उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री ‘संकटमोचक मोबाइल नम्बर’ कब सार्वजनिक करेंगे?

भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी जनसामान्य को रिश्वतख़ोरों, दलालों तथा भ्रष्ट शासकीय कर्मचारियों-अधिकारियों की दादागिरी और मनमाने आचरण से बचाने के लिए ‘संकटमोचक मोबाइल नम्बर’ क्यों नहीं सार्वजनिक करते?

जिस तरह से राज्य के दुर्दान्त अपराधियों से निबटने के लिए मुख्यमन्त्री ने पुलिस-प्रशासन के बँधे हाथ आवश्यकता से अधिक खोल दिये हैं, उसी तरह से भ्रष्टाचारियों, रिश्वतख़ोरों तथा दलालों के विरुद्ध आक्रामक रणनीति कब बनायेंगे?

हमारा युवावर्ग उत्तरप्रदेश-शासन-प्रशासन की दमनीय नीति से त्रस्त होकर आये-दिन आत्महत्या कर रहा है; परन्तु स्वयं को ‘योगी’ कहनेवाले मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ ‘योगी’ का सन्तति-तुल्य शिक्षित बेरोज़गारों के प्रति सदाशयता और पितु-तुल्य वात्सल्य का रस शुष्क पड़ गया है, यह समझकर विस्मय होता है।

हमारा अन्नदाता ‘कृषक-वर्ग’ आज जिस अभाव और संक्रमण के दौर से ग़ुज़र रहा है, उसके प्रति योगी की सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार की आकाल मृत्यु हो चुकी है। खाद, बीज, सिंचाई महँगी कर दी गयी है; समर्थन-मूल्य के नाम पर प्रत्येक वर्ष रबी और ख़रीफ़ की फ़सलों को सरकार-पोषित दलाल अँगूठा दिखाते आ रहे हैं; बैंक-प्रबन्धक ऋण देते समय ऐसा अनुभव कराते हैं, मानो बैंक उनकी ख़ान्दानी सम्पदा हो।

हमारा नगरीय और ग्रामीण समाज रिश्ववतख़ोरों और अत्याचारियों से त्रस्त हो चुका है; कहीं-कोई सुनवाई नहीं। आख़िर ऐसा कब तक चलेगा और जनमानस अन्याय क्यों सहन कर रहा है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ सितम्बर, २०१९ ईसवी)

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