मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

विद्यार्थियों और अध्यापनकर्म करनेवालों के लिए अत्युपयोगी कर्मशाला सम्पन्न

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आज (१ अगस्त) की भाषा-व्याकरण-भाषाविज्ञान-साहित्य-विषयक आन्तर्जालिक कर्मशाला सभी के लिए उपयोगी रही। हिन्दीकवि और गीतकार नीतेश मिश्र जी प्रश्नकर्त्ता की भूमिका में रहे। सहभागियों का उत्साह और सीखने-जानने-समझने के प्रति ललक अनुकरणीय रही। सहभागी इतने रम चुके थे कि कोई भी अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहता था।

मेरे द्वारा समयावधि पूछने पर आयोजक ऋतुराज रंजन जी ने बताया था कि भेंटवार्त्ता १५ मिनट की रहेगी, जबकि उक्त व्यावहारिक आयोजन अपराह्न ५ बजे आरम्भ हुआ था और आयोजक को बेमन से सायं ७ बजकर ८ मिनट पर समापन करना पड़ा था। इस प्रकार २ घण्टे ८ मिनट कब व्यतीत हो गये थे, भान तक नहीं हुआ। यही रसपूर्ण आयोजन का परिणाम और प्रभाव है; अन्तत:, मुझे समापन करने के लिए कहना पड़ा था; तीन बार कहना पड़ा था; आयोजकवृन्द का मन नहीं भरा था; दर्शक-श्रोतादीर्घा से मानो सांकेतिक ध्वनि आ रही हो– अभी न जाओ छोड़के कि दिल अभी भरा नहीं। सक्रिय सहभागियों को दिलासा दिया गया– पुन: आयोजन कराया जायेगा।