आश्रयगृहों को खोले जाने के वास्तविक उद्देश्य पर कोई बात नहीं कर रहा

विजय कुमार –


कल के समाचार पत्र में एक खबर पढ़ी कि हमारी महिला एवं बाल विकास मंत्री माननीया श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी जी ने देवरिया की शर्मनाक घटना के संबंध मे टिप्पणी की कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा और बसपा की सरकारों ने महिला आश्रयगृहों को मान्यताएं दीं जिनकी मान्यताएं समाप्त कर हम उन्हे बंद करवाएंगे। लेकिन उन्होने इन आश्रयगृहों को खोले जाने के वास्तविक उद्देश्य पर कोई बात नहीं की।

एक उम्रदराज, लंबे राजनीतिक अनुभव से संपन्न शख्सियत से ऐसे बयान का मतलब समझ नही आता? इन महिला आश्रयगृहों एवं सुधार गृहों को इस उद्देश्य के साथ तो कतई किसी सरकार ने नही खुलवाया होगा जैसा कि देवरिया मामले मे उजागर हुआ और न ही उन शर्तों पर जैसा कि हो रहा था। कहीं कोई ऐसी वीभत्स और शर्मनाक घटना का खुलासा होगा तो जनता उसी से तो सवाल करेगी जिसके ऊपर इन व्यवस्थाओं को सही ढ़ंग से क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी होगी फिर इसकी जवाबदेही लेने से परहेज क्यों? क्या इन्हे बंद कर देने से समस्या का समाधान हो जाएगा? यदि इन्हे बंद कर दिया गया तो समाज की बेसहारा महिलाओं एवं बच्चों को आश्रय कहां मिलेगी? क्या अपनी जिम्मेदारी को दूसरे पर थोपना उचित होगा? अच्छा होता कि ऐसे बयान के बजाए इस शर्मनाक घटना की पूरी जिम्मेदारी ली जाती और पूरे प्रदेश के ऐसी सभी संस्थाओं की निष्पक्ष जांच कर जहां भी कमियां मिले उसके जिम्मेदारों पर कठोर कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने का कार्य किया जाता ताकि ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने मे मदद मिलती और पूरे प्रदेश मे एक अच्छा संदेश जाता।

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