजोर होने के कारन,गरीब होने के कारन उनको और उनके बच्चों को बराबरी का दर्जा नहीं मिलना ,उनका अधिकार और समानता छीना जाना , उनकी बात को नहीं सुना जाना ही उनके अन्दर अविश्वास ,उपेक्षा ऐसी भावना उनके अन्दर भरता है जो भावना उन्हें बागी या विद्रोही नक्सल बनाता है |श्रीमान मोदी जी यह अभिजात्य शिक्षा के प्रावधान को,सुप्रीम कोर्ट,हाई कोर्ट में अंग्रेजी की प्रधानता को बदलिए,इन बुजुर्ग सत्याग्रहियों की बात सुन लीजिये वर्ना कभी भी स्थिति गंभीर हो सकती है लोगों के अन्दर गुस्सा है जोकभी भी फूट सकता है | फिर लाखों रूपए बाँट –बाँट कर आन्दोलन शांत करने का प्रयत्न करेंगे जो तब भी शांत न होगा |

मित्रों आप ही इन बुजुर्गों को देखिये जरा इनसे सरकार को क्या सुरक्षा का खतरा हो सकता है ?जो इन्हें मारने – पीटने की धमकी देकर इनके साथ अभद्रता कर इन्हें सत्याग्रह करने और धरना पर बैठने से रोका जा रहा है ?