सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

पवित्रता क्या है?

प्रश्न;
क्या “पवित्रता” विषय पर हमें सटीक जानकारी मिल सकती है..?

उत्तर;
गतिशीलता ही पवित्रता है।
पवित्रता का अर्थ शुद्धता से ही है।

संस्कृत की ‘पव्’ धातु से ‘पवित्र’ शब्द बनता है।
इसी धातु से ‘पवन’ और ‘पावक’ शब्द बनते है।
चलते रहने वाले को ‘पवन’ और चलाने वाले को ‘पावक’ कहते हैं।
इसीलिए पैर या पाव के अर्थ में भी ‘पव्’ धातु प्रयुक्त होती है।
और यह बात स्पष्ट ही है कि ‘गतिशीलता’ को ही ‘पवित्रता’ कहते हैं।
रुका हुआ या गतिहीन जल सड़ने लगता है, प्रदूषित हो जाता है, जबकि बहता हुआ या गतिशील जल पवित्र बना रहता है।

मनुष्य भी जो निष्क्रिय अथवा गतिहीन या आलसी बना रहता है, वह दुष्ट हो जाता है।
किन्तु जो मनुष्य सदैव सक्रिय या गतिशील रहता है वह पवित्र हो जाता है।

उक्ति प्रसिद्ध है–
गति का नाम अमर जीवन है।
निष्क्रियता ही घोर पतन है।।

अतः अपनी पवित्रता बनाये रखने हेतु सदैव गतिशील रहें।

✍️🇮🇳 (राम गुप्ता – स्वतन्त्र पत्रकार, नोएडा)